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ऑयल PSU दे सकती हैं बड़ा डिविडेंड:​​​​​​​कम कैपेक्स वाली सरकारी तेल कंपनियों पर ज्यादा डिविडेंड देने का दबाव बना सकती है सरकार

नई दिल्ली6 महीने पहले
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महामारी से पिटी अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने PSU से कहा था कि वे कम से कम 75% कैपेक्स दिसंबर अंत तक और 100% से ज्यादा मार्च तक पूरा करें - Dainik Bhaskar
महामारी से पिटी अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने PSU से कहा था कि वे कम से कम 75% कैपेक्स दिसंबर अंत तक और 100% से ज्यादा मार्च तक पूरा करें
  • नवंबर तक सभी ऑयल PSU का कुल कैपेक्स 46,303 करोड़ रुपए था
  • यह 98,522 करोड़ रुपए के सालाना टार्गेट से 50% से भी कम है

सरकारी तेल कंपनियों (ऑयल PSU) को इस साल बड़ा अतिरिक्त डिविडेंड देना पड़ सकता है, क्योंकि इस सेक्टर की तकरीबन सभी कंपनियां इस कारोबारी साल के कैपेक्स प्लान से काफी पीछे चल रही हैं। नवंबर तक सभी ऑयल PSU का कुल कैपेक्स 46,303 करोड़ रुपए था। यह 98,522 करोड़ रुपए के सालाना टार्गेट से 50 फीसदी से भी कम है।

सरकार ने इन कंपनियों को दिसंबर तिमाही के अंत तक कम से कम 75 फीसदी कैपेक्स पूरा करने के लिए कहा है। लेकिन यह संभव नहीं दिख रहा, इसलिए इन कंपनियों को ज्यादा डिविडेंड देना पड़ सकता है। महामारी से पिटी अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने PSU द्वारा निवेश बढ़ाने पर जोर दिया था। उन्होंने कंपनियों से कहा था कि वे कम से कम 75 फीसदी कैपेक्स दिसंबर अंत तक और 100 फीसदी से ज्यादा मार्च तक पूरा करें।

कंपनियों को कैपेक्स या डिविडेंड के रूप में ज्यादा खर्च करना ही पड़ेगा

एक PSU के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कंपनियों को या तो कैपेक्स के रूप में या एडीशनल डिविडेंड के रूप में ज्यादा खर्च करना ही है। वित्तीय व प्रोजेक्ट इंप्लीमेंटेशन बाधाओं के कारण कंपनियां कैपेक्स योजना को पूरा नहीं कर पा रही हैं। कोरोना महामारी के कारण मांग घट गई है और प्रोजेक्ट इंप्लीमेंटेशन धीमा हो गया है। इसके कारण कंपनियों के संसाधन पर पहले से दबाव है। अब अतिरिक्त लाभांश का भुगतान करने से यह दबाव और बढ़ जाएगा।

अन्य PSU के मुकाबले ऑयल PSU की हालत ज्यादा खराब

तकरीबन सभी सरकारी कंपनियों को निवेश बढ़ाने में मुश्किल हो रही है, लेकिन तेल सेक्टर कंपनियों की हालत ज्यादा खराब है। नवंबर से मांग बढ़ी है, लेकिन स्थिति अब भी सामान्य से काफी पीछे है। सरकार समझ रही है कि क्रूड की कीमत बढ़ने से कुछ कंपनियों को बड़ा इन्वेंटरी गेन होने वाला है। इसलिए सरकार उन कंपनियों से ज्यादा अंतरिम या विशेष लाभांश मांग सकती है। कुछ कंपनियों को शेयर बायबैक करने के लिए भी कहा जा सकता है।

ऑयल सेक्टर में सबसे खराब प्रदर्शन ONGC और IOC का

ऑयल सेक्टर में सबसे खराब प्रदर्शन ONGC और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन का है। पेट्रोलियम मंत्रालय के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के मुताबिक ONGC ने नवंबर तक 14,959 करोड़ रुपए का कैपेक्स पूरा किया है। जबकि इस कारोबारी साल के लिए उसका कैपेक्स टार्गेट 32,502 करोड़ रुपए था। IOC का कैपेक्स नवंबर तक 12,104 करोड़ रुपए है, जबकि उसका सालाना टार्गेट 26,233 करोड़ रुपए का है।

ऑयल PSU का कैपेक्स परफॉर्मेंस

प्रमुख ऑयल PSUनवंबर तक का कैपेक्स (करोड़ रुपए में)सालाना टार्गेट (करोड़ रुपए में)
OnGC14,95932,502
IOC12,10426,233
HPCL5,65811,500
गेल इंडिया2,6145,412
ऑयल इंडिया2,1363,877
MRPL6311,150
OVL3,7657,235

BPCL

3,7169,000

जनवरी अंत या फरवरी के शुरू में लाभांश पर फैसला ले सकती है सरकार

अधिकारी ने कहा कि तीसरी तिमाही का फाइनेंशियल रिजल्ट आने के बाद जनवरी के आखिर में या फरवरी के शुरू में लाभांश पर फैसला किया जा सकता है। सरकार ने बजट में इस कारोबारी साल के लिए नॉन-फाइनेंशियल कंपनियों से 65,747 करोड़ रुपए का लाभांश मिलने का अनुमान रखा है। इसमें बढ़ोतरी होने से सरकर का नॉन-टैक्स रेवेन्यू बढ़ेगा। इससे सरकार को वित्तीय घाटा कम करने में मदद मिलेगी। प्रारंभिक अनुमानों के मुताबिक कारोनावायरस महामारी के कारण सरकार को वित्तीय घाटा GDP के 8 फीसदी से ज्यादा रह सकता है।

CPSE को PAT का कम से कम 30% या नेटवर्थ का 5% लाभांश देना पड़ता है

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, उनके पूर्ववर्ती अरुण जेटली और पी चिदंबरम इस नीति पर चलते रहे हैं कि नॉन-फाइनेंशियल सरकारी कंपनियां यदि अपने कैश रिजर्व का इस्तेमाल कैपेक्स में नहीं करती हैं, तो उन्हें लाभांश या शेयर बायबैक के जरिये कैश को सरकार को दे देना चाहिए। विनिवेश विभाग DIPAM के दिशानिर्देशों के मुताबिक हर CPSE को अपने PAT का कम से कम 30 फीसदी या नेटवर्थ का 5 फीसदी, जो भी ज्यादा हो लाभांश देना चाहिए।