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नई दिल्ली. कोरोना वायरस और सऊदी अरब द्वारा छेड़े गए क्रूड प्राइस वार से कम से कम एक मामले में भारत को बहुत बड़ा फायदा होने वाला है। वह है तेल आयात पर होने वाला खर्च। एक अनुमान के मुताबिक देश का तेल आयात खर्च 2020-21 में घटकर 64 अरब डॉलर पर आ सकता है। यह 2018-19 के 112 अरब डॉलर तेल आयात खर्च के मुकाबले करीब आधा है। कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार के कारण कच्चे तेल की मांग में जबरदस्त गिरावट आई है। दूसरी ओर तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक और रूस के बीच तेल उत्पादन घटाने पर सहमति नहीं बनने के बाद प्राइस वार शुरू हो गया है। सऊदी अरब ने तेल उत्पादन बढ़ाने का भी संकेत दिया है। इसके कारण तेल कीमत में जबरदस्त गिरावट आई है।30 दिसंबर को ब्रेंट क्रूड करीब 70 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। सोमवार को इंट्राडे कारोबार में इसने 31.82 फीसदी गिरकर 31.02 डॉलर प्रति बैरल का निचला स्तर छू लिया। इससे चालू कारोबारी साल 2019-20 में देश का तेल आयात खर्च 10 फीसदी तक घट सकता है।
कई साल के निचले स्तर पर आ सकता है देश का तेल आयात खर्च
यदि 2020 में अधिकतर समय कीमत करीब 30 डॉलर प्रति बैरल रहती है, तो देश का तेल आयात खर्च घटकर कई साल के निचले स्तर पर आ सकता है। संभावना यह है कि देश का तेल आयात खर्च 2020-21 में घटकर 64 अरब डॉलर पर आ सकता है, जो कि 2015-16 में हुआ था, जब तेल कीमत घटकर 26 डॉलर प्रति बैरल के नीच आ गई थी।
1 डॉलर घटती है कीमत तो देश को 2,900 करोड़ रुपए की होती है बचत
तेल की कीमत यदि एक डॉलर घटती है, तो तेल आयात खर्च में करीब 2,900 करोड़ रुपए की कमी आती है। दूसरी ओर डॉलर के मुकाबले यदि रुपए का भाव 100 पैसे गिरता है, तो तेल आयात खर्च 2,700 करोड़ रुपए बढ़ जाता है। तेल बाजार के एक जानकार ने कहा कि कोरोना वायरस के कारण चालू साल में तेल आयात खर्च घटकर 100 अरब डॉलर के नीचे आ सकता है। अब प्राइस वार भी शुरू हो जाने से तेल आयात खर्च में और कमी आ सकती है।
2015-16 में भी तेल का भाव घटकर करीब 26 डॉलर प्रति बैरल रह गया था
अगले कारोबारी साल यानी 2020-21 में तेल आयात खर्च घटकर 64 अरब डॉलर के स्तर पर आ सकता है। यह स्थिति कारोबार साल 2015-16 में देखी गई थी, जब कुछ समय के लिए कच्चे तेल की कीमत घटकर 26 डॉलर प्रति बैरल के निचले स्तर तक आ गई थी। पेट्रोलियम मंत्रालय के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (पीपीएसी) के मुताबिक चालू कारोबारी साल में देश का तेल आयात घटकर 22.5 करोड़ टन रह सकता है, जो पिछले कारोबारी साल में 22.7 करोड़ टन था। इस दौरान तेल आयात खर्च 6 फीसदी गिरकर 105 अरब डॉलर रह सकता है, जो पिछले कारोबारी साल में 112 अरब डॉलर था। यह गणना हालांकि अप्रैल-दिसंबर 2019 के औसत तेल मूल्य 64 डॉलर प्रति बैरल और जनवरी-मार्च 2020 के लिए औसत कीमत 66 डॉलर प्रति बैरल पर आधारित है। लेकिन वास्तविकता में कच्चे तेल की कीमत घटकर करीब 30 डॉलर प्रति बैरल पर आ चुकी है। विश्लेषकों का कहना है कि तेल मूल्य घटने से आयात खर्च में बड़ी कमी आएगी।
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