त्योहारी सीजन के लिए खास तैयारी:रॉयल लुक के लिए मशहूर चंदेरी साड़ी की सेलिंग का बदला तरीका, अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आप कर सकते हैं शॉपिंग

चंदेरी2 महीने पहले

नवरात्र, दशहरा से लेकर दीवाली, त्योहारी मौसम शुरू हो गया है। त्योहार का मौका हो और नए कपड़ों की खरीदारी ना की जाए, ऐसा कैसे हो सकता है। इसलिए त्योहारी मौसम के बहाने हम आपके लिए चंदेरी से खास पेशकश लेकर आए हैं। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से करीब 210 किमी दूर अशोकनगर जिले में पड़ने वाला कस्बा चंदेरी हैंडलूम साड़ियों और कपड़ों के लिए मशहूर है। चंदेरी के ज्यादातर घरों में हथकरघा बुनाई से साड़ी बनाई जाती है, जो खासतौर पर रॉयल लुक के लिए मशहूर है। चंदेरी साड़ियों की कीमत 800 रुपए से लेकर 7 लाख रुपए तक हो सकती है।

कोविड संकट के करीब 18 महीनों में बाकी दूसरे कारोबारों की तरह ही चंदेरी हैंडलूम का भी बुरा हाल हुआ। बुनकरों, कारोबारियों, रिटेलर्स और इस उद्योग से जुड़े दूसरे लोगों को भी भारी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा है, लेकिन अब पूरे चंदेरी साड़ी उद्योग को उम्मीद है कि त्योहारी सीजन से कारोबारी बदहाली के दिन फिरेंगे और लोग फिर से चंदेरी की मशहूर साड़ियां और दूसरे कपड़े खरीदेंगे। त्योहारी सीजन के लिए यहां के बुनकरों और कारोबारियों ने खास तैयारियां भी की हैं। वहीं अगर आप घर बैठे चंदेरी साड़ियां खरीदना चाहते हैं तो चंदेरी के बुनकरों ने अपने प्रोडक्ट आप तक पहुंचाने के लिए डिजिटल रास्ते तलाश लिए हैं।

कोविड ने सिखाए बिजनेस के नए गुर
चंदेरी के रहने वाले 25 साल के बुनकर मुबीन मोहम्मद बपचन से ही बुनाई के काम में लगे हुए हैं। पीढ़ियों से उनके घर में यही काम हो रहा है, लेकिन पहले और अब में एक फर्क आ गया है। पहले उनका पूरा परिवार सिर्फ साड़ियां बनाया करता था और मास्टर वीवर या फिर थोक कारोबारी को बेच दिया करता था, लेकिन अब मुबीन कहते हैं कि डिजिटल तरीकों की मदद से अब हम सीधे कस्टमर से संपर्क कर पाते हैं और उन्हें हमारे प्रोडक्ट बेच पाते हैं।

सोशल मीडिया के जरिए साड़ियों की बिक्री
मुबीन बताते हैं, ‘हमने अपनी डिजिटल मार्केटिंग के लिए फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम जैसी सोशल मीडिया साइट्स का सहारा लिया है। हम इन प्लेटफॉर्म पर अपनी साड़ियों के फोटो पोस्ट करते हैं। अगर किसी यूजर को हमारी साड़ी पसंद आती है तो साड़ी की कीमत पूछता है और अगर वो ज्यादा जानकारी मांगता है तो हम वो भी दे देते हैं। इसके बाद हम स्पीड पोस्ट से साड़ी उसके घर पार्सल कर देते हैं। इसके बाद उन्हें हम अपने व्हाट्सएप ग्रुप में शामिल कर लेते हैं और वो हमारे नियमित कस्टमर बन जाते हैं। कोविड के दौर में जब टूरिस्ट का आना बंद था तब डिजिटल तरीका ज्यादा पनपा है। इससे मिडिलमैन का कमीशन खत्म हो गया और हमारा मुनाफा बढ़ा है।’

ऑनलाइन बिक्री से मिलते हैं फुटकर ऑर्डर
ये कहानी सिर्फ मुबीन की नहीं है बल्कि यहां के ज्यादातर लोगों ने ऑनलाइन मार्केटिंग के ये गुर सीखें हैं। हालांकि, बुनकर बताते हैं कि ऑनलाइन बिक्री की इस प्रक्रिया में फायदा तो होता है लेकिन ऑर्डर बहुत फुटकर मिलते हैं। वहीं ऑनलाइन में कई बार चंदेरी के नाम पर लोग कुछ भी प्रोडक्ट बेच देते हैं। इससे चंदेरी की ऑथेंटिक साड़ी की साख पर भी बट्टा लगता है।

बुनकरों के लिए सरकार बनाए वेबसाइट
अमान टुनटुनी के परिवार में भी कई पीढ़ियों से साड़ी बनाने का काम होता रहा है। 25 साल के युवा अमान डिजिटल तरीके से अपने खानदानी व्यापार को नया स्वरूप देने में लगे हैं। अमान बताते हैं कि किसी भी मशहूर चीज की डिजिटल मार्केटिंग करने में कई चुनौतियां सामने आती हैं। ऐसे में जरूरी है कि सरकार कोई ऐसी वेबसाइट बनाए जहां चंदेरी के बुनकर कारोबारी रजिस्टर हों और खरीदार वहां आकर प्रोडक्ट खरीद सकें।

चंदेरी साड़ी खरीदने का डिजिटल रास्ता
अगर आप भी ऑनलाइन साड़ियां खरीदना चाहते हैं तो इंस्टाग्राम, फेसबुक पर चंदेरी साड़ियों के नाम से सर्च कर सकते हैं और अलग-अलग अकाउंट्स में जाकर साड़ियां पसंद कर सकते हैं और चंदेरी के स्थानीय बुनकरों से सीधे साड़ियां खरीद सकते हैं। वहीं इन बुनकरों के कई सारे व्हाट्सएप ग्रुप भी हैं। आप इनमें भी शामिल होकर प्रोडक्ट पसंद कर सकते हैं।

त्योहारी सीजन से बुनकरों को काफी उम्मीद
चंदेरी साड़ियों के कारोबारी इखलाक खान बताते हैं कि ‘चंदेरी में ज्यादातर कोली समाज और मुस्लिम समुदाय के लोग साड़ियों की बुनाई का काम करते हैं। कोविड संकट का दर्द बताते हुए इखलाक कहते हैं कि ‘दो साल से महामारी की मार से पर्यटन करीब-करीब बंद था और इससे साड़ियों का काफी सारा स्टॉक तैयार हो गया है। अब जब त्योहारी सीजन आ रहा है, तो फिर से उम्मीद जागी है कि लोग चंदेरी की साड़ियां खरीदेंगे और व्यापार बढ़ेगा।'

त्योहारी सीजन के लिए हैं चंदेरी की खास तैयारियां
चंदेरी के हैंडलूम पार्क में साड़ियों का कारोबार करने वाले वसीम अंसारी बताते हैं कि ‘त्योहारी सीजन के मद्देनजर हर साल ही हम खास तैयारियां करते हैं। कोविड की दूसरी लहर के बाद ये पहला बड़ा त्योहारी सीजन है, इसलिए हमें और भी ज्यादा उम्मीद हैं। इस त्योहारी सीजन पर हमने खास डिजाइन और खास रंगों की साड़ियां तैयार की हैं। हम हाथों से चलने वाली लूम मशीन पर ही काम करते हैं, किसी भी तरह से पावर लूम का इस्तेमाल नहीं करते हैं।’

कैसे पहचानें कि ये चंदेरी का कपड़ा है?
चंदेरी साड़ियों और दूसरे कपड़ों की खासियत ये है कि ये शुद्ध सिल्क से तैयार होती हैं और इसमें सारा काम बुनकर अपने हाथों से ही करते हैं। ऑटोमेटेक मशीन का यहां बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं होता है। साथ ही साड़ियों पर उकेरी जाने वाली डिजाइन रंगीन धागों के जरिए ही साड़ी में पिरोई जाती हैं। चंदेरी की साड़ियों में ना ही उपर से रंग किया जाता है और ना ही ऊपर से दूसरे धागों के जरिए डिजाइन उकेरी जाती हैं। जो कुछ कारीगरी होती है, वो लूम मशीन पर ही एक ही बार में रंगीन धागों की मदद से की जाती है। साड़ियों के अलावा सूट के कपड़े, साफे, दुपट्टे, कुर्ते तैयार किए जाते हैं।

कितनी बड़ी है चंदेरी हैंडलूम इंडस्ट्री

बुनकरों की अपील
साड़ियों के कारोबारी वसीम अंसारी मास्टर वीवर हैं। वसीम साड़ियों की डिजाइन तैयार करते हैं और नौसिखिए बुनकरों को ट्रेनिंग देते हैं। वसीम कहते हैं कि ‘चंदेरी साड़ी उद्योग का सिर्फ आर्थिक महत्व नहीं है, बल्कि ये एक हैरिटेज है, जिसकी कमान यहां के बुनकर के हाथों में है। सरकार के अलावा आम लोगों को ये समझना होगा कि यहां कि विरासत को बचाना उनकी भी जिम्मेदारी है, इसलिए जरूरी है कि त्योहारों के मौके पर महंगी-महंगी चीजें खरीदने की बजाय चंदेरी के बुनकरों के हाथों से बनी देशी साड़ियां खरीदें। इससे आपका सहयोग तो बुनकरों को मिलेगा ही, चंदेरी का रंग भी निखरेगा।’