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रिपोर्ट:रिलायंस के साथ डील नहीं हुई तो लिक्विडेशन में जाएगी फ्यूचर रिटेल, बंद करने पड़ेंगे 1500 से ज्यादा आउटलेट

नई दिल्लीएक वर्ष पहले
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सिंगापुर की मध्यस्थता अदालत ने रिलायंस-फ्यूचर ग्रुप की डील पर रोक लगा दी है - Dainik Bhaskar
सिंगापुर की मध्यस्थता अदालत ने रिलायंस-फ्यूचर ग्रुप की डील पर रोक लगा दी है
  • फ्यूचर ग्रुप ने कहा- आउटलेट बंद होने से 29 हजार कर्मचारियों को नौकरी पर संकट आएगा
  • रिलायंस और फ्यूचर ग्रुप के बीच अगस्त में हुई थी 24,713 करोड़ रुपए की डील

यदि रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के साथ डील नहीं हो पाती है फ्यूचर रिटेल लिमिटेड (FRL) लिक्विडेशन में जाएगी। अमेजन डॉट कॉम की याचिका पर सिंगापुर में मध्यस्थता अदालत में सुनवाई के दौरान फ्यूचर रिटेल ने यह बात कही है।

मध्यस्थता अदालत ने फ्यूचर ग्रुप-रिलायंस सौदे पर लगाई रोक

अमेजन डॉट कॉम ने फ्यूचर ग्रुप और रिलायंस सौदे के खिलाफ याचिका दाखिल की थी। रविवार को मध्यस्थता अदालत ने अमेजन के पक्ष में फैसला सुनाते हुए इस डील पर रोक लगा दी थी। रिलायंस और फ्यूचर ग्रुप के बीच अगस्त में 24,713 करोड़ रुपए की डील हुई थी। इसके तहत फ्यूचर ग्रुप ने अपना रिटेल, होलसेल और लॉजिस्टिक्स कारोबार रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड को बेच दिया था।

अमेजन की आपत्ति

अगस्त 2019 में अमेजन ने फ्यूचर कूपंस में 49% हिस्सेदारी खरीदी थी। इसके लिए अमेजन ने 1,500 करोड़ रुपए का पेमेंट किया था। इस डील में शर्त थी कि अमेजन को तीन से 10 साल की अवधि के बाद फ्यूचर रिटेल लिमिटेड की हिस्सेदारी खरीदने का अधिकार होगा। अमेजन के मुताबिक, इस डील में एक शर्त यह भी थी कि फ्यूचर ग्रुप मुकेश अंबानी के रिलायंस ग्रुप की किसी भी कंपनी को अपने रिटेल असेट्स नहीं बेचेगा।

अमेजन ने फ्यूचर ग्रुप पर लगाया समझौते के उल्लंघन का आरोप

जेफ बेजोस की कंपनी अमेजन ने मध्यस्थता अदालत में कहा कि फ्यूचर ग्रुप ने रिटेल असेट्स की रिलायंस को बिक्री करके समझौते का उल्लंघन किया है। उधर, फ्यूचर ग्रुप ने मध्यस्थता अदालत में कहा कि यदि रिलायंस के साथ डील नहीं हो पाती है तो उसे अपने 1500 से आउटलेट्स को बंद करना पड़ेगा। इससे फ्यूचर ग्रुप और वेंडर्स फर्म के करीब 29 हजार कर्मचारियों की नौकरी पर संकट पैदा होगा।

कोविड-19 से कई कारोबार प्रभावित

फ्यूचर ग्रुप ने मध्यस्थता अदालत में कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण कई भारतीय कारोबार प्रभावित हुए हैं। खासतौर पर इसका असर रिटेल सेक्टर में पड़ा है। फ्यूचर ग्रुप का कहना है कि FRL-रिलायंस सौदे का मकसद फंड इंफ्यूजन के जरिए सभी हितधारकों के हितों की रक्षा करना था। हालांकि, एकमात्र मध्यस्थ वीके राजा ने कहा कि आर्थिक समस्या कानूनी औपचारिकताओं के पालन नहीं करने का कानूनी आधार नहीं है।

पूरी होगी FRL-रिलायंस डील

उधर, फ्यूचर ग्रुप का कहना है रिलायंस रिटेल के साथ डील भारतीय कानूनों के अनुरूप है। कंपनी ने कहा कि यह उस समझौते की पार्टी नहीं है, जिसके तहत अमेजन ने मध्यस्थता की कार्यवाही शुरू की है। कंपनी ने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए सभी उचित कदम उठाएगी कि प्रस्तावित लेनदेन बिना किसी देरी के आगे बढ़े। वहीं, रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड ने एक बयान में कहा कि उसने उचित कानूनी सलाह के तहत फ्यूचर रिटेल लिमिटेड की संपत्ति और व्यवसाय के अधिग्रहण के लिए लेनदेन में प्रवेश किया है और भारतीय कानून के तहत अधिकार और दायित्व पूरी तरह से लागू हैं।

अंतिम फैसले से साफ होगी स्थिति

मध्यस्थता अदालत के एकमात्र मध्यस्थ वीके राजा ने फिलहाल इस सौदे को रोकने के लिए कहा है। राजा का कहना है कि जब तक इस मामले में मध्यस्थ का अंतिम फैसला नहीं आ जाता है, तब तक यह सौदा पूरा नहीं हो सकता है। अब इस मामले में अंतिम फैसला करने के लिए तीन सदस्यीय मध्यस्थता पीठ का गठन किया जाएगा। यह पीठ 90 दिनों में अंतिम निर्णय लेगी। इस पीठ में फ्यूचर और अमेजन की ओर से एक-एक नामित सदस्य होंगे। एक सदस्य तटस्थ होगा।

भारत में पकड़ मजबूत करना चाहती है अमेजन

रिलायंस की नजर भारत में ऑनलाइन रिटेल स्पेस पर है, जिसे अमेजन और फ्लिपकार्ट लीड कर रहे हैं। वहीं, अमेजन भारत में मजबूत ऑनलाइन मौजूदगी के चलते ऑफलाइन रिटेल बिजनेस में अपनी पकड़ मजबूत करने पर काम कर रही है। इसके लिए अमेजन ने प्राइवेट इक्विटी फंड समारा कैपिटल के साथ 2018 में आदित्य बिरला ग्रुप के सुपरमार्केट चेन का अधिग्रहण किया था। जानकारों का कहना है कि अमेजन, आरआईएल और फ्यूचर ग्रुप के बीच हुए इस डील चिंतित हुई है। क्योंकि इससे भारत में कंपनी को कड़ी टक्कर मिल सकती है।

रिटेल में बड़ा दांव खेल रही है रिलायंस

इस समय रिलायंस रिटेल देश में करीब 12 हजार स्टोर चलाती है और मुकेश अंबानी रिटेल पर बड़ा दांव खेल रहे हैं। रिलायंस रिटेल का इक्विटी वैल्यूएशन इस समय 4.28 लाख करोड़ रुपए है। इसमें लगातार हिस्सेदारी बेची जा रही है। अब तक करीबन 8 कंपनियों ने इसमें पैसे लगाए हैं। इसकी हिस्सेदारी बेचकर मुकेश अंबानी अब तक 37 हजार करोड़ रुपए जुटा चुके हैं। रिलायंस रिटेल, जियोमार्ट के साथ डिजिटल डिलिवरी भी कर रही है।

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