सुधार / गूगल ने यौन उत्पीड़न के मामलों में पॉलिसी बदली, सीधे कोर्ट जा सकेंगे कर्मचारी



Google bows to worker pressure on sexual misconduct policy
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Google bows to worker pressure on sexual misconduct policy

  • गूगल के कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन के दौरान यह मांग रखी थी
  • पिछले हफ्ते 20 हजार कर्मचारियों ने ऑफिस से वॉकआउट किया था
  • गूगल पर यौन शोषण के आरोपियों को जानबूझकर बचाने के आरोप

Dainik Bhaskar

Nov 09, 2018, 11:21 AM IST

सैन फ्रांसिस्को.  गूगल ने यौन उत्पीड़न के मामलों में कार्रवाई के लिए पॉलिसी में बदलाव किया है। नए नियमों के मुताबिक कंपनी की मध्यस्थता जरूरी नहीं होगी बल्कि यह पीड़ित की इच्छा पर निर्भर करेगा। यानी कर्मचारी चाहें तो सीधे कोर्ट जा सकेंगे।

यौन उत्पीड़न मामलों की रिपोर्ट कर्मचारियों को देगा गूगल

  1. गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने गुरुवार को कर्मचारियों को ईमेल भेजा। पिचाई ने कहा कि यौन उत्पीड़न के मामलों में उन्हें कर्मचारियों का फीडबैक मिला है। यह महसूस किया गया कि हमेशा पूरी जानकारी नहीं मिल पाई। पिचाई ने कर्मचारियों से माफी भी मांगी।

  2. यौन उत्पीड़न के मामलों में गूगल अब कर्मचारियों को ज्यादा से ज्यादा जानकारी देगा। सभी विभागों में ऐसे कितने मामले सामने आए और क्या कार्रवाई की गई, इस बारे में भी बताया जाएगा।

  3. यौन उत्पीड़न के मामलों में कमी लाने के लिए गूगल अब हर साल कर्मचारियों को ट्रेनिंग देगा। अब तक एक साल के अंतराल पर प्रशिक्षण दिया जाता था।

  4. सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को सालाना ट्रेनिंग में शामिल होना जरूरी होगा। इसमें पिछड़ने पर उन्हें वेतन बढ़ोतरी और प्रमोशन में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, गूगल ने समान कार्य के लिए महिलाओं को पुरुषों के बराबर वेतन की मांग पूरी नहीं की है।

  5. पिछले हफ्ते गूगल के करीब 20 हजार कर्मचारियों ने दुनियाभर में विरोध प्रदर्शन किया था। इनमें ज्यादातर महिलाएं शामिल थीं। इनकी मांग थी कि यौन उत्पीड़न के मामलों में पारदर्शी नीति बनाई जाए। मध्यस्थता की अनिवार्यता खत्म की जाए।

  6. गूगल के कर्मचारियों ने 6 मांगें रखी थीं

    • यौन उत्पीड़न और भेदभाव के मामलों में कंपनी दखलंदाजी खत्म करे।
    • महिला-पुरुषों के वेतन और मौकों में बराबरी होनी चाहिए।
    • यौन शोषण के मामलों में पारदर्शिता बरती जाए, स्पष्ट नीति तैयार की जाए।
    • पीड़ित की सुरक्षा और गोपनीयता का ध्यान रखा जाए।
    • चीफ डायवर्सिटी ऑफिसर की जवाबदेही तय की जाए। 
    • ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति की जाए जो बोर्ड के सामने कर्मचारियों का पक्ष रख सके।
       

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