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एसेट चमकाने की तैयारी:पब्लिक सेक्टर की कंपनियों को बेचने से पहले उनका फाइनेंशियल परफॉर्मेंस चमकाएगी सरकार

2 महीने पहले
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  • मोदी सरकार की मंशा यह है कि पब्लिक सेक्टर की कंपनियां 2021-22 से मार्केट कैपिटलाइजेशन और डिविडेंड पेमेंट बढ़ाने की कोशिश करें
  • सरकार यह भी चाहती है कि उसकी कंपनियां वित्त वर्ष 2021-22 से अपने अहम कारोबार के लिए गैरजरूरी संपत्तियों की बिक्री तेज कर दें

सरकार ने पब्लिक सेक्टर की कंपनियों (PSU) के लिए फाइनेंशियल टारगेट बढ़ाने की योजना बनाई है। वह चाहती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से कुछ कंपनियों के निजीकरण को बढ़ावा दिए जाने से पहले उनका वैल्यूएशन बढ़ाया जाए। सरकार की योजना का पता सरकारी दस्तावेजों और सूत्रों से चला है।

2021-22 से MCap और डिविडेंड पेमेंट बढ़ाने की कोशिश करेंगी PSU

अपने खर्च के मुकाबले आमदनी में बनी कमी दूर करने में जुटी सरकार चाहती है कि पब्लिक सेक्टर की कंपनियां 2021-22 से अपना मार्केट कैपिटलाइजेशन और डिविडेंड पेमेंट बढ़ाने की कोशिश करें। सरकार यह भी चाहती है कि ये कंपनियां अप्रैल 2021 से शुरू होनेवाले नए फाइनेंशियल ईयर से अपने नॉन कोर एसेट यानी मुख्य कारोबार के लिए गैरजरूरी संपत्तियों की बिक्री तेज कर दें।

परंपरागत रूप से उत्पादन और आमदनी में इजाफा करने पर रहा है PSU का ध्यान

पब्लिक सेक्टर की कंपनियों का ध्यान परंपरागत रूप से अपनी कार्यकुशलता और मूल्यांकन बढ़ाने के बजाय उत्पादन और आमदनी में इजाफा करने पर रहा है जिसके चलते बरसों से उनके शेयरों का भाव स्टॉक मार्केट के मेन इंडेक्स के मुकाबले कमतर रहा है। पब्लिक सेक्टर की कंपनियों के एनुअल टारगेट का एलान बजट 2021-22 में किया जा सकता है।

मूल्यांकन और ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाने की क्षमता बढ़ाने की जरूरत

सरकार की योजना की जानकारी रखने वाले सूत्र ने कहा, ‘कंपनियों को बदलते माहौल में अपना मूल्यांकन और ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाने की क्षमता बढ़ाने की जरूरत है। तभी सरकार को उन कंपनियों में अपने शेयर बेचने पर बेहतर दाम मिल पाएगा। शेयरधारकों और निवेशकों को उनके योगदान का फल मिलना चाहिए।’

निजीकरण से 5 साल में 3.25 लाख करोड़ रुपये जुटाने की योजना

मोदी सरकार ने 2019 में सत्ता पर दोबारा काबिज होने के बाद ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC), इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), एनएमडीसी (NMDC), कोल इंडिया, भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स (BHEL) और बीईएमएल सहित पब्लिक सेक्टर की कई कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचकर 5 साल में 3.25 लाख करोड़ रुपये जुटाने की योजना बनाई। उसने इकनॉमी के लिहाज से नॉन स्ट्रैटेजिक सेक्टर की कंपनियों को निजी हाथों में देने के कदमों के एलान किए। वह भारत पेट्रोलियम (BPCL), कंटेनर कॉर्प और शिपिंग कॉर्प के निजीकरण के कदम पहले ही उठा चुकी है।

इबिट्डा जैसा मानक PSU के एनुअल टारगेट में होगा पहली बार

कई मंत्रालयों के अधिकारियों और कैबिनेट सेक्रेटरी वाली कमेटी के पास मंजूरी के लिए गई ड्राफ्ट गाइडलाइंस और सूत्रों के मुताबिक सरकार पहली बार पब्लिक सेक्टर की कंपनियों के एनुअल टारगेट में इबिट्डा जैसे मानकों को शामिल करेगी। उन्होंने बताया कि सरकारी कंपनियों के दूसरे टारगेट में मार्केट कैपिटलाइजेशन या शेयर प्राइस और रिटर्न ऑन नेटवर्थ और रिटर्न ऑन कैपिटल एंप्लायड जैसे मानक भी शामिल होंगे।

संपत्तियों की बिक्री से हासिल रकम कर्ज चुकाने में खर्च करेंगी PSU

सूत्र ने कहा, ‘सरकारी कंपनियों को अपनी संपत्तियों की बिक्री से हासिल रकम को कर्ज चुकाने जैसे कामों में खर्च करने की जरूरत होगी। उन्हें अपना रिटर्न ऑन कैपिटल एंप्लॉयड और रिटर्न ऑन इक्विटी बढ़ाना होगा।’ सरकारी दस्तावेज के मुताबिक अनलिस्टेड कंपनियों के प्रदर्शन को उनके ईपीएस यानी प्रति शेयर मुनाफे में सुधार के मानक पर कसा जाएगा। सरकारी कंपनियों के मैनेजरों का बोनस और इनसेंटिव उनकी तरफ से हासिल एनुअल टारगेट निर्भर करेगा। सूत्र ने बताया कि एनुअल टारगेट पॉलिसी में बदलाव के सुझाव डिपार्टमेंट ऑफ इनवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) ने दिए हैं।

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