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2021 में भी जबरदस्त FDI की उम्मीद:वैश्विक आर्थिक सुस्ती के बाद भी इस साल सितंबर तक देश में 43.5 अरब डॉलर का FDI आया

नई दिल्ली10 महीने पहले
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अप्रैल 2000 से सितंबर 2020 तक देश में 500 अरब डॉलर से ज्यादा का FDI आया - Dainik Bhaskar
अप्रैल 2000 से सितंबर 2020 तक देश में 500 अरब डॉलर से ज्यादा का FDI आया
  • DPIIT AVGC (एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स) सेक्टर में FDI को आसान बनाने पर विचार कर रहा है
  • अप्रैल में सरकार ने भारतीय सीमा से सटे देशों से आने वाले निवेश के मामले में सरकार से पहले अनुमति लेना जरूरी कर दिया है

देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में बढ़ोतरी का रुझान 2021 में भी बना रह सकता है, क्योंकि कारोबारी सहूलियत बढ़ाने के लिए सरकार के द्वारा किए जा रहे सुधारों के कारण निवेशकों में भारत का आकर्षण बढ़ता जा रहा है। FDI नियमों में ढील दिए जाने के कारण आने वाले महीनों में निवेशक अन्य सेक्टर के अलावा रक्षा उत्पादन में भी बड़े पैमाने पर निवेश कर सकते हैं वहीं, कंपनियों पर कंप्लायंस का बोझ करने पर सरकार प्रमुखता से ध्यान देगी। उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) के सचिव गुरु प्रसाद मोहापात्रा ने कहा कि कोरोनावायरस महामारी और वैश्विक आर्थिक सुस्ती के बावजूद भारत में FDI में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

इस साल जनवरी से लेकर सितंबर तक की अवधि में देश में करीब 43.5 अरब डॉलर का FDI आया। आने वाले समय में भी FDI में तेजी का रुझान बना रहने का अनुमान है। मोहापात्रा ने कहा कि वैश्विक सुस्ती के कारण लग रहा था कि FDI में गिरावट आएगी। लेकिन गिरावट नहीं आई। उल्टे इसमें बढ़ोतरी हुई। और अब अर्थव्यवस्था में रिकवरी दिख रही है। अब हमें कोई चिंता नहीं हो रही। 2021 में भी FDI में बढ़ोतरी जारी रह सकती है। मार्च में लगाए गए लॉकडाउन के कारण देश की इकॉनोमी बुरी तरह से प्रभावित हुई थी।

रक्षा उत्पादन में FDI मिलने का अनुमान

उन्होंने कहा कि सरकार ने रक्षा उत्पादन जैसे क्षेत्रों में FDI आसान कर दिया है और इस क्षेत्र में भी विदेशी निवेश आ सकता है। महामारी का सबसे बुरा दौर बीत चुका है, इसलिए भारत में कुछ बड़ा निवेश आ सकता है। कारोबारी सहूलियत के कई कदम उठाने के बाद अब सरकार कारोबार के कंप्लायंस बोझ को कम करने पर काम कर रही है। यह सरकार के लिए एक प्राथमिकता है। हर गैरजरूरी कंप्लायंस को समाप्त करने की जरूरत है और इसमें दीवानी गलतियों को अपराध के दायरे से बाहर करना भी शामिल है।

कारोबारी सहूलियत रैकिंग में सुधार

विश्व बैंक द्वारा पिछले साल जारी ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रिपोर्ट में 190 देशों के बीच भारत का रैंक 14 पायदान सुधर कर 63वें पर आ गया है। इससे पिछले साल भारत को 77वां रैंक मिला था। सरकार ने कोयला खनन, कांट्रैक्ट मैन्यूफैक्चरिंग और सिंगल-ब्रांड रिटेल ट्रेडिंग जैसे सेक्टर्स में FDI आसान कर दिया है। DPIIT AVGC (एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स) जैसे क्षेत्रों में भी इसे आसान बनाने पर विचार कर रहा है।

सबसे ज्यादा FDI मॉरीशस से

अप्रैल 2000 से सितंबर 2020 तक देश में 500 अरब डॉलर से ज्यादा का FDI आया। करीब 29 फीसदी FDI मॉरीशस से आया। इसके बाद सिंगापुर (21 फीसदी), अमेरिका, नीदरलैंड, जापान (7 फीसदी प्रत्येक) और ब्रिटेन (6 फीसदी) का स्थान रहा। जर्मनी, साइप्रस, फ्रांस और केमन आईलैंड से भी काफी FDI आया।

2015-16 से FDI में भारी बढ़ोतरी हुई

2015-16 से FDI में भारी बढ़ोतरी हुई है। उस साल देश में 40 अरब डॉलर का FDI आया, जो साल-दर-साल आधार पर 35 फीसदी ज्यादा है। 2016-17, 2017-18, 2018-19 और 2019-20 में क्रमश: 43.5 अरब डॉलर, 44.85 अरब डॉलर, 44.37 अरब डॉलर और 50 अरब डॉलर का FDI आया।

इन सेक्टर्स में आया सबसे ज्यादा FDI

सबसे ज्यादा FDI हासिल करने वाले सेक्टर्स में सर्विस सेक्टर, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर, टेलीकम्युनिकेशंस, ट्रेडिंग, कंस्ट्र्रक्शन डेवलपमेंट, ऑटोमोबाइल, केमिकल्स और फार्मास्यूटिकल्स शामिल हैं।

कुछ सेक्टर्स में FDI के लिए सरकारी अनुमति जरूरी

अधिकतर सेक्टर में ऑटोमैटिक रूट से FDI को अनुमति दे दी गई है, फिर भी टेलीकॉम, मीडिया, फार्मास्यूटिकल्स और इंश्योरेंस जैसे सेक्टर्स में विदेशी निवेश के लिए सरकार से अनुमति लेना जरूरी है। गवर्नमेंट अप्रूवल रूट के तहत विदेशी निवेशक को संबंधित मंत्रालय या विभाग से निवेश से पहले अनुमति लेनी होती है। जबकि ऑटोमैटिक रूट के तहत विदेशी निवेशक पहले निवेश करते हैं और उसके बाद उन्हें भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को सूचना देनी होती है।

9 सेक्टर्स में FDI की अनुमति नहीं

अभी 9 सेक्टर्स में FDI की अनुमति नहीं है। इनमें लॉटरी कारोबार, गैंबलिंग एव बेटिंग, चिट फंड्स, निधि कंपनी, रियल एस्टेट कारोबार और तंबाकू से सिगार, चिरूट, सिगारोल और सिगरेट की मैन्यूफैक्चरिंग शामिल है। इस साल अप्रैल में सरकार ने भारत की सीमा से सटे देशों से आने वाले निवेश के मामले में सरकार से पहले अनुमति लेना जरूरी कर दिया है। माना जा रहा है कि चीन से आने वाले FDI को रोकने के लिए ऐसा किया गया है।

ग्लोबल लिक्विडिटी ज्यादा होने के कारण भी ज्यादा FDI मिलने की उम्मीद

डेलॉई इंडिया की इकॉनोमिस्ट रुम्की मजूमदार ने कहा कि 2020 में महामारी के कारण अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट के बीच भी बड़े पैमाने पर आई FDI से पता चलता है कि विदेशी निवेशकों का भारत पर काफी भरोसा है। अगले कारोबारी साल में विकास दर दहाई अंकों में रहने का अनुमान है, इसलिए अगले कारोबारी साल में भी ज्यादा FDI जारी रहने की उम्मीद है। दुनियाभर में लिक्विडिटी काफी ज्यादा है, इसलिए वैश्विक निवेशक ज्यादा रिटर्न के लिए भारत जैसे देशों में निवेश बढ़ा सकते हैं। मजूमदार ने हालांकि कहा कि भारत को डिजिटाइजेशन को आगे बढ़ाना होगा, घरेलू उत्पादन के लिए सेक्टर्स और मजबूत पक्षों की पहचान करनी होगी और पूरे देश में एक समान नीति बनानी होगी।

फार्मास्यूटिकल्स, रिटेल और टेक्नोलॉजी सेक्टर्स में ज्यादा FDI का रुझान बना रह सकता है

शार्दूल अमरचंद मंगलदास में पार्टनर (प्राइवेट इक्विटी, मर्जर एंड एक्विजीशन एंड जनरल कॉरपारेट) गुंजन शाह ने कहा कि 2021 में खासतौर से फार्मास्यूटिकल्स, रिटेल और टेक्नोलॉजी सेक्टर में ज्यादा FDI का रुझान बना रह सकता है। उन्होंने हालांकि कानून की व्याख्या में बार-बार बदलाव, कानून में बार-बार बदलाव और विभिन्न नियामकों के बीच तालमेल की कमी को एक समस्या बताई।

FDI देश के विकास के लिए जरूरी

FDI देश के लिए जरूरी है, क्योंकि आने वाले वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में सुधार और विकास में तेजी लाने के लिए भारत में बड़े पैमाने पर निवेश करने की जरूरत होगी। ज्यादा FDI मिलने से भुगतान संतुलन और रुपए के मूल्य को बनाए रखने में भी मदद मिलती है।