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कोविड-19 इफेक्ट:कोरोनावायरस महामारी ने जापान के वर्क कल्चर में किया बदलाव

3 वर्ष पहले
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  • फैक्स मशीन का कार्यकाल अब समाप्त करने का समय आ गया है: प्रोफेसर इवान
  • कोरोनावायरस के संक्रमण को रोकने के लिए वर्क एनवायरमेंट में बदलाव किया गया है

कोरोनावायरस महामारी का असर दुनियाभर में देखने को मिल रहा है। जापान भी इससे अछूता नहीं है। ये महामारी जापान में काम करने के कई पहलुओं को बदल रही है। विश्लेषकों का सुझाव है कि ये संकट उन कंपनियों के लिए एक मौका है, जो अभी भी इस बात पर पारंपरिक विचार रखती हैं कि पुराने तरीकों से कौन से काम करके, ज्यादा फुर्ती के साथ अपने प्रतिद्वंद्वियों को पकड़ा जा सकता है। यकीनन पुराने जमाने और औसत रूढ़िवादी जापानी कंपनी के दो सबसे आकर्षक प्रतीक फैक्स मशीन और मुहर (सील) हैं।

जूलियन रयाल की रिपोर्ट के मुताबिक नई टेक्नोलॉजी पर हमेशा गर्व करने वाले जापान को पुरानी फैक्स मशीन टेक्नोलॉजी पर भरोसा करता है, लेकिन अब इसमें बदलाव हो रहा है।

पिछले साल सरकार द्वारा किए गए एक अध्ययन से पता चलता है कि लगभग हर जापानी कंपनी और सभी परिवारों के एक तिहाई लोग अभी भी फैक्स मशीनों का उपयोग करते हैं। ये टेक्नोलॉजी 1980 के दशक से उनके संचार में बेहतर रही है। वहीं, समान रूप से मुहर हर कागजी कार्रवाई के लिए आवश्यक है और इसे शारीरिक रूप से या व्यक्तिगत हस्ताक्षर के स्थान पर लागू किया जाता है।

एडवांस टेक्नोलॉजी

अब जापान में कम्युनिकेशन के लिए फैक्स और मुहर का इस्तेमाल समाप्त हो रहा है, जो एक समय तक यहां स्थाई हो गए थे। जापान एक ऐसा देश है जिसे अपनी टेक्नोलॉजी पर हमेशा गर्व होता है।

निगाटा यूनिवर्सिटी के मैनेजमेंट के प्रोफेसर इवान टसेलिचचेव ने कहा, "हम कोरोनोवायरस की वजह से जापान में काम करने के नए तरीके की शुरुआत को देख रहे हैं, और मुझे लगता है कि यह आ गया है।" वे कहते हैं कि फैक्स मशीन से देश के लगाव को अलग करना मुश्किल है, लेकिन मॉर्डन टेक्नोलॉजी पर पुराने कर्मचारियों को भरोसा करना होगा।

एक डॉक्टर द्वारा ट्विटर पर, फैक्स पर निर्भरता की आलोचना उस वक्त की गई, जब कानूनी आवश्यकता के लिए अस्पतालों और क्लीनिकों ने कोरोनोवायरस के नए मामलों पर कागजी कार्रवाई के सभी पेज को हाथों से देखा और फिर इसे सभी सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों में भेज दिया। जहां डेटा एक कंप्यूटर हाथ से इनपुट होता है, ताकि अधिकारी बीमारी के प्रसार की निगरानी कर सकें।

उन्होंने ट्वीट किया, "चलो, इसे बंद करो। लिखावट में मामलों की रिपोर्टिंग? कोरोनावायरस के वक्त में भी हम हाथ से लिख रहे हैं और फैक्स कर रहे हैं।" उन्होंने आगे लिखा, "यह प्रणाली 1926 से 1989 तक रहे सम्राट हिरोहितो के शासनकाल के साथ मेल खाती है। यह 2020 है। कृपया जापान इस बकवास को रोक दे। उनके ट्वीट को सोशल मीडिया पर कई लोगों का समर्थन मिला।" बता दें कि डॉक्टर एक अस्पताल में सांस चिकित्सा के स्पेशलिस्ट हैं। 

बदलाव हो रहा

प्रोफेसर इवान टसेलिचचेव फैक्स मशीन का कार्यकाल को समाप्त करने के लिए सहमत हैं। उन्हें लगता है कि अब ऐसा करने का समय आ गया है।

उन्होंने डीडब्ल्यू से कहा, "मुझे लगता है कि कंपनियां इस धारणा के कारण लटकी हुई हैं कि फैक्स मशीन सुरक्षित हैं। 50 और 60 के दशक के कई लोगों का ऐसा मानना है कि कम्प्यूटर हैकिंग, डेटा लीक के साथ वेब से जुड़ी कई आशंकाओं की तुलना में फैक्स मशीन सुरक्षित हैं।"

उन्होंने कहा, "मैं पहले और अब में एक बदलाव होता देख रहा हूं कि पुराने लोग रिटायर हो रहे हैं और न्यू जनेरेशन मॉर्डन टेक्नोलॉजी के साथ ज्यादा कम्फर्टेबल है। अब उनके मन से फिजिगल डॉक्युमेंट न होने का डर खत्म होने लगा है।"

इसी तरह, जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने भी मुहर लगाने की प्रथा की समीक्षा का निर्देश दिया है। उन्होंने बताया कि लोगों में कागजी कार्रवाई पर मुहर लगाने की जिद सरकार के आधिकारिक दिशा-निर्देशों के चलते आई, ताकि वे सभी से दूरी बनाए रखें और जितना संभव हो सके ऑफिस के माहौल में बचे रहें। ऑनलाइन कागजी कार्रवाई के लिए 'वर्चुअल हेंको' को लागू किया जा सकता है, इस आइडिया से कंपनियों की प्रोग्रेस में तेजी आई है।

फ्लेक्सिबल और रिजिलियंट

कोरोनावायरस के संक्रमण को रोकने के लिए वर्क एनवायरमेंट में एक और बदलाव किया गया है। यहां कंपनियों को अपने ऑफिसेज में लोगों की संख्या को 80% तक कम करने के लिए कहा गया है। ताकि बस और ट्रेन में लोगों की भीड़ कम होने से संक्रमण फैलन का खतरा कम हो जाए।

माकोतो होसोमुरा एक ऐसे बिजनेस से जुड़े हैं जिसमें पारंपरिक तौर पर ग्राहकों के साथ आमने-सामने बैठना जरूरी होता है, लेकिन अब वे काम करने के नए तरीके अपना रहे हैं। उन्होंने कहा, "मैं वाइन का इम्पोर्टर हूं और मुझे अपना बहुत सारा समय टोक्यो और आसपास के रेस्तरां और दुकानों में जाकर ग्राहकों से मिलने में देना पड़ता है। अब हम ऐसा नहीं कर सकते हैं, इसलिए मैं घर से काम कर रहा हूं और अपना ज्यादातर वक्त कम्प्यूटर पर या ग्राहकों से फोन पर बात करके बिता रहा हूं।"

उन्होंने कहा, "ये काम मुश्किल था। मैं पिछले 40 सालों से इस काम को कर रहे हैं। मैं अपने ग्राहकों को फिर से देखने के लिए उत्सुक हूं, क्योंकि सरकार अब प्रतिबंधों में ढील दे रही है। लेकिन अब मुझे घर से काम करने की भी आदत हो चुकी है। मुझे नहीं लगता कि हम जिस तरह से पहले काम करते थे, उस तरह से फिर से कर पाउंगा।"

टेंपल यूनिवर्सिटी के टोक्यो कैंपस में एशियन स्टडीज के निदेशक जेफ किंग्स्टन ने कहा कि उनका मानना ​​है कि जापानी वर्कर - जिनमें से कई अपने भीड़भाड़ वाले कामों, कार्यालय में लंबे समय तक और अपने संगठनों की अक्षमताओं का सामना करते हैं, वे लॉकडाउन के खत्म होने के बाद भी अपने नए तरीके को जारी रखना चाहते हैं।

उन्होंने कहा, "महामारी उन सभी तर्कों को देखेगी जिसमें लोगों ने अपने अतीत में काम की आदत को नहीं बदला, जब उनके सामने पहले भी कई मौके रखे गए होंगे। पहले भी ये प्रदर्शित हो चुका है कि सार्वजनिक स्वास्थय और राष्ट्र हित के लिए पुरानी कार्य प्रणाली हानिकारक है। जो पीढ़ी फैक्स मशीनों और अन्य पुरानी चीजों पर काम कर रही है, वो अब दूर होती जा रही है। वे अब जापानी संस्कृति को धीरे-धीरे ज्यादा फ्लेक्सिबल होते देख रहे हैं।"

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