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कोरोनावायरस का असर:देश का वित्तीय घाटा इस कारोबारी साल में जीडीपी के 8% से ऊपर जाने की आशंका

नई दिल्ली8 महीने पहले
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कोरोनावायरस के कारण टैक्स कलेक्शन घटने और राहत पर खर्च बढ़ने की वजह से इस कारोबारी साल के पहले चार महीने (अप्रैल-जुलाई) में ही वित्तीय घाटा पूरे 12 महीने के लिए तय की गई सीमा के 103.1 फीसदी पर पहुंच गया है - Dainik Bhaskar
कोरोनावायरस के कारण टैक्स कलेक्शन घटने और राहत पर खर्च बढ़ने की वजह से इस कारोबारी साल के पहले चार महीने (अप्रैल-जुलाई) में ही वित्तीय घाटा पूरे 12 महीने के लिए तय की गई सीमा के 103.1 फीसदी पर पहुंच गया है
  • कारोबारी साल के पहले 5 महीने (अप्रैल-अगस्त) में जीएसटी वसूली करीब 3.1 लाख करोड़ रुपए हुई है
  • पूरे कारोबारी साल के लिए सरकार ने जीएसटी वसूली का अनुमान 13.4 लाख करोड़ रुपए तय किया है
  • इस कारोबारी साल के लिए बजट में वित्तीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी का 3.5% रखा गया है

केंद्र सरकार का वित्तीय घाटा (फिस्कल डिफिसिट) इस कारोबारी साल (2020-21) में बढ़कर जीडीपी के 8 फीसदी से ऊपर जा सकता है। यह बात कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की एक ताजा रिपोर्ट में कही गई है। सरकार अपनी आमदनी से जितना ज्यादा खर्च करती है, उसे वित्तीय घाटा कहते हैं।

कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स ने सोमवार को कहा था कि कोरोनावायरस के कारण टैक्स कलेक्शन घटने और राहत पर खर्च बढ़ाए जाने की वजह से इस कारोबारी साल के पहले चार महीने (अप्रैल-जुलाई) में ही वित्तीय घाटा पूरे 12 महीने के लिए तय की गई सीमा के 103.1 फीसदी पर पहुंच गया है। ब्रोकरेज कंपनी की बुधवार की रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्र सरकार यदि अपने खर्च में 1.7 लाख करोड़ रुपए की कटौती नहीं करती है, तो उसका वित्तीय घाटा बढ़कर 8-9 फीसदी तक या उससे भी ऊपर जा सकता है।

पहले चार महीने में पूरे वर्ष के बजट अनुमान का 35% हुआ खर्च

सरकार ने पहले चार महीने में पूरे वर्ष के बजट अनुमान का 35 फीसदी खर्च कर दिया है। इस दौरान रेवेन्यू खर्च में करीब 12 फीसदी और पूंजीगत खर्च में 4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। लेकिन रेवेन्यू कलेक्शन में कमी चिंता की सबसे बड़ी वजह है।

हर महीने 1.5 लाख रुपए की जीएसटी वसूली का दबाव

इस कारोबारी साल के पहले 5 महीने (अप्रैल-अगस्त) में जीएसटी की वसूली करीब 3.1 लाख करोड़ रुपए हुई है। पूरे कारोबारी साल के लिए जीएसटी वसूली का अनुमान 13.4 लाख करोड़ रुपए है। इसका मतलब यह है कि बाकी के सात महीने में हर महीने सरकार को कम से कम 1.5 लाख रुपए की जीएसटी वसूली करनी होगी। मौजूदा परिस्थिति में यह असंभव लग रहा है।

सीजीएसटी कलेक्शन बजट अनुमान के मुकाबले 1.5-2 लाख करोड़ रुपए कम रह सकता है

कोटक की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले कुछ महीनों में यदि कलेक्शन बढ़ता भी है, तब भी पूरे कारोबारी साल में सीजीएसटी कलेक्शन बजट अनुमान के मुकाबले 1.5-2 लाख करोड़ रुपए कम रह सकता है। हमारे संशोधित अनुमान के मुताबिक इस कारोबारी साल में जीडीपी में 11.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की जा सकती है। इसके आधार पर जीडीपी के मुकाबले वित्तीय घाटा 8 फीसदी रह सकता है।

सरकार की कुल पावती इस कारोबारी साल में बजट अनुमान से 5.3 लाख करोड़ रुपए कम रहने की आशंका

रिपोर्ट में यह माना गया है कि सरकार की कुल पावती इस कारोबारी साल में बजट अनुमान से 5.3 लाख करोड़ रुपए कम रहेगी। कारोनावायरस संबंधी खर्च करीब 3 लाख करोड़ रुपए का होगा। साथ ही सरकार अपने कुल खर्च में 1.7 लाख करोड़ रुपए की कटौती करेगी। यदि खर्च में कटौती नहीं की जाएगी, तो वित्तीय घाटा 8 फीसदी से भी ऊपर चला जाएगा। अप्रैल-जुलाई अवधि में सरकार का टैक्स रेवेन्यू अनुमान से 30 फीसदी कम रहा है।

एफआरबीएम एक्ट के एस्केप क्लाउज का उपयोग कर सरकार ने वित्तीय घाटे की सीमा बढ़ा दी है

सरकार ने एफआरबीएम कानून के एस्केप क्लाउज का उपयोग करते हुए पिछले और इस कारोबारी साल के वित्तीय घाटे की सीमा को 0.5 फीसदी बढ़ा दिया है। सरकार ने पिछले कारोबारी साल के लिए वित्तीय घाटे की नई सीमा को बढ़ाकर 3.8 फीसदी कर दिया था और इस कारोबारी साल के लिए इस बढ़ाकर 3.5 फीसदी कर दिया है। लेकिन अब कोरोनावायरस महामारी ने परिस्थितियों में भारी बदलाव कर दिया है।

सरकार ने कर्ज लेने की सीमा को 50% से ज्यादा बढ़ाया

इस कारोबारी साल में सरकार ने कर्ज की सीमा में 50 फीसदी से ज्यादी की बढ़ोतरी कर दी है। क्योंकि सरकार को अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए ज्यादा खर्च करना होगा। अब इस कारोबारी साल में कुल मार्केट बॉरोइंग सीमा को बढ़ाकर 12 लाख करोड़ रुपए कर दिया गया है। जबकि बजट में इसके लिए 7.80 लाख करोड़ रुपए का अनुमान रखा गया था।

4 महीने में ही वित्तीय घाटा पूरे साल के लिए तय की गई सीमा से 3% ज्यादा हो गया, पिछले कारोबारी साल में यह अक्टूबर में लक्ष्य के पार पहुंचा था

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