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बिजली संकट से सबक:एक महीने के ईंधन का रणनीति भंडार बनाने पर विचार, कोल पावर प्लांट्स से मिलती है आधे से ज्यादा बिजली

एक महीने पहले
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हाल के जैसा बिजली संकट दोबारा पैदा न हो, इसके लिए सरकार गैस और आयातित कोयले का रणनीतिक भंडार बनाने पर काम कर रही है। यूनियन पावर सेक्रेटरी आलोक कुमार ने रूस की मिसाल देते हुए कहा कि जब भी ईंधन की दिक्कत होती है, सप्लायर यूरोपीय देशों को सप्लाई रोक कर अपनी जरूरत पहले पूरी करते हैं।

गैस और आयातित कोयले का रणनीतिक भंडार बनाने पर विचार जरूरी

उद्योग चैंबर CII के आयोजित साउथ एशिया पावर समिट में कुमार ने कहा, 'हमें गैस और आयातित कोयले का रणनीतिक भंडार बनाने पर सोच-विचार करना शुरू कर देना चाहिए। ऐसा होने पर महीनेभर तक फ्यूल सप्लाई नहीं मिलने पर भी बिजली पैदा की जाती रहेगी।'

19 अक्टूबर को 61 प्लांट के पास चार दिन से कम का कोयला था

थर्मल पावर प्लांट में कोयले की कमी अब तक दूर नहीं हुई है। 19 अक्टूबर को 61 जबकि 18 अक्टूबर को 58 नॉन पिट हेड पावर प्लांट (कोयले की खान से दूर) के पास चार दिन से कम का कोयला बचा था। इसका पता कोयला भंडार से जुड़े सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (CEA) के ताजा डेटा से चला है।

पिछले हफ्ते 65 पावर प्लांट के पास सुपर क्रिटिकल स्टॉक था

CEA के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले हफ्ते 65 पावर प्लांट के पास कोयले का सुपर क्रिटिकल स्टॉक (चार दिन का भंडार) रह गया था। कोयले के भंडार में धीरे धीरे बढ़ोतरी तो हुई है, लेकिन थर्मल पावर प्लांट्स के सामने संकट बना हुआ है।

थर्मल प्लांट की सप्लाई 22 लाख टन रोजाना तक ले जाई जाएगी

केंद्रीय कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी ने हाल ही में कहा था कि थर्मल पावर प्लांट को कोयले की सप्लाई को बढ़ाकर 22 लाख टन रोजाना तक ले जाया जाएगा। इससे साल खत्म होने तक कोयले का भंडार एक करोड़ टन तक पहुंच जाएगा जो अभी लगभग 75 लाख टन है।

कोयले से चलने वाले पावर प्लांट्स से मिलती है आधे से ज्यादा बिजली

कोयले की कमी ने बिजली संकट को लेकर चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल देश में कुल 202.22 गीगावॉट (GW) बिजली का उत्पादन कोयले से चलने वाले पावर प्लांट्स में होता है। देश में पैदा होने वाली कुल बिजली के आधे से ज्यादा योगदान इन पावर प्लांट्स का है।

रोजाना 18.5-18.7 लाख टन कोयला जलता है थर्मल पावर प्लांट में

कोल थर्मल पावर प्लांट में रोजाना 18.5-18.7 लाख टन कोयला जलता है। इसका स्टॉक बढ़ाकर तीन लाख टन रोजाना तक ले जाने का प्लान है। इससे अगले 10 दिनों में 30 लाख टन से ज्यादा कोयले का स्टॉक बनेगा। देश में कोयला संकट तब पैदा हुआ है जब बिजली उपभोक्ताओं और उनकी मांग में उछाल आई है। मॉनसून से पहले पावर प्रोजेक्ट्स के पास पर्याप्त भंडार नहीं था। सितंबर में मूसलाधार बारिश के चलते कोयले के उत्पादन और उसकी सप्लाई में कमी आई।

बिजली की खपत 4 अरब यूनिट से ज्यादा, कोयले की खपत में 18% का उछाल

देश में बिजली की खपत 4 अरब यूनिट रोजाना से ज्यादा हो गई है। इसके चलते अगस्त-सितंबर में कोयले की खपत में 2019 के मुकाबले 18% का उछाल आया। भारत में कोयले का चौथा सबसे बड़ा भंडार है और यह दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। कोल इंडिया ने इस वित्त वर्ष 66 करोड़ टन कोयले का उत्पादन करने लक्ष्य तय किया है जबकि खानों से 74 करोड़ टन सप्लाई रहने का अनुमान है।

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