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कोविड से लड़ाई में जरूरी है सबका साथ:कंपनियों को CSR का पैसा कोविड केयर में लगाने की इजाजत; बना सकती हैं अस्थायी अस्पताल, टीकाकरण भी करा सकती हैं

7 महीने पहले
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  • कंपनियों को मुनाफे का दो प्रतिशत CSR के तौर पर समाज की भलाई में लगाना पड़ता है
  • देश में हर साल लगभग 15,000 करोड़ रुपए की रकम CSR एक्टिविटी में खर्च होती है

सरकार आम लोगों के लिए कहर बनी कोविड के खिलाफ जंग में कंपनियों को आगे आने के लिए बढ़ावा दे रही है। उसने कॉरपोरेट सोशल रेस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तौर पर समाज की भलाई में खर्च की जाने वाली रकम को कोविड से जुड़े स्वास्थ्य और राहत कार्यों में लगाने की इजाजत दी है। वे CSR फंड का पैसा अब अस्थायी अस्पताल और कोविड केयर बनाने पर खर्च कर सकती हैं। कंपनियां चाहें तो इस फंड से आम लोगों का टीकाकरण भी करा सकती है। ऐसे काम में उनके आगे आने से स्वास्थ्य सुविधाओं पर बढ़ा दबाव कम होगा।

कंपनियों को मुनाफे का दो प्रतिशत हिस्सा CSR पर खर्च करना पड़ता है

कंपनियों को पिछले तीन साल में हुए शुद्ध मुनाफे के औसत के दो प्रतिशत के बराबर रकम CSR के तौर पर समाज की भलाई में लगाना पड़ता है और इसके लिए सरकार ने एक कानून बनाया हुआ है। यह कानून 500 करोड़ रुपए या ज्यादा नेटवर्थ, 1,000 करोड़ रुपए या ज्यादा टर्नओवर या 5 करोड़ रुपए या ज्यादा का मुनाफा कमाने वाली कंपनियों पर लागू होता है। गौरतलब है कि देश में कंपनियों की तरफ से हर साल लगभग 15,000 करोड़ रुपए की रकम CSR एक्टिविटी में खर्च होती है।

CSR फंड अस्थायी अस्पताल बनाने में खर्च किया जा सकता है

कंपनी मामलों के मंत्रालय (MCA) की तरफ से गुरुवार को जारी स्पष्टीकरण के मुताबिक, कंपनियां CSR फंड अस्थायी अस्पताल बनाने या कोविड केयर फैसिलिटी खड़ा करने में खर्च कर सकती हैं। उसका कहना है कि कंपनियां यह काम राज्य सरकारों के सलाह मशविरे से कर सकती हैं, हालांकि उसने टीकाकरण को लेकर कुछ नहीं कहा है। कंपनियों को कोविड पर रोकथाम की कवायद में होने वाले खर्च CSR फंड से करने की इजाजत 23 मार्च 2020 से ही मिली हुई है।

सिर्फ एंप्लॉयी पर किया जाने वाला खर्च CSR में शामिल नहीं माना जाएगा

कंपनियां CSR का फंड अपने एंप्लॉयी और आम लोगों, दोनों के टीकाकरण के अलावा उनके बीच रोग पर रोकथाम करने वाली सामग्रियों और दवाओं के वितरण में भी कर सकती हैं। लेकिन अगर कंपनी इस तरह का खर्च सिर्फ अपने एंप्लॉयी पर करती है तो उसको CSR में शामिल नहीं माना जाएगा। दूसरी बड़ी बात यह है कि कंपनियां अगर इस साल ज्यादा CSR फंड खर्च करती हैं तो वे अतिरिक्त खर्च को अगले साल के फंड से एडजस्ट कर सकती हैं।

DRDO और CSIR ने टेंपररी कोविड केयर फैसिलिटी और अस्थायी अस्पताल बनाए हैं

मंत्रालय की तरफ से यह आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी होने के बाद कंपनी मामलों के सचिव राजेश वर्मा ने 1,000 से ज्यादा कंपनियों के टॉप मैनेजमेंट को पत्र लिखा। वर्मा ने उसमें कहा है, 'मैं आप सबका ध्यान DRDO और CSIR की उस शानदार पहल की तरफ खींचना चाहता हूँ, जिसके तहत उन्होंने टेंपररी कोविड केयर फैसिलिटी और अस्थायी अस्पताल बनाए हैं।'

वर्मा ने दूसरी कंपनियों से भी ऐसे ही कदम उठाने की अपील की है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्क फ्रॉम होम वाली व्यवस्था के चलते कंपनियों के दफ्तरों में काफी खाली जगह होगी। वहां कंपनियां टेंपररी कोविड केयर फैसिलिटी बनाने पर विचार कर सकती हैं।

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