एकाधिकार कानून तो है बहाना:जैक मा के कारोबारी साम्राज्य पर सरकार का शिकंजा कसने की शुरुआत

10 महीने पहले
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  • एकाधिकार विरोधी कानून से सरकार को जैक मा जैसे उद्यमियों के कारोबारी दबदबे को नियंत्रित करने का असीमित अधिकार मिल जाएगा
  • अलीबाबा और एंट के को-फाउंडर जैक मा पिछले महीने एंट का IPO बेपटरी हो जाने के बाद से सार्वजनिक मंच पर नजर नहीं आ रहे हैं

जैक मा की कंपनियों के खिलाफ एकाधिकार विरोधी जांच के एलान को ई-कॉमर्स से लेकर लॉजिस्टिक्स और सोशल मीडिया तक फैले उनके कारोबारी साम्राज्य पर सरकार का शिकंजा कसने की शुरुआत माना जा रहा है। जानकार बताते हैं कि जैक पर बन रहा दबाव इंटरनेट की दुनिया में उनके बढ़ते दबदबे को नियंत्रण में लाने की सरकारी कवायद का हिस्सा है। नवंबर में जारी एकाधिकार विरोधी कानून के मसौदे के मुताबिक सरकार को उनके जैसे उद्यमियों के कारोबारी दबदबे को नियंत्रित का असीमित अधिकार मिल जाएगा।

विशाल आकार से अर्थव्यवस्था को नुकसान होने का डर

दरअसल चीन की आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा देने और उसकी तकनीकी ताकत का आइना मानी जानेवाली अलीबाबा और टेनसेंट होल्डिंग जैसी कंपनियां करोड़ों यूजर्स की जिंदगी के हर पहलू को जिस तरह प्रभावित कर रही हैं उसको देखते हुए रेगुलेटर्स ने उन पर दबाव बढ़ाया है। झोंगुआनकुन इंटरनेट फाइनेंस इंस्टीट्यूट के रिसर्चर दोंग शिमियाओ कहते हैं कि विशाल आकार के चलते आर्थिक व्यवस्था के लिए खतरा बन सकने वाले जैक मा के कारोबारी साम्राज्य को नियंत्रित करने की सरकार की मिली-जुली कोशिश तेज हो रही है। सरकार चाहती है कि इनकी जगह छोटे और कम दबदबे लेकिन नियमों के हिसाब से ज्यादा चलने वाले कंपनियां बनें।

नवंबर से पब्लिक प्लेटफॉर्म पर नजर नहीं आ रहे जैक

अलीबाबा और एंट के को-फाउंडर जैक मा पिछले महीने एंट का IPO बेपटरी हो जाने के बाद से सार्वजनिक मंच पर नजर नहीं आ रहे हैं। मामले के जानकार सूत्र ने बताया कि सरकार ने दिसंबर की शुरआत में जैक को देश में ही रहने का निर्देश दिया था। उनका कहना है कि सरकारी कार्रवाई से जैक को निजी तौर पर कोई नुकसान नहीं होगा लेकिन इसको सरकार की तरफ से उनको दी गई चेतावनी माना जा सकता है। दरअसल, टेक्नोलॉजी कंपनियों के दबदबे को देश के राजनीतिक और वित्तीय स्थायित्व के लिए बढ़ते खतरे के तौर पर देखा जा रहा है।

एंटी मोनोपॉली कानूनों पर पॉलिटिकल लीडर्स की चुप्पी

नए एकाधिकार कानून बनाने में जुटी सरकार अलीबाबा और दूसरी कंपनियों के साथ किस हद तक सख्ती कर सकती है, इसको लेकर निवेशकों की राय अलग अलग है। सरकार एकाधिकार से जुड़े मामलों में कितनी सख्ती कर सकती है और अभी ऐसा क्यों कर रही है, इसके बारे में पॉलिटिकल लीडर्स कुछ खास नहीं कह रहे हैं। एंट को चीन के केंद्रीय बैंक सहित दूसरे रेगुलेटर दुनिया की सबसे बड़ी ऑनलाइन फाइनेंशियल कंपनी के लिए खतरा साबित हो सकने वाले सख्त वित्तीय कानूनों पर होने वाली बैठक में अलग से बुलाने जा रहे हैं।

चीन के इंटरनेट इकोसिस्टम में अलीबाबा और टेनसेंट का दबदबा

लंबे समय तक गूगल और फेसबुक के कॉम्पिटिशन से बचे रहे चीन के इंटरनेट इकोसिस्टम में दो दिग्गजों- अलीबाबा और टेनसेंट का दबदबा है। इन दोनों दिग्गजों ने देश में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से लेकर डिजिटल फाइनेंस तक के ज्यादातर स्टार्टअप में निवेश किया गया हुआ है। इनके सपोर्ट से मेतुआन और दीदी चूशिंग जैसी दिग्गज फूड और ट्रैवल कंपनियों का कारोबार अरबों डॉलर का हो गया है जबकि इसके प्रभाव क्षेत्र से बाहर पनपने वाली टिकटॉक की बाइटडांस जैसी कंपनियां कम रही हैं। एकाधिकार विरोधी कानून लागू होने पर दिग्गजों के सामने कई तरह की स्थितियां बन सकती हैं जिसमें उन पर जुर्माना लगाने से लेकर उनको टुकड़ों में बांटना शामिल हो सकता है। इस मामले में कई सरकारी एजेंसियों का मिलकर काम करना इंटरनेट सेक्टर के लिए बुरा संकेत माना जा रहा है।

एकाधिकार के खिलाफ कदम उठाना सरकार की पहली प्राथमिकता

अलीबाबा और सेक्टर की दूसरी कंपनियों पर सरकार का चाबुक नवंबर में तब चला जब जैक ने एक पब्लिक प्लेटफॉर्म से चीनी रेगुलेटरों के समय से पीछे रहने की बात कही। उसके तुरंत बाद रेगुलेटर्स ने ऐंट के 35 अरब डॉलर के आईपीओ को सस्पेंड कर दिया और एंटी मोनोपॉली रेगुलेटर ने मसौदा कानून बनाकर बाजार में हड़कंप मचा दिया। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के मुख पत्र पीपल्स डेली ने गुरुवार को कहा कि देश में कथित एकाधिकार के खिलाफ कदम उठाना सरकार की पहली प्राथमिकता है।