भास्कर एक्सप्लेनर:केयर्न ने भारत की 176 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति सीज की, जानिए कैसे और कब शुरू हुआ विवाद

नई दिल्ली3 महीने पहले
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ब्रिटेन की पेट्रोलियम कंपनी केयर्न एनर्जी और भारत सरकार के बीच रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स (कोई कानून पास होने की तारीख से पहले लागू होने वाला टैक्स) को लेकर विवाद चल रहा है। फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, केयर्न एनर्जी ने फ्रांस के पेरिस में भारत सरकार की 20 संपत्तियों को सीज कर लिया है। केयर्न एनर्जी ने फ्रांस की एक कोर्ट के आदेश पर यह संपत्ति सीज की है। इस संपत्ति की अनुमानित कीमत 20 मिलियन यूरो करीब 176 करोड़ रुपए बताई जा रही है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि केयर्न एनर्जी और भारत सरकार के बीच क्या विवाद है और यह विवाद कब से चल रहा है...

कब शुरू हुआ था विवाद?

यह टैक्स विवाद केयर्न एनर्जी की भारतीय सब्सिडियरी की ओर से 2006-07 में अपने कारोबार में किए गए फेरबदल से जुड़ा है। केयर्न एनर्जी से टैक्स की मांग यूनाइटेड प्रोग्रेसिल अलायंस (UPA) सरकार के दौरान की गई थी। कारोबारी फेरबदल के तहत केयर्न ने 2014 में भारतीय सब्सिडियरी केयर्न इंडिया लिमिटेड में से अपनी अंतिम 10% हिस्सेदारी वेदांता रिसोर्सेज लिमिटेड को बेच दी थी।

कैसे शुरू हुआ टैक्स विवाद?

केंद्र सरकार ने 2012 में इनकम टैक्स एक्ट में बदलाव किया था। इसके तहत ही केयर्न से टैक्स की मांग की गई। टैक्स की वसूली के लिए इनकम टैक्स विभाग ने केयर्न की बची हुई हिस्सेदारी को अटैच कर लिया था। इस हिस्सेदारी के लिए इनकम टैक्स विभाग ने डिविडेंड भी लिया और बाद में इसका बड़ा हिस्सा बेच दिया। केयर्न ने 2015 में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत में केस दायर किया। दिसंबर 2020 में मध्यस्थता अदालत ने केयर्न के हक में फैसला सुनाया। मध्यस्थता अदालत ने भारत सरकार को नुकसान के रूप में केयर्न एनर्जी को 1.2 बिलियन डॉलर की राशि देने का आदेश दिया। ब्याज और लागत को जोड़कर यह राशि 1.7 बिलियन डॉलर हो गई है। भारत सरकार ने मध्यस्थता अदालत के फैसले के खिलाफ अपील दाखिल कर दी है।

भारत सरकार की संपत्ति क्यों जब्त की?

संपत्ति को सीज करना किसी भी सरकार के खिलाफ जीते गए मध्यस्थता अवार्ड को लागू करने का सबसे बेहतरीन तरीका है। मध्यस्थता अवार्ड को लागू कराने के लिए केयर्न एनर्जी ने कई देशों में केस दाखिल किया है। इसमें अमेरिका, ब्रिटेन, सिंगापुर, फ्रांस और नीदरलैंड जैसे देश प्रमुख हैं। 1958 के न्यूयॉर्क कन्वेंशन में भारत ने रिकॉग्निशन एंड एनफोर्समेंट ऑफ फॉरेन आर्बिट्रल अवार्ड कानून पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत किसी भी मध्यस्थता अवार्ड को लागू कराने के लिए भारत की 160 से ज्यादा देशों में स्थित संपत्ति को जब्त किया जा सकता है। इस कानून के तहत मध्यस्थता अवार्ड लागू कराने के लिए विदेशी बैंकों में जमा पब्लिक सेक्टर के बैंकों के फंड, सरकारी बैंकों या कंपनियों की प्रॉपर्टी या संपत्ति को जब्त किया जा सकता है।

क्या पहले किसी देश में ऐसा हुआ है?

हां। 2012 में घाना में अर्जेंटीना के एक समुद्री जहाज को 200 नाविकों के साथ सीज किया गया था। 2001 में अर्जेंटीना की सरकार बॉन्ड के भुगतान में विफल हो गई थी। इन बॉन्ड की रिकवरी के लिए अमेरिकी हेज फंड इलॉयट कैपिटल मैनेजमेंट ने यह कार्रवाई की थी। इलॉयट कैपिटल की सब्सिडियरी NML कैपिटल की अपील पर घाना कोर्ट के आदेश के बाद यह जहाज जब्त किया गया था। अर्जेंटीना 100 बिलियन डॉलर के बॉन्ड की करीब 93% राशि के भुगतान में डिफॉल्ट हुआ था। 2005 और 2010 में इन बॉन्ड को रीस्ट्रक्चर किया गया था।

संपत्ति सीज के अन्य प्रमुख मामले

  • मई 2018 में कोर्ट ने वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी PDVSA की 2 बिलियन डॉलर से ज्यादा की संपत्ति जब्त करने का आदेश दिया था। मध्यस्थता अवार्ड को लागू करने के लिए कोनोकोफिलिप्स (ConocoPhillips) की अपील पर कोर्ट ने यह आदेश दिया था। बाद में PDSVA 2 बिलियन डॉलर की राशि का भुगतान करने पर सहमत हो गई थी।
  • दिसंबर 2020 में ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड की कोर्ट ने मध्यस्थता अवार्ड को लागू कराने के लिए पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरवेज की संपत्ति को सीज करने का आदेश दिया था। इसमें मैनहट्टन का रोजवेल्ट होटल और पेरिस का स्क्राइब होटल शामिल था। थेथियान कॉपर ऑफ आस्ट्रेलिया के 4 बिलियन डॉलर से ज्यादा के मध्यस्थता अवार्ड को लागू कराने के लिए कोर्ट ने यह आदेश दिया था।

क्या भारतीय एम्बेसी और कॉन्सुलेट भी सीज हो सकेंगे?

नहीं। 1961 के वियना कन्वेंशन के प्रावधानों के अनुसार, किसी भी देश की एम्बेसी और कॉन्सुलेट को मध्यस्थता अवार्ड लागू कराने के लिए सीज नहीं किया जा सकता है। हालांकि, अन्य संपत्तियां जैसे एयर इंडिया के एयरक्राफ्ट या फ्रांस में बैंक खाते में जमा राशि या अन्य देशों में स्थित संपत्ति या राशि सीज या जब्त की जा सकती है।

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