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कम्पाउंडिंग की ताकत:कम निवेश के बाद भी मिल सकता है कई गुना अधिक रिटर्न, जल्दी शुरुआत करने से मिलेगा ज्यादा फायदा

नई दिल्ली2 महीने पहले
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अगर आप कम निवेश से अधिक दौलत जमा करना चाहते हैं तो ऐसा कम्पाउंडिंग यानी चक्रवृद्धि ब्याज की शक्ति से कर सकते हैं। वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने इसे संसार का आठवां आश्चर्य बताया है। उनके मुताबिक, जो लोग कम्पाउंडिंग की शक्ति को समझते हैं वे इससे पैसा कमाते हैं और जो लोग नहीं समझते वे भुगतान करते हैं। कम्पाउंडिंग की शक्ति म्यूचुअल फंड निवेश के मामले में वेल्थ क्रिएशन का सबसे प्रभावी तरीका हो सकता है।

इसे एक उदाहरण से समझते हैं: मान लीजिए आपने किसी स्कीम में 100 रुपए का निवेश किया और कम्पाउंड इंटरेस्ट यानी चक्रवृद्धि ब्याज के रूप में आपको 5 रुपए मिले। अब अगले कम्पाउंडिंग चक्र में रिटर्न की गणना 100 के बजाय 105 रुपए पर होगी यानी आपको 105 रुपए की राशि पर ब्याज मिलेगा। कम्पाउंडिंग के जरिए आपके धन में गुणात्मक रूप से इजाफा होता है। हालांकि कम्पाउंडिंग के लिए समय और धैर्य जरूरी है।

दो व्यक्तियों का निवेश बराबर, लेकिन रिटर्न अलग
रिटायरमेंट की प्लानिंग के लिए कोई ए नामक व्यक्ति 30 वर्ष की उम्र से 2000 रुपए प्रतिमाह निवेश शुरू करता है। दूसरी तरफ बी नामक व्यक्ति 45 वर्ष की उम्र से 4000 रुपए प्रतिमाह निवेश शुरू करता है। दोनों ही व्यक्ति 60 वर्ष की उम्र तक निवेश करते हैं। मान लीजिए दोनों को 10% की दर से रिटर्न मिला। अब देखते हैं कि उन्होंने कितना कॉर्पस जमा किया होगा।

नोट: गणना के लिए महंगाई को शामिल नहीं किया गया है। यह माना गया है कि ब्याज दर स्थिर है, ए और बी पूरी निवेश अवधि में समान स्कीम में निवेश कर रहे हैं।

आय बढ़ने के साथ बढ़ाते जाएं SIP राशि जैसे-जैसे आपकी आय बढ़ती जाए, SIP की राशि में भी उसी हिसाब से इजाफा करते जाएं। ऐसा करने से कम्पाउंडिंग रिटर्न भी बढ़ता जाएगा और आपके लक्ष्य आसानी से हासिल हो जाएंगे। दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि SIP के जरिए निवेश लंबे समय तक जारी रखें। जब तक लक्ष्य हासिल न कर लें, SIP बंद न करें। इसके दो फायदे होंगे। साल-दर-साल निवेश की रकम बढ़ती जाएगी और कम्पाउंडिंग रिटर्न में भी इजाफा होता जाएगा।