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इरडा ने बीमा कंपनियों से कहा:मौजूदा हेल्थ इंश्योरेंस में ऐसा कोई बदलाव ना करें जिससे प्रीमियम बढ़ जाए, पॉलिसी में आसान शब्दों का इस्तेमाल हो

नई दिल्ली6 महीने पहले
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  • पर्सनल एक्सीडेंट और ट्रेवल इंश्योरेंस पर भी लागू होंगे नए निर्देश
  • 1 अक्टूबर से पॉलिसी कॉन्ट्रैक्ट के लिए स्टैंडर्ड फॉर्मेंट अपनाना होगा

इंश्योरेंस रेगुलेटर एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी इरडा ने हेल्थ इंश्योरेंस को लेकर नए निर्देश दिए हैं। इरडा ने बीमा कंपनियों से कहा है कि वे मौजूदा हेल्थ इंश्योरेंस में ऐसा कोई बदलाव ना करें जिससे पॉलिसीहोल्डर्स के प्रीमियम में बढ़ोतरी हो। यह निर्देश पर्सनल एक्सीडेंट और ट्रेवल इंश्योरेंस कवर देने वाली बीमा उत्पादों पर भी लागू होंगे।

बीमा उत्पादों के मौजूदा लाभों में बदलाव की इजाजत नहीं

इरडा की ओर से जारी सर्कुलर में कहा गया है कि जनरल और स्टैंडअलोन हेल्थ इंश्योरेंस उपलब्ध कराने वाली कंपनियों को पॉलिसी के मौजूदा लाभों में बदलाव करने की इजाजत नहीं है। ना ही बीमा कंपनियां मौजूदा पॉलिसी में ऐसे नए लाभ जोड़ सकती है जिससे प्रीमियम में बढ़ोतरी हो जाए। हालांकि, इंश्योरेंस रेगुलेटर ने कहा है कि पिछले साल जुलाई में हेल्थ इंश्योरेंस को लेकर जारी की गई कंसोलिडेटिड गाइडलाइंस के तहत छोटे-मोटे बदलाव किए जा सकते हैं।

एड-ऑन कवर में दिए जा सकते हैं नए लाभ

इरडा ने सर्कुलर में कहा है कि स्टैंडअलोन प्रीमियम रेट पर दिए जाने वाले एड-ऑन कवर और वैकल्पिक कवर में मौजूदा लाभों के साथ नए लाभ या अपग्रेडेशन दिया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए पॉलिसीहोल्डर्स को सूचना उपलब्ध करानी होगी। इसके अलावा इरडा ने वित्त वर्ष के अंत में प्रत्येक हेल्थ इंश्योरेंस प्रोडक्ट की वित्तीय स्थिति की जांच करने के लिए एक्चुरीज नियुक्त करने के लिए कहा है।

बोर्ड के पास जमा होगी रिव्यू रिपोर्ट

इरडा ने कहा है कि एक्चुरीज को अपनी रिव्यू रिपोर्ट बीमा कंपनी के बोर्ड के पास जमा करनी होगी। एक्चुरीज प्रत्येक बीमा उत्पाद को लेकर एक एनालिसिस भी जमा करेंगे। इसके अलावा बीमा उत्पादों की प्रासंगिकता सुनिश्चित करने के लिए सुझाव भी देने होंगे। इसमें बीमा उत्पाद से जुड़े पॉलिसीहोल्डर्स के हितों का भी ख्याल रखना होगा।

कंपनी बोर्ड इरडा के पास जमा करेगा रिपोर्ट

कंपनी बोर्ड बीमा उत्पादों के रिव्यू के संबंध में एक स्टेटस रिपोर्ट इरडा के पास जमा करेगा। यह रिपोर्ट 30 सितंबर तक जमा करनी होगी। इसमें बोर्ड की ओर से सुझाव दिए जाएंगे और बोर्ड की ओर से की जाने वाली सुधारात्मक कार्रवाई की जानकारी देनी होगी। वित्त वर्ष 2020-21 की रिपोर्ट 30 सितंबर 2021 तक जमा की जानी चाहिए।

पॉलिसी में आसान शब्दों का इस्तेमाल हो

इरडा ने बीमा कंपनियों से पॉलिसी में आसान शब्दों का इस्तेमाल करने को कहा है। ताकि पॉलिसीहोल्डर इसे आसानी से समझ सके। इस साल 1 अक्टूबर से सभी बीमा कंपनियों को पॉलिसी कॉन्ट्रैक्ट के लिए स्टैंडर्ड फॉर्मेट का इस्तेमाल करना होगा। इसमें हैडिंग स्पष्ट होनी चाहिए ताकि यह पॉलिसीहोल्डर्स का ध्यान आकर्षित कर सकें। पॉलिसी कॉन्ट्रैक्ट में पॉलिसी शेड्यूल, प्रस्तावना, परिभाषा, पॉलिसी के तहत मिलने वाले लाभ, निष्कर्ष, सामान्य शर्तें और क्लॉज जैसी जानकारी विस्तार में होनी चाहिए।

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