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भास्कर एनालिसिस:निजी खपत प्री-कोविड लेवल से नीचे, निर्यात में 3 लाख करोड़ से ज्यादा उछाल

नई दिल्ली20 दिन पहले
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वित्त वर्ष की शुरुआत में ही कोरोना की खतरनाक दूसरी लहर झेलने के बावजूद देश की इकोनॉमी प्री-कोविड स्तर के पार जाने में कामयाब होती नजर आ रही है। वित्त वर्ष 2021-22 में GDP के पहले एडवांस आंकड़ों के मुताबिक, GVA (ग्रॉस वैल्यू एडिशन) के 7 में से 6 घटक 2019-20 यानी प्री-कोविड स्तर से ऊपर जाने की उम्मीद है। हालांकि अर्थव्यवस्था के विकास में सबसे महत्वपूर्ण घटक निजी खपत इस साल भी प्री-कोविड स्तर के पार नहीं पहुंच पाएगी।

पिछले साल के मुकाबले आयात और निर्यात बढ़ने की उम्मीद
GDP में आधी हिस्सेदारी रखने वाला प्राइवेट एक्पेंडिचर इस वित्त वर्ष 80.80 लाख करोड़ रुपए रहने की उम्मीद है। यह पिछले साल की तुलना में तो 5 लाख करोड़ से अधिक है, लेकिन 2019-20 की तुलना में 2.41 लाख करोड़ कम है। राहत की बात ये है कि निर्यात और आयात में बड़ी उछाल का अनुमान है। इस वित्त वर्ष में निर्यात 2019-20 के मुकाबले 3.14 लाख करोड़, जबकि आयात 2019-20 के मुकाबले 3.90 लाख करोड़ अधिक रहेगा।

इस वित्त वर्ष कई हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर प्री-कोविड​ लेवल पर पहुंच गए

गवर्मेंट कंजप्शन एक्पेंडिचर भी प्री-कोविड स्तर से 1.66 लाख करोड़ अधिक रहने का अनुमान है। अन्य सभी सेगमेंट जैसे कि ग्रॉस फिक्स कैपिटल फॉर्मेशन, सकल पूंजी निर्माण, चेंज इन स्टॉक और वैल्यूएबल्स प्री-कोविड के पार पहुंच गए हैं। नाइट फ्रैंक इंडिया के निदेशक (रिसर्च) विवेक राठी ने GDP के आंकड़ों पर कहा कि कोरोना की अब तक की सबसे गंभीर दूसरी लहर से बाहर आकर भारतीय अर्थव्यवस्था ने उल्लेखनीय प्रगति दिखाई है। कई हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर प्री-कोविड​स्तर पर पहुंच गए हैं।

वैल्युएबल्स की खपत डेढ़ गुना से ज्यादा
इस साल वैल्युएबल्स (कीमती सामान) की खपत बढ़कर 2.94 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान है। 2020-21 में ऐसे सामानों की खपत 1.68 लाख करोड़ की और 2019-20 में 1.65 लाख करोड़ रुपए की रही थी। कीमती सामान समय के साथ खराब नहीं होते, मूल्य नहीं घटता और इनका उपभोग भी नहीं होता है। बहुमूल्य कलाकृतियां, कीमती रत्न व सोना और इनसे तैयार गहने इस श्रेणी में आते हैं।

GVA क्या है ?
ग्रॉस वैल्यू ऐडेड यानी जीवीए, साधारण शब्दों में कहा जाए तो GVA से किसी अर्थव्यवस्था में होने वाले कुल आउटपुट और इनकम का पता चलता है। यह बताता है कि एक तय अवधि में इनपुट कॉस्ट और कच्चे माल का दाम निकालने के बाद कितने रुपए की वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन हुआ। इससे यह भी पता चलता है कि किस खास क्षेत्र, उद्योग या सेक्टर में कितना उत्पादन हुआ है।

नेशनल अकाउंटिंग के नजरिए से देखें तो मैक्रो लेवल पर GDP में सब्सिडी और टैक्स निकालने के बाद जो आंकड़ा मिलता है, वह GVA होता है। अगर आप प्रोडक्शन के मोर्चे पर देखेंगे तो आप इसको नेशनल अकाउंट्स को बैलेंस करने वाला आइटम पाएंगे।