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पावर सेक्टर सुधार की राह पर:चौबीसों घंटे बिजली के लिए डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों की फाइनेंशियल पोजिशन बेहतर बनाने की जरूरत

9 महीने पहले
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  • राइट्स ऑफ कंज्यूमर्स रूल्स के मुताबिक, भरोसेमंद डिलीवरी के लिए डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों को चौबीसों घंटे बिजली देनी होगी
  • पावर रेगुलेटर एग्रीकल्चर जैसे कुछ कैटेगरी के कंज्यूमर्स को बिजली की उपलब्धता के लिए कम घंटे तय कर सकता है

बिजली क्षेत्र कोविड-19 के चलते हुई दिक्कतों से धीरे-धीरे उबर रहा है, लेकिन 2021 में सबको चौबीसों घंटे बिजली देने का सरकारी लक्ष्य पूरा करने के लिए उपभोक्ता नियमों को लागू करने सहित कई सुधारों की जरूरत होगी। सरकार के लिए सबसे अहम यह होगा कि वह बिजली उत्पादन कंपनियों का बकाया भुगतान करने में दिक्कत महसूस कर रही वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति में सुधार लाने के उपाय करे।

कैसा है बिजली वितरण कंपनियों का हाल?

सरकार ने बिजली क्षेत्र पर बना तनाव घटाने के लिए इस साल कई ठोस कदम उठाए और बिजली उत्पादन कंपनियों का जून 2020 तक का बिल भुगतान करने के लिए वितरण कंपनियों को आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत 1,20,000 करोड़ की रकम दिलाने के उपायों का एलान किया। लेकिन इसका खास फायदा नहीं हुआ है क्योंकि ऊर्जा मंत्रालय के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर 2020 के अंत में बिजली वितरण कंपनियों का बकाया 1,39,021 करोड़ रुपये था जो अक्टूबर 2019 के 1,06,343 करोड़ रुपये से 30 पर्सेंट ज्यादा है।

चौबीसों घंटे बिजली के लिए क्या कर रही सरकार?

जहां तक देशभर में चौबीसों घंटे बिजली मुहैया कराए जाने की बात है तो इसके बाबत ऊर्जा मंत्री आर के सिंह ने कहा है कि सर्विस की डिलीवरी इलेक्ट्रिसिटी (राइट्स ऑफ कंज्यूमर्स) रूल्स से सुनिश्चित की जाएगी। रूल्स के मुताबिक आपूर्ति की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए वितरण कंपनियों को चौबीसों घंटे बिजली देनी होगी लेकिन पावर रेगुलेटर कृषि जैसे क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को बिजली की उपलब्धता के लिए कम घंटे तय कर सकता है।

राइट्स ऑफ कंज्यूमर्स रूल्स में क्या है?

सिंह ने बिजली उपभोक्ताओं को सशक्त बनाते हुए उनके अधिकार सुनिश्चित करने के लिए इसी महीने इस रूल्स को लागू किए जाने का एलान किया था। इन रूल्स में मानकों के मुताबिक सेवा देने में नाकाम रहने की सूरत में वितरण कंपनियों पर जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान है। सिंह ने कहा था कि रूल्स के मुताबिक, उपभोक्ताओं को नया कनेक्शन, मीटर की टेस्टिंग होगी और नुक्स वाले मीटर की बदली तय समय के भीतर होगी।

कोविड से क्या हुआ बिजली की खपत का हाल?

कोविड-19 के चलते लॉकडाउन के बीच इकनॉमिक एक्टिविटीज घटने के मार्च से अगस्त तक छह महीने खपत में गिरावट का रुझान रहा था। बिजली की खपत सबसे ज्यादा अप्रैल में 23.2 पर्सेंट घटी थी लेकिन गिरावट का दर धीरे-धीरे सुधरकर अगस्त में 1.7 पर्सेंट पर आ गई थी। ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक, छह महीने बाद सितंबर में बिजली की खपत 4.4 पर्सेंट सालाना आधार पर और अक्तूबर में 11.6 पर्सेंट बढ़ी थी लेकिन नवंबर में इसकी ग्रोथ 3.7 पर्सेंट रही थी।

डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों को कैसी स्कीम का इंतजार?

जानकारों के मुताबिक बिजली क्षेत्र को डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों में नई जान डालने के लिए नवंबर 2015 में लॉन्च उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना की तर्ज पर एक सरकारी स्कीम का भी इंतजार है। सरकार वह स्कीम घाटे में चल रही बिजली वितरण कंपनियों को उबरने में मदद करने के मकसद से लाई गई थी।