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बाजार में फॉरेन फैक्टर:भारतीय शेयर मार्केट को अमेरिका में आर्थिक ग्रोथ और मजबूत डॉलर से ज्यादा खतरा, लेकिन फार्मा और IT सेक्टर से मिलेगा सपोर्ट

मुंबईएक महीने पहले
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देश में कोरोना के मामले हर दिन बढ़ रहे हैं। इससे घरेलू अर्थव्यवस्था की हालत कमजोर होती जा रही है। वहीं, दूसरी ओर अमेरिका सहित यूरोप के देशों में स्थिति अब काबू में आने लगा है। प्रमुख देशों की इकोनॉमी भी पटरी पर लौट रही है। यह ग्लोबल इकोनॉमी के लिए अच्छी बात है, लेकिन भारतीय शेयर बाजार के लिए यह चिंता का विषय है।

US में इकोनॉमिक रिकवरी से डॉलर मजबूत
पहली तिमाही में अमेरिका की GDP सालभर पहले से 6.4% बढ़ा है। 2003 के बाद से GDP में अब तक की सबसे अच्छी बढ़त है। आर्थिक रिकवरी से अमेरिकी करेंसी यानी US डॉलर भी मजबूत हो रहा है। जिससे विदेशी निवेशक भारत सहित अन्य इमर्जिंग मार्केट से बाहर निकलने लगे हैं। क्योंकि डॉलर के मजबूत होने से निवेशकों को अमेरिकी और यूरोप के शेयर बाजार में ही अच्छा रिटर्न मिलने लगेगा।

विदेशी निवेश घटने से बाजार पर बनेगा दबाव
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक विदेशी निवेशकों (FII) के घरेलू मार्केट से पैसे निकालने का दबाव फाइनेंशियल और कंजंप्शन पर पड़ेगा, जो बाजार के प्रमुख सेक्टर में से एक हैं। हालांकि फार्मा और IT को अमेरिकी इकोनॉमी में ग्रोथ का फायदा मिलेगा। वहीं, अमेरिकी शेयर बाजार में इन दिनों रिकॉर्ड स्तर पर कारोबार कर रहे हैं। पिछले साल अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के बाद एक बार फिर डॉओ जोंस, नैस्डैक अब तक सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए।

कमजोर तिमाही नतीजे भी कर सकते हैं निराश
भारतीय शेयर बाजार पर नए फाइनेंशियल इयर के तिमाही नतीजों का भी असर होगा। क्योंकि चालू फाइनेंशियल इयर (2021-22) की शुरुआत में ही कोरोना तेजी से फैलने लगा। इकोनॉमिकल्स एक्टिविटीज की धीमी रफ्तार कंपनियों के कारोबार पर बुरा असर डाल रही हैं। इसमें सबसे ज्यादा ऑटो और ऑटो एंसलरीज कंपनियों पर असर पड़ा है।

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