• Hindi News
  • Business
  • Economy Will Remain In Big Decline, Second Stimulus Package For Speed Up Economic Activity Is Insufficient

वित्त वर्ष 2020-21:भारतीय अर्थव्यवस्था में रहेगी बड़ी गिरावट, आर्थिक गतिविधियों में तेजी के लिए दूसरा प्रोत्साहन पैकेज नाकाफी

नई दिल्लीएक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
हाल ही में वर्ल्ड बैंक ने कहा था कि 1930 के बाद पूरी दुनिया अब फिर से आर्थिक मंदी के सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। - Dainik Bhaskar
हाल ही में वर्ल्ड बैंक ने कहा था कि 1930 के बाद पूरी दुनिया अब फिर से आर्थिक मंदी के सबसे बुरे दौर से गुजर रही है।
  • दो महीने पहले के मुकाबले अब ज्यादा चिंतित दिख रहे हैं अर्थशास्त्री
  • RBI ने चालू वित्त वर्ष में 9.5% गिरावट का अनुमान जताया है

भारतीय अर्थव्यवस्था में चालू वित्त वर्ष (वित्त वर्ष 2020-21) में बड़ी गिरावट दर्ज की जाएगी। कोरोनावायरस महामारी के कारण आर्थिक गतिविधियों में आई गिरावट में तेजी लाने के लिए सरकार की ओर से हाल में घोषित प्रोत्साहन पैकेज नाकाफी साबित होगा। अर्थशास्त्रियों से बातचीत के आधार पर तैयार की गई रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है।

कोरोना संक्रमण के मामले 77 लाख के पार

भारत में कोरोना संक्रमण के मामले 77 लाख के पार पहुंच गए हैं। पूरी दुनिया में अमेरिका के बाद भारत सबसे संक्रमित देश बना हुआ है। अभी इसके कम होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। सरकार ने कोरोना के आर्थिक असर को कम करने के लिए कारोबारों पर लगे अधिकांश प्रतिबंधों को हटा दिया है। इसके बावजूद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने उदास आर्थिक अनुमान जारी किया है। हालांकि, महंगाई दर बढ़ने के बाद भी RBI ने मौद्रिक दरों में कोई बदलाव नहीं किया है।

अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए काफी नहीं हालिया पैकेज

रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिकांश अर्थशास्त्री चालू वित्त वर्ष के लिए दो महीने पहले के अनुमान के मुकाबले अब ज्यादा चिंतित दिख रहे हैं। 90 फीसदी अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए सरकार की ओर से हाल ही में घोषित किया गया प्रोत्साहन पैकेज काफी नहीं होगा। सरकार ने मांग में तेजी लाने के लिए बीते सप्ताह ही 10 बिलियन डॉलर करीब 73 हजार करोड़ रुपए के प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की थी।

नए उपायों का ग्रोथ पर कम असर पड़ेगा

एचडीएफसी बैंक की सीनियर इकोनॉमिस्ट साक्षी गुप्ता का कहना है कि उपभोक्ता खर्च और कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए अपनाए गए उपाय काफी इनोवेटिव हैं। लेकिन ग्रोथ के लिहाज से इनका चालू वित्त वर्ष में काफी कम असर होगा। भारतीय अर्थव्यवस्था में अप्रैल-जून तिमाही में 23.9 फीसदी की गिरावट के बाद तीसरी और चौथी तिमाही में क्रमश: 10.4 फीसदी और 5 फीसदी की गिरावट का अनुमान जताया गया था। वहीं, 31 मार्च 2021 को समाप्त हो रहे चालू वित्त वर्ष में 9.8 फीसदी की गिरावट का अनुमान जताया गया था। जो RBI के 9.5 फीसदी की गिरावट के ताजा अनुमान से ज्यादा है।

अगले वित्त वर्ष में 9 फीसदी की ग्रोथ का अनुमान

हालांकि, अधिकांश अर्थशास्त्रियों ने अगले वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यस्था में 9 फीसदी की ग्रोथ का अनुमान जताया है। वहीं, वित्त वर्ष 2022-23 में 5.7 फीसदी की ग्रोथ का अनुमान है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भारत की जीडीपी को प्रो-कोविड स्तर तक पहुंचने में कम से कम 1 साल का समय लग सकता है। आईडीएफसी बैंक के चीफ इकोनॉमिस्ट इंद्रनील पान का कहना है कि नौकरियों में छंटनी और सैलरी में कटौती से लंबे समय तक मांग धीमी रह सकती है।

चालू वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ- 7.9 फीसदी रहने का अनुमान

पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) ने इकोनॉमी एंड बिजनेस मोमैंटम इंडेक्स के आधार पर कहा है कि चालू वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ -7.9 फीसदी रह सकती हैं। हालांकि, वित्त वर्ष 2022 में 7.7 फीसदी जीडीपी ग्रोथ का अनुमान जताया गया है। PHDCCI की रिपोर्ट में कहा गया है कि 25 प्रमुख इकोनॉमिक और बिजनेस इंडीकेटर्स में से 21 ने महत्वपूर्ण रिकवरी का संकेत दिया है। हालांकि, इंडस्ट्री और सर्विस सेक्टर के लिए क्रेडिट वितरण बड़ी चुनौती बना हुआ है।

IMF का 10.3 फीसदी की गिरावट का अनुमान

इंटरनेशनल मॉनीटरी फंड (IMF) ने कोरोना के कारण हाल ही में भारतीय अर्थव्यवस्था में 10.3 फीसदी की गिरावट का अनुमान जताया है। हालांकि, IMF ने अगले वित्त वर्ष में 8.8 फीसदी ग्रोथ रेट रहने की बात कही है। IMF ने कहा है कि अगले साल चीन का ग्रोथ रेट 8.2 फीसदी रह सकता है। इस प्रकार भारत सबसे तेजी से उभरती हुई इकोनॉमी बन सकता है। IMF ने चालू वित्त वर्ष में केवल चीन की आर्थिक ग्रोथ को सकारात्मक बताया है।

सबसे बुरे आर्थिक दौर से गुजर रही है दुनिया

हाल ही में वर्ल्ड बैंक ने कहा था कि 1930 के बाद पूरी दुनिया अब फिर से आर्थिक मंदी के सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। साथ ही गरीब और विकास कर रहे देशों के लिए कोरोना सबसे ज्यादा विनाशकारी साबित हो रहा है। वर्ल्ड बैंक के प्रेसीडेंट डेविड मालपास ने कहा था कि आर्थिक मंदी में कई देशों में जोखिम का खतरा बढ़ रहा है। डेविड मालपास ने कहा कि यह मंदी बहुत गहरी है। यह उनके लिए और ज्यादा मुसीबत पैदा कर रही है जो ज्यादा ही गरीब हैं।

खबरें और भी हैं...