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वैक्सीन का सपोर्ट:FY2021-22 में 9% रह सकती है ग्रोथ, टीका वितरण में देरी हुई तो 6% तक सिमट जाएगी

13 दिन पहले
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भारत खपत बढ़ने पर वित्त वर्ष 2022 में 9% की ग्रोथ के साथ सबसे तेज इकॉनमिक ग्रोथ वाली इकनॉमी रह सकता है। यह अनुमान दिग्गज ब्रोकरेज फर्म बैंक ऑफ अमेरिका सिक्योरिटीज ने दिया है। उसने यह भी कहा कि टीका वितरण में देरी हुई तो ग्रोथ 6% तक सिमट कर रह जाएगी। ब्रोकरेज फर्म ने यह अनुमान जून तक टीका वितरण हो जाने की संभावना पर दिया है। उसने बजट में मांग बढ़ाने वाले उपायों पर ध्यान दिए जाने की भी उम्मीद जताई है।

फिच रेटिंग्स ने दिया FY22 में GDP के 11% बढ़ने का अनुमान

फिच रेटिंग्स ने वित्त वर्ष 2021 में GDP 9.4% घटने के बाद अगले वित्त वर्ष में 11% बढ़ने का अनुमान दिया है। वैसे इकॉनमिक ग्रोथ कोविड-19 का शॉक लगने से पहले ही 2019 में दस साल में सबसे कम 4.2% रह गई थी। GDP कोरोनावायरस के चलते हुए लॉकडाउन के बीच जून तिमाही में 2019 के लेवल से 23.9% कम हो गया था। ग्लोबल डिमांड गायब होने और घरेलू खपत में तेज गिरावट आने देश का एक चौथाई GDP खत्म हो गया। GDP सितंबर तिमाही में 7.5% घटने से एशिया की तीसरी सबसे बड़ी इकॉनमी मंदी की चपेट में आ गई।

कोरोना-19 की चोट इकॉनमी पर लंबे समय तक दिख सकती है

इधर, फिच रेटिंग्स का कहना है कि कोरोना-19 की चोट इंडियन इकॉनमी पर लंबे समय तक दिख सकती है। उसके मुताबिक, इकॉनमिक ग्रोथ कोविड-19 के पहले से कम रह सकती है। उसने इसके लिए सप्लाई साइड की दिक्कत और फाइनेंशियल सेक्टर की कमजोरी जैसी डिमांड साइड की मजबूरियां गिनाईं। उसके मुताबिक, यह मार्च 2022 में खत्म होनेवाले वित्त वर्ष में मजबूती से रिबाउंड कर सकती है। लेकिन फिर अगले तीन वित्त यानी FY23-FY26 में इसकी ग्रोथ लगभग 6.5% रह सकती है।

इकॉनमिक रिकवरी को टीकों की उपलब्धता का सपोर्ट मिलेगा

दिग्गज रेटिंग एजेंसी ने कहा है कि भारत उन देशों में एक है जिनकी इकनॉमी कोरोनावायरस की वजह से गंभीर मंदी का शिकार हुई है। उसके मुताबिक, इसकी वजह कोविड-19 के चलते हुए लॉकडाउन और सीमित सरकारी सपोर्ट रही है। रेटिंग एजेंसी कहती है कि इंडियन इकॉनमी फिलहाल रिकवरी की राह पर है। बैंक ऑफ अमेरिका सिक्योरिटीज की तरह इसका भी कहना है कि उसको आने वाले महीनों में टीकों की उपलब्धता का सपोर्ट मिलेगा।

FY21 से FY26 के बीच इकॉनमिक ग्रोथ 5.1% पर रह सकती है

फिच के मुताबिक, मीडियम टर्म में इकॉनमिक ग्रोथ सुस्त रहेगी। निवेश में आई कमी के चलते सप्लाई में सुस्त रिकवरी हो सकती है। इन सबके चलते FY21 से FY26 के बीच छह वित्त वर्ष में GDP ग्रोथ 5.1% पर रह सकती है। इसने कोविड-19 का कहर टूटने से पहले इस दौरान GDP ग्रोथ 7% रहने का अनुमान दिया था।

नौकरियां जाने से अर्थव्यवस्था में मांग से जुड़ी समस्या पैदा हुई

बैंक ऑफ अमेरिका सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड-19 के चलते बड़े पैमाने पर नौकरियां गईं और रोजगार खत्म हुए। इसके चलते हमेशा आपूर्ति संबंधी समस्या से जूझती रही अर्थव्यवस्था में मांग से जुड़ी समस्या पैदा हो गई। ब्रोकरेज फर्म के चीफ इंडिया इकनॉमिस्ट इंद्रनील सेनगुप्ता कहते हैं, 'इकॉनमी में रिकवरी हो रही है और इसको खपत में बढ़ोतरी का सपोर्ट मिलेगा। लेकिन रिकवरी की रफ्तार टीके की उपलब्धता पर निर्भर करेगी।'

लोगों के हाथ ज्यादा पैसा लाने को टैक्स रेट कट किया जा सकता है

सेनगुप्ता कहते हैं, 'बजट में मांग बढ़ाने के उपायों पर ध्यान दिया जा सकता है। लोगों के हाथों में ज्यादा पैसा आए, इसके लिए सरकार टैक्स रेट में कमी कर सकती है। पब्लिक सेक्टर बैंकों का रिकैपिटलाइजेशन कर सकती है या उनको इंफ्रा बॉन्ड बेचने की इजाजत दे सकती है। इंधन के खुदरा दाम घटाने के लिए उसके उत्पाद शुल्क घटा सकती है। इन सबसे इकॉनमिक एक्टिविटी बढ़ेगी और रोजगार के मौके बनने की शुरुआत होगी।'

वित्त वर्ष 2022 में फिस्कल डेफिसिट 5% रहने का अनुमान

ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक मांग बढ़ाने के उपायों के वास्ते फंड जुटाने के लिए सरकार हाई इनकम ग्रुप वालों पर कोविड-19 सेस लगा सकती है। उसने वित्त वर्ष 2022 में फिस्कल डेफिसिट 5% रहने का अनुमान दिया है, जिसके इस वित्त वर्ष में 7.9% रहने के आसार हैं।

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