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कैट का दावा:दिल्ली-NCR में किसानों के आंदोलन से 50 हजार करोड़ का व्यापार हुआ नुकसान

नई दिल्लीएक महीने पहले
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  • कैट ने चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि ऐसे समय में जब कोरोना महामारी के कारण तबाह हुआ व्यापार जैसे तैसे ठीक होने की कगार पर था
  • कैट ने कहा कि कृषि कानून अकेले किसानों से नहीं जुड़े हैं, देश भर में लगभग 1.25 करोड़ व्यापारी मंडियों में काम कर रहे हैं

दिल्ली-NCR क्षेत्र में पिछले 57 दिनों से चले आ रहे किसानों के आंदोलन से व्यापारियों को लगभग 50 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। यह दावा व्यापारी संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) का है।

कैट ने चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि ऐसे समय में जब कोरोना महामारी के कारण तबाह हुआ व्यापार जैसे तैसे ठीक होने की कगार पर था, किसानों के आंदोलन से व्यापारियों को नुकसान उठाना पर रहा है।

क्या कहा कैट ने-

कैट का कहना है कि सरकार का नया प्रस्ताव जिसमें डेढ़ साल के लिए कृषि कानूनों को स्थगित करने व किसान नेताओं के साथ एक संयुक्त समिति बनाने की बात कही गई है, काफी न्यायसंगत और उचित है। इसलिए अब किसानों को लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस प्रस्ताव को स्वीकार करना चाहिए और अपना आंदोलन वापस ले लेना चाहिए।

यदि अब भी किसान सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करते हैं, तो यह माना जाएगा कि वे समाधान में रुचि नहीं रखते हैं और कुछ विभाजनकारी ताकतें समस्याएं बनाएं रखने के लिए किसानों का उपयोग कर रही हैं ।

1.25 करोड़ व्यापारी मंडियों में काम कर रहे हैं

भरतिया और खंडेलवाल ने कहा कि कृषि कानून अकेले किसानों से नहीं जुड़े हैं। देश भर में लगभग 1.25 करोड़ व्यापारी मंडियों में काम कर रहे हैं और ये व्यापारी किसानों को न केवल अपनी फसल बेचने में सुविधा प्रदान करते हैं बल्कि उनकी ज़रूरत के समय में उनकी कई तरह से मदद भी करते हैं। ये व्यापारी 4 करोड़ से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करते हैं।

कृषि कानून में आपूर्ति श्रृंखला के इस महत्वपूर्ण घटक को ही हटाने के बारे में साफ़ कहा गया हैं। ऐसे में इन बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका का क्या होगा। क्या वे एक ही झटके में अपनी आजीविका से बाहर हो जाएंगे? इन लोगों के हितों को भी संरक्षित करने की आवश्यकता है क्योंकि इतनी बड़ी संख्या को नजर अंदाज नही किया जा सकता।

व्यापारियों को प्रस्तावित संयुक्त समिति में प्रतिनिधित्व दिया जाए

कैट ने सरकार से अपील की है कि व्यापारियों को भी प्रस्तावित संयुक्त समिति में प्रतिनिधित्व दिया जाए। यदि व्यापारियों को विश्वास में लिए बिना कोई भी समझौता किया जाता है तो कृषि अधिनियम मुद्दा विवादों में रहेगा और सरकार की अब तक की सारी कवायद बेकार साबित हो सकती है। इसलिए इस विवादास्पद मुद्दे का व्यापक समाधान हो और सभी हितधारकों के वैध हित को संरक्षित किया जाए।

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