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लॉकडाउन का एक साल:कोरोना के कारण 24.4% तक लुढ़की देश की जीडीपी, अगले साल 13% तक की ग्रोथ का अनुमान

नई दिल्ली7 महीने पहले
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  • GDP किसी देश के आर्थिक विकास का सबसे बड़ा पैमाना है
  • वैश्विक-घरेलू मांग बढ़ने से अगले साल बेहतर ग्रोथ की उम्मीद

कोरोना के कारण दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हुई हैं। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा है। यही कारण है कि चालू वित्त वर्ष की पहली दो तिमाहियों में देश का सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी नेगेटिव हो गई था। हालांकि, अनलॉक के बाद कारोबारी गतिविधियां बढ़ने से तीसरी तिमाही यानी अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में जीडीपी मामूली अंकों की बढ़त के साथ पॉजिटिव हो गई है। जीडीपी की गणना 8 कोर सेक्टर्स के आधार पर की जाती है।

पहली तिमाही में 24.4% की गिरावट रही थी

कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सरकार ने 25 मार्च 2020 को पूरे देश में लॉकडाउन लगा दिया था। इससे आवश्यक गतिविधियों को छोड़कर सभी प्रकार के परिवहन और आर्थिक गतिविधियों पर रोक लग गई थी। इसका नतीजा यह हुआ कि वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून तिमाही में देश की जीडीपी में 23.9% की गिरावट आ गई। हालांकि, यह प्रारंभिक आंकड़े थे। बाद में सरकार ने इसमें सुधार करके इसे -24.4% कर दिया था। पहली तिमाही में कृषि ही ऐसा सेक्टर रहा जिसमें ग्रोथ दर्ज की गई।

जुलाई-सितंबर तिमाही में सुधरे हालात

अनलॉक की प्रक्रिया शुरू होने के बाद देश में आर्थिक गतिविधियों ने धीरे-धीरे जोर पकड़ना शुरू किया। हालांकि, इस दौरान भी कई सेक्टर्स में कामकाज प्रभावित रहा। इसके अलावा कामगारों की कमी के कारण कंस्ट्रक्शन और मैन्युफैक्चरिंग जैसी गतिविधियां में उम्मीद के मुताबिक ग्रोथ नहीं आई। इसी का नतीजा रहा कि दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ की गिरावट में थोड़ा सुधार हुआ। जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान जीडीपी की गिरावट कम होकर -7.3% की गिरावट रही। इसमें कृषि के साथ मैन्युफैक्चरिंग और बिजली-गैस सेक्टर की ग्रोथ पॉजिटिव रही।

तीसरी तिमाही में पॉजिटिव हुई जीडीपी ग्रोथ

अक्टूबर से अधिकांश आर्थिक गतिविधियां शुरू हो गई थीं। लॉकडाउन के दौरान अपने घरों को वापस लौटे प्रवासी मजदूर भी काम के लिए शहरों में आ गए। इससे कंस्ट्रक्शन, मैन्युफैक्चरिंग समेत अधिकांश कोर सेक्टर्स में तेजी देखी गई। इससे चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ नेगेटिव जोन से बाहर निकल आई। अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में जीडीपी में 0.4% की ग्रोथ रही। इस तिमाही में कृषि, मैन्युफैक्चरिंग, बिजली-गैस, कंस्ट्रक्शन, वित्त-रियल एस्टेट सेक्टर्स की ग्रोथ पॉजिटिव रही।

पूरे साल में -8% की ग्रोथ का अनुमान

जब किसी देश की अर्थव्यवस्था लगातार दो तिमाही में नेगेटिव रहती है तो इससे तकनीकी मंदी कहा जाता है। लेकिन तीसरी तिमाही में पॉजिटिव ग्रोथ के साथ ही देश की अर्थव्यवस्था तकनीकी मंदी से बाहर आ गई थी। लॉकडाउन का आंशिक प्रभाव वित्त वर्ष 2019-20 की जनवरी-मार्च तिमाही पर भी पड़ा था। इस तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 3.1% रही थी। सरकार ने पूरे कारोबारी साल यानी 2020-21 में देश की जीडीपी में 8% की गिरावट का अनुमान जताया है। रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भी वित्त वर्ष 2020-21 में जीडीपी में 12% की ग्रोथ रहने का अनुमान जताया है।

अगले साल 13% तक की ग्रोथ का अनुमान

कोरोना के बावजूद वैश्विक और घरेलू स्तर पर मांग बढ़ने लगी है। इस कारण जीडीपी से जुड़े अधिकांश कोर सेक्टर्स में ग्रोथ होने लगी है। 1 अप्रैल से शुरू हो रहे वित्त वर्ष 2021-22 में 13% तक जीडीपी ग्रोथ का अनुमान जताया जा रहा है। ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज ने अगले वित्त वर्ष में देश की जीडीपी में 13.7% की ग्रोथ का अनुमान जताया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भारत की अर्थव्यवस्था में अगले साल 11.5% की ग्रोथ रहने की बात कही है। ऑर्गनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (OECD) ने कोविड-19 टीकाकरण के चलते देश की रियल जीडीपी ग्रोथ 12.6% रहने का अनुमान दिया है।

8 कोर सेक्टर्स की ग्रोथ के आधार पर होती है जीडीपी की गणना

  1. कृषि और इससे संबंधित क्षेत्र।
  2. माइनिंग।
  3. मैन्युफैक्चरिंग।
  4. बिजली, गैस, पानी सप्लाई और अन्य उपयोगी सेवाएं।
  5. कंस्ट्रक्शन।
  6. व्यापार, होटल, ट्रांसपोर्ट, कम्युनिकेशन और ब्रॉडकास्टिंग से संबंधित सेवाएं।
  7. वित्तीय, रियल एस्टेट और प्रोफेशनल सेवाएं।
  8. पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, रक्षा और अन्य सेवाएं।

क्या है GDP?

सकल घरेलू उत्पाद (GDP) किसी एक साल में देश में पैदा होने वाले सभी सामानों और सेवाओं की कुल वैल्यू को कहते हैं। GDP किसी देश के आर्थिक विकास का सबसे बड़ा पैमाना है। अधिक GDP का मतलब है कि देश की आर्थिक बढ़ोतरी हो रही है, अर्थव्यवस्था ज्यादा रोजगार पैदा कर रही है। इससे यह भी पता चलता है कि कौन से सेक्टर में विकास हो रहा है और कौन सा सेक्टर आर्थिक तौर पर पिछड़ रहा है।

दूसरी तिमाही में हाउसहोल्ड कर्ज जीडीपी का 37.1% पर पहुंचा

कोरोना के कारण लगाए गए लॉकडाउन के चलते हाउसहोल्ड कर्ज (घरेलू खर्च के लिए लिया जाने वाला कर्ज) में भारी बढ़ोतरी हुई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा डाटा के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही यानी जुलाई-सितंबर तिमाही में हाउसहोल्ड कर्ज जीडीपी का 37.1% पर पहुंच गया था। जबकि बचत केवल 10.4% रह गई थी। इस तिमाही में हाउसहोल्ड क्रेडिट मार्केट में 51.5% या पिछले साल के मुकाबले 130 आधार अंकों का उछाल दर्ज किया गया था।