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बड़ा सवाल:क्या असलियत से बेहतर नजर आ रही है इकोनॉमिक रिकवरी?

2 महीने पहले
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  • अनुमानों के हिसाब से FY2022 में देश की GDP का साइज FY2020 से सिर्फ एक पर्सेंट ज्यादा होगा
  • FY2020 के बाद से 5 पर्सेंट सालाना ग्रोथ वाले GDP के लिए FY2022 में जरूरी होगी 19.5 पर्सेंट ग्रोथ

मौजूदा वित्त वर्ष की सितंबर तिमाही से इंडियन इकोनॉमी की रिकवरी उम्मीद से ज्यादा तेज रही है, लेकिन इसका साइज कोविड-19 से पहले जितना होने में खासा वक्त लगेगा। इंडिया रेटिंग्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक जीडीपी ग्रोथ के अनुमान बुरा वक्त बीत जाने का संकेत दे रहे हैं। उसके हिसाब से क्या इकोनॉमी कोविड-19 के चलते हुए नुकसान की भरपाई कर पाया है या पिछले लेवल को पार कर गया है, अब भी पता नहीं चल पा रहा है।

FY2022 में GDP का साइज FY2020 से सिर्फ एक पर्सेंट ज्यादा होगा

इंडियन इकोनॉमी का साइज वित्त वर्ष 2020 में कॉन्स्टैंट प्राइस बेसिस यानी महंगाई के हिसाब से एडजस्टमेंट करने पर 145.66 लाख करोड़ रुपये था निकल रहा था। मौजूदा वित्त वर्ष में कोविड-19 के चलते इसके 7.8 पर्सेंट घटकर 134.33 लाख करोड़ रुपये रह जाने का अनुमान है। इंडिया रेटिंग्स ने वित्त वर्ष 2022 में इंडियन इकोनॉमी सालाना आधार पर 9.6 पर्सेंट बढ़कर 147.17 लाख करोड़ रुपये हो जाने का अनुमान दिया है। यह पिछले वित्त वर्ष की जीडीपी से लगभग डेढ़ लाख करोड़ रुपये यानी एक पर्सेंट ज्यादा होगा।

इकोनॉमिक ग्रोथ में सार्थक बढ़ोतरी FY2023 में ही नजर आएगी

इसका मतलब साफ है कि इंडियन इकोनॉमी वित्त वर्ष 2022 में कोविड-19 से पहले स्थिति में आ पाएगी और उसमें 2023 में ही सार्थक बढ़ोतरी नजर आएगी। लेकिन कोविड-19 के असल असर और उससे हुई रिकवरी का सही अंदाजा लेने के लिए यह समझना जरूरी है कि अगर कोविड-19 नहीं आया होता और इकनॉमिक ग्रोथ वित्त वर्ष 2021 और 2022 में पांच-पांच पर्सेंट रहती तो वित्त वर्ष 2022 में इंडियन इकोनॉमी का साइज 160.59 लाख करोड़ रुपये होता।

FY2020 से 5 पर्सेंट सालाना ग्रोथ वाले GDP के लिए 19.5 पर्सेंट ग्रोथ जरूरी

इस हिसाब से कोविड-19 के चलते जीडीपी ग्रोथ 9.6 पर्सेंट रहने पर इकोनॉमी का साइज वित्त वर्ष 2022 में सिर्फ 147.17 लाख करोड़ रुपये होगा। दूसरी तरफ 160.59 लाख करोड़ रुपये के लेवल तक पहुंचने के लिए वित्त वर्ष 2022 में जीडीपी ग्रोथ 19.5 पर्सेंट होना चाहिए। ऐसा होना नामुमकिन है। ऐसे में इंडिया रेटिंग्स का कहना है कि प्रॉडक्शन लॉस को कंजम्पशन डिमांड और एंप्लॉयमेंट लॉस मान लें तो इकोनॉमी को हुआ नुकसान बड़ा नजर आएगा।

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