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फॉरेन इंवेस्टर्स निकाल रहे पैसे:FPI ने भारतीय बाजार से इस महीने 17 जून तक 31,430 करोड़ रुपए निकाले, महंगाई ने बढ़ाई चिंता

नई दिल्ली2 महीने पहले
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अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से की गई ब्याज दरों में बढ़ोतरी, बढ़ती महंगाई और इक्विटी के हाई वैल्यूएशन के कारण विदेशी इंवेस्टर्स इंडियन स्टॉक मार्केट से पैसे निकाल रहे हैं। फॉरेन पोर्टफोलियो इंवेस्टर्स (FPI) सिर्फ इस महीने 17 जून तक 31,430 करोड़ रुपए निकाल चुके हैं। वहीं पूरे साल की बात करें तो वो अब तक 1.98 लाख करोड़ रुपए की इक्विटी बेच चुके हैं।

FPI का फ्लो अस्थिर होने का कारण
कोटक सिक्योरिटीज के इक्विटी रिसर्च हेड श्रीकांत चौहान ने बताया, उभरते बाजारों में बढ़ते जियोपॉलिटिकल खतरा, बढ़ती महंगाई और केंद्रीय बैंकों द्वारा मॉनेटरी पॉलिसी को कड़ा करने के कारण FPI का फ्लो अस्थिर बना हुआ है। वी के विजयकुमार, जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट ने बताया,अमेरिकी फेडरल बैंक को 0.75% ब्याज दर बढ़ाने के लिए मजबूर किया गया, जिसके बाद ग्लोबल इंवेस्टर्स को वैश्विक मंदी का डर सता रहा है।

पैसा इक्विटी से बॉन्ड में हो रहा शिफ्ट
इसके अलावा, यह बढ़ती महंगाई को कंट्रोल करने के लिए और कड़े कदम उठाने के संकेत देता है। डॉलर की मजबूती और अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी FPI की बिक्री के लिए प्रमुख ट्रिगर हैं। चूंकि फेडरल रिजर्व और अन्य केंद्रीय बैंकों जैसे बैंक ऑफ इंग्लैंड और स्विस सेंट्रल बैंक ने दरें बढ़ाई हैं, इसलिए बढ़ती यील्ड के साथ वैश्विक स्तर पर दरों में एक समान बढ़ोतरी हो रही है। पैसा इक्विटी से बॉन्ड की ओर बढ़ रहा है।

RBI भी बढ़ा सकता है ब्याज दरें
भारत में भी, महंगाई चिंता की वजह बनी हुई है, और इसे कंट्रोल करने के लिए RBI भी ब्याज दर बढ़ा रहा है। मॉर्निंगस्टार इंडिया के एसोसिएट रिसर्च डायरेक्टर- मैनेजर हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा, 'RBI भी अगले दो या तीन तिमाहियों में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी कर सकती है, जिसका GDP विकास और बाजार की गति पर सीधा असर पड़ेगा। क्रूड भी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। इन कारणों ने फॉरेन इंवेस्टर्स को दूर कर दिया है। इसलिए वे भारतीय इक्विटी में इंवेस्ट करने से दूर हो रहे हैं।

भारत के अलावा FPI ताइवान, दक्षिण कोरिया, फिलीपींस और थाईलैंड जैसे अन्य उभरते बाजारों से भी पैसे निकाल रहे हैं।

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