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सर्विस डिमांड में कम रिकवरी का रिस्क:क्रेडिट रेटिंग में सुधार टिकाऊ होने को लेकर आश्वस्त नहीं क्रिसिल; इकनॉमिक एक्टिविटी, एग्री सेक्टर के परफॉर्मेंस, रूरल डिमांड पर नजर

मुंबई2 महीने पहले
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पिछले साल अक्टूबर के बाद से क्रेडिट डाउनग्रेड से ज्यादा अपग्रेड हुए हैं जिसके चलते इस साल फरवरी में क्रेडिट रेशियो 1 के पास पहुंच गया है। हालांकि, रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने इस बात का जिक्र करते हुए कहा कि क्या अक्टूबर के बाद मांग में हुई जबरदस्त रिकवरी टिकाऊ होगी, यह देखने वाली बात होगी। इंडिया इंक की मुसीबतें दूर हो चुकी हैं या नहीं, इस बात का पता इसी से चलेगा।

पहली छमाही में क्रेडिट रेशियो एक दशक के सबसे निचले लेवल पर आ गया था

पिछले पाँच महीनों में 244 अपग्रेड हुए हैं जबकि मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही में 208 अपग्रेड हुए थे, जिससे क्रेडिट रेशियो 0.54 के एक दशक के सबसे निचले लेवल पर चला गया। यह बात क्रिसिल ने सोमवार को अपने एक नोट में लिखा है। क्रिसिल के डायरेक्टर अक्षय चितगोपेकर ने नियर टर्म से मिडियम टर्म में लोन क्वॉलिटी अच्छी रहने का अनुमान बनाए रखा है।

इकनॉमिक एक्टिविटी, कृषि क्षेत्र के प्रदर्शन, ग्रामीण इलाकों की मांग पर नजर

चितगोपेकर ने कहा कि पिछले साल अक्टूबर से दिख रही रिकवरी के टिकाऊपन का पता लगाने के लिए इकनॉमिक एक्टिविटी के नॉर्मल लेवल पर आने, कृषि क्षेत्र का प्रदर्शन और ग्रामीण इलाकों से निकलने वाली मांग, इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निवेश की रफ्तार पर नजर रखी जा रही है।

कोरोनावायरस का दूसरा हमला होने पर इकोनॉमिक रिकवरी बेपटरी हो सकती है

उन्होंने आगाह करते हुए कहा कि मौजूदा वैक्सीन की क्षमता को बेकार करने वाले कोरोनावायरस के संक्रमण का दूसरा दौर चलने की सूरत में रिकवरी बेपटरी हो सकती है। क्रेडिट रेशियो में सुधार होने की वजह कंस्ट्रक्शन, इंजीनियरिंग और बिजली उत्पादन जैसे क्षेत्रों की ज्यादा कंपनियों की रेटिंग अपग्रेड होना, मांग में सुधार आना और कमोडिटी के दाम में मजबूती आना रहा।

पिछले 11 महीनों में सालाना आधार पर 55% कम डाउनग्रेड हुए

कंपनी के चीफ रेटिंग्स ऑफिसर सुबोध राय के मुताबिक, मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही में क्रेडिट रेशियो एक दशक के निचले लेवल 0.54 पर आ गया था। उन्होंने कहा कि पिछले 11 महीनों में दबाव बहुत ज्यादा होने के बावजूद सालाना आधार पर 55% कम डाउनग्रेड हुए हैं। इसकी वजह दिसंबर तक लोन मोरैटोरियम, 90 दिन से ज्यादा समय तक बकाया रहने वाले लोन को डिफॉल्ट दर्ज नहीं करने, इमर्जेंसी क्रेडिटलाइन गारंटी स्कीम वगैरह रहीं।

फार्मा और एग्रोकेमिकल जैसे मजबूत सेक्टर का परफॉर्मेंस दमदार रहा

मांग लगातार बनी रहने से फार्मा और एग्रोकेमिकल जैसे मजबूत सेक्टर का परफॉर्मेंस दमदार रहा। इन सेक्टर का क्रेडिट रेशियो तब भी 1 से ऊपर रहा था जब कोविड-19 का संक्रमण चरम पर था। इसके अलावा कंस्ट्रक्शन और इंजीनियरिंग जैसे इनवेस्टमेंट लिंक्ड सेक्टर और पैकेजिंग जैसे कंजम्शन लिंक्ड सेक्टर में तेज टर्नअराउंड हुआ। इनमें क्रेडिट रेशियो पहली छमाही के मुकाबले पहले से ही डबल हो चुका है।

सर्विसेज की डिमांड में कम रिकवरी, जॉब लॉस बने रहने का रिस्क

लेकिन होटल और रिजॉर्ट, रियल एस्टेट और एयरपोर्ट ऑपरेटर जैसे कमजोर सेक्टर में डाउनग्रेड की रफ्तार अपग्रेड से ज्यादा बनी हुई है। इंडिया इंक को आने वाले समय में खासतौर पर सर्विसेज सेक्टर की डिमांड में उम्मीद से कम बढ़ोतरी होने, जॉब लॉस होते रहने और बजट में घोषित उपाय सही तरह से लागू नहीं होने जैसे रिस्क का सामना करना पड़ सकता है।

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