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काम की बात:कोरोना काल में क्रेडिट कार्ड का बिल भरने में हो रही है परेशानी, तो EMI के जरिए कर सकते हैं पेमेंट, यहां जानें इसका पूरा गणित

नई दिल्ली5 महीने पहले
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कोरोना की दूसरी लहर में लोगों को फिर एक बार पैसों में जुड़ी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इसके चलते कई लोगों को अपने क्रेडिट कार्ड का बिल चुकाने में समस्या हो रही है। अगर आपको भी इसी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है तो आप क्रेडिट कार्ड बिल का भुगतान EMI (किस्तों) में कर सकते हैं। हालांकि अगर आप क्रेडिट कार्ड बिल का भुगतान EMI में करना चाहते हैं तो आपको इसके लिए अतिरिक्त ब्याज चुकाना होगा। आज हम आपको इससे जुड़ी जरूरी बातों के बारे में बता रहे हैं।

कैसे काम करता है EMI का ऑप्शन?
अगर आप अपने क्रेडिट कार्ड बिल का भुगतान एक साथ नहीं कर पा रहे हैं तो इसे EMI में बदल सकते हैं। आप अपने हिसाब से EMI की अवधि चुन सकते हैं। आमतौर पर बैंक इसके लिए 3 महीने से 24 महीनों तक का समय देते हैं।

इसका क्रेडिट कार्ड लिमिट पर होता है असर
यदि आपकी क्रेडिट कार्ड की लिमिट 50 हजार रुपए है और आप 40 हजार रुपए कीमत का कोई सामान खरीदते हैं,और इसका भुगतान EMI के जरिए करते हैं तो आपकी क्रेडिट लिमिट 10 हजार रुपए कर दी जाएगी। बिल की जितनी रकम EMI में बदली जाती है, आमतौर पर बैंक उतनी कार्ड लिमिट को अस्थायी तौर पर घटा देते हैं। जो EMI के भुगतान के साथ धीरे-धीरे बढ़ती है।

इसके लिए देने होते हैं ये चार्ज
वो कहा जाता है न कि हर चीज की एक कीमत होती हैं इसी तरह अगर आप अपने क्रेडिट कार्ड बिल का भुगतान EMI में करते हैं, तो आपको कई तरह के चार्ज देने होते हैं। ये हैं वो चार्ज

  • एक्स्ट्रा इंट्रेस्ट: बिल का किस्तों में भुगतान का विकल्प लेने पर आपसे अतिरिक्त ब्याज वसूला जाता है। आमतौर पर ब्याज दर लोन की अवधि से जुड़ी होती है। अवधि जितनी लंबी होगी, ब्याज भी उतना ज्‍यादा होगा। आमतौर पर ये ब्याज 1.5 से 2% महीना तक होता है।
  • प्रोसेसिंग फीस: कुछ बैंक कोई प्रोसेसिंग फीस चार्ज नहीं करते हैं। जबकि कई बैंक 2% तक प्रोसेसिंग फीस वसूलते हैं।
  • GST: सभी चार्ज और फीस पर 18% की दर से GST लागू होता है।

यहां जाने EMI से बिल का भुगतान का पूरा गणित
अगर आप EMI चुनते हैं तो आपको इसके लिए अतिरिक्त ब्याज चुकाना होगा। उदाहरण के लिए अगर आप 3 महीने की अवधि को चुनते हैं तो बैंक आपसे सालाना 20% की ब्‍याज दर से चार्ज वसूल सकता है। मान लेते हैं कि आपके क्रेडिट कार्ड बिल की रकम 10 हजार है। आप 3 महीने (90 दिन) की अवधि का रि-पेमेंट ऑप्शन चुनते हैं तो कुल ब्‍याज 493.15 रुपए [10,000 x (20%/365) x 90] बनेगा। इसी तरह आप किसी भी अवधि और EMI के लिए ब्याज का कैलकुलेशन कर सकते हैं।

वहीं अगर आप 12 महीने की अवधि के लिए EMI का ऑप्शन चुनने है और इसके लिए आपसे सालाना 15% वसूला जाता है तो आपको ब्‍याज के तौर पर 1,500 रुपए [10,000 x (15%/365) x 365] देना होंगे। इस पर प्रोसेस फीस और GST अलग से देना होगा।

ऐसे में क्या करना चाहिए?
अगर आप समय से क्रेडिट कार्ड का बिल नहीं चूकते हैं तो आपसे बिल अमाउंट पर 40% तक फाइनेंस चार्ज चुकाना पड़ सकता है। मिनिमम ड्यू अमाउंट का भुगतान न करने पर 1000 रुपए तक लेट पेमेंट फीस अलग से पड़ती है। इसका आपके क्रेडिट स्कोर पर काफी बुरा असर हो सकता है। इसीलिए अगर क्रेडिट कार्ड का बिल नहीं चुका पा रहे हैं तो इसे EMI में चुकाना सही रहेगा।

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