कॉरपोरेट को राहत:सरकार ने इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड को 31 मार्च 2021 तक के लिए स्थगित किया, नए दिवालिया आवेदन नहीं हो सकेंगे

नई दिल्ली10 महीने पहले
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कारोबारों को राहत देने के लिए सरकार ने डिफॉल्ट की न्यूनतम सीमा को भी बढ़ाकर 1 करोड़ रुपए कर दिया था।  - Dainik Bhaskar
कारोबारों को राहत देने के लिए सरकार ने डिफॉल्ट की न्यूनतम सीमा को भी बढ़ाकर 1 करोड़ रुपए कर दिया था। 
  • कॉरपोरेट को कोविड-19 के तनाव से राहत देने के लिए स्थगित किया कानून
  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दी जानकारी, जल्द जारी होगा नोटिफिकेशन

केंद्र सरकार ने कॉरपोरेट जगत को राहत देते हुए इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) को चालू वित्त वर्ष के शेष महीनों यानी 31 मार्च 2021 तक के लिए स्थगित कर दिया है। अब इस अवधि में नए कॉरपोरेट दिवालिया आवेदन नहीं किए जा सकेंगे। सरकार ने IBC को इस साल 25 मार्च से 6 महीने के लिए स्थगित किया था।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने की घोषणा

सोमवार को बेंगलुरु चैंबर ऑफ इंडस्ट्री एंड कॉमर्स के एक कार्यक्रम में बोलते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार ने IBC को पूरे 1 साल के स्थगित करने का फैसला कर लिया है। उन्होंने कहा कि महामारी के दौरान कंपनियों का तनाव करने के लिए सरकार ने विभिन्न टाइमलाइन को बढ़ाया है। साथ ही अनुपालन आवश्यकताओं को आसान बनाया है। जल्द ही आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया जाएगा।

कारोबारों को बचाने के लिए किया गया था स्थगित

कोरोनाकाल में कारोबारों को बचाने के लिए सरकार ने इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड को स्थगित करने का फैसला किया था। शुरुआत में एक अध्यादेश के जरिए 6 महीनों के IBC को स्थगित किया था। बाद में इसकी अवधि 3 और महीनों के लिए बढ़ा दी थी। यह अवधि 24 दिसंबर को समाप्त होने जा रही थी।कारोबारों को राहत देने के लिए सरकार ने डिफॉल्ट की न्यूनतम सीमा को भी बढ़ाकर 1 करोड़ रुपए कर दिया था।

इन तीन धारों को किया गया है निलंबित

कंपनियों को दिवालिया प्रक्रिया से बचाने के लिए सरकार ने IBC की तीन धाराओं 7, 9 और 10 को निलंबित किया है। इन तीनों धाराओं के जरिए कर्जदाताओं को यह अधिकार दिया गया है कि वे कर्ज का भुगतान करने में असफल रहने वाली कंपनियों (डिफॉल्टर्स) के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में जा सकते हैं।

  • धारा 7 : यह धारा वित्तीय कर्जदाताओं (फाइनेंस उपलब्ध कराने वाले संस्थान) को डिफॉल्टर्स के खिलाफ कॉरपोरेट इन्सॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस शुरू करने का अधिकार देता है।
  • धारा 9 : यह धारा संचालन कर्जदाताओं (आपूर्तिकर्ता कंपनियों) को डिफॉल्टर्स के खिलाफ इन्सॉल्वेंसी प्रक्रिया शुरू करने के लिए आवेदन करने का अधिकार देता है।
  • धारा 10 : यह धारा डिफॉल्ट करने वाली कंपनी (कॉरपोरेट डेटर) को कॉरपोरेट इन्सॉल्वंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस में प्रवेश करने के लिए आवेदन करने का अधिकार देता है।