• Hindi News
  • Business
  • Hallmarking On Gold Jewellery, Hallmarking, Gold Jewellery, Gold, Now Only Hallmarking Gold Jewelery Can Be Sold By Jewelers, Know Here What Will Happen To Your Old Jewelery

राहत:अभी सिर्फ 256 जिलों में ही लागू होगी गोल्ड हॉलमार्किंग, 40 लाख तक टर्नओवर वाले ज्वेलर को हाॅलमार्क वाली ज्वेलरी बेचने से छूट

नई दिल्लीएक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

गोल्ड हॉलमार्किंग के नियम फिलहाल पूरे देश में एक साथ लागू नहीं होंगे। ज्वेलर्स ने सरकार से कहा है कि वो अभी इसे पूरी तरह से लागू करने के लिए तैयार नहीं है। इसी के चलते वाणिज्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्री पीयूष गोयल के साथ ज्वेलर्स की मंगलवार शाम एक बैठक हुई। बैठक में कई अहम फैसले हुए हैं। जिसमें ये तय हुआ कि इसे एक साथ लागू नहीं करके कई चरणों में लागू किया जाएगा।

देश में बिना रजिस्ट्रेशन वालों की संख्या ज्यादा
पीयूष गोयल ने बैठक में ऐलान किया कि पहले चरण में 16 जून से देश के 256 जिलों में ही हॉलमार्किंग को अनिवार्य किया जाएगा। जहां पर हॉलमार्किंग सेंटर्स पहले से मौजूद हैं। हालांकि 40 लाख रुपए तक टर्नओवर वाले ज्वेलर को हाॅलमार्क वाली ज्वेलरी बेचने से छूट रहेगी। देश में ऐसे ज्वेलरों की तादाद काफी थी, जिन्होंने बीआईएस का सर्टिफिकेशन नहीं लिया था। इतने लोगों पर सरकार कार्रवाई नहीं कर सकती थी। इसीलिए सरकार ने बीच का रास्ता निकाला है।

सरकार ने नवंबर 2019 में गोल्ड ज्वैलरी और डिजाइन के लिए हॉलमार्किंग अनिवार्य किया था। इसके लिए देश के सभी ज्वैलर्स को हॉलमार्किंग पर शिफ्ट होने और ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए 1 साल से ज्यादा का समय दिया था। बाद में ज्वैलर्स ने इस डेडलाइन को बढ़ाने की मांग की थी। इसे देखते हुए डेडलाइन को 15 जनवरी, 1 जून और बाद में 15 जून किया गया था।

1 सितंबर से सभी पर लागू होंगे नए नियम
सभी ज्वेलरी ट्रेडर्स को अपने पास पड़े पुराने स्टॉक पर हॉलमार्किंग के लिए सरकार ने 1 सितंबर तक का वक्त दिया है। तब तक उन्हें पुराने स्टॉक पर हॉलमार्किंग करवानी होगी। इस दौरान किसी भी व्यापारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

सबसे पहले समझें हॉलमार्किंग क्या है?
हॉलमार्क सरकारी गारंटी होती है। हॉलमार्क भारत की एकमात्र एजेंसी ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) देती है। हॉलमार्किंग में किसी प्रोडक्ट को तय मापदंडों पर प्रमाणित किया जाता है। बीआईएस वह संस्था है, जो ग्राहकों को उपलब्ध कराए जा रहे सोने की जांच करती है। सोने के सिक्के या गहने पर हॉलमार्क के साथ BIS का लोगो लगाना जरूरी है। इससे पता चलता है कि BIS की लाइसेंस वाली लैब में इसकी शुद्धता की जांच की गई है।

अगर आपके पास बिना हॉलमार्किंग वाला सोना है तो उसका क्या होगा?
15 जून 2021 के बाद भी बिना हॉलमार्किंग वाला सोना एक्सचेंज किया जा सकेगा। इसके अलावा अगर आप चाहें तो अपने ज्वैलर के जरिए अपने सोने की हॉलमार्किंग करा सकते हैं। मामले के जानकार संजय मंडोत के मुताबिक BIS 5 साल की लाइसेंस फीस 11,250 रुपए लेकर ज्वैलर्स को यह लाइसेंस देती है। फिर ज्वैलर्स हॉलमार्क सेंटर पर ज्वैलरी की जांच करवाकर कैरेट के हिसाब से हॉलमार्क जारी करवाता है।

आम आदमी पुरानी ज्वैलरी पर सीधे सेंटर जाकर हॉलमार्क नहीं लगवा सकता। उन्हें संबंधित ज्वैलर के जरिए ही आना होगा। हालांकि वह सेंटर पर सोने की शुद्धता की जांच न्यूनतम राशि देकर करवा सकता है।

BIS से इस तरह होगी गोल्ड हॉलमार्किंग
2 ग्राम से अधिक ज्वैलरी को BIS से मान्यता प्राप्त सेंटर से जांच करवाकर उस पर संबंधित कैरेट का बीआईएस मार्क लगवाना होगा। ज्वैलरी पर बीआईएस का तिकोना निशान, हॉलमार्किंग केंद्र का लोगो, सोने की शुद्धता लिखी होगी। साथ ही ज्वैलरी कब बनाई गई, इसका साल और ज्वैलर का लोगो भी रहेगा।

40 लाख से कम टर्नओवर पर छूट

  • रजिस्ट्रेशन फीस पूर्ण रूप से समाप्त।
  • सालाना 40 लाख रु. तक का टर्नओवर करने वाले ज्वैलर्स काे रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं हाेगी।
  • 14, 18, 20, 22, 23 और 24 कैरेट साेने की ज्वैलरी पर हाॅलमार्किंग हाे सकेगी।
  • पोल्की, मीना, कुंदन और जड़ाऊ ज्वैलरी को हॉलमार्किंग के दायरे से बाहर रखा गया है।
  • मैन्युफैक्चर को लाइसेंस के दायरे में लाया गया है।
  • रिटेलर अपने बैच नंबर पर मैन्युफैक्चर से ज्वैलरी बनवा सकेगा।
  • ज्वैलर्स ग्राहकों से बिना हॉलमार्क वाली ज्वैलरी काे वापस खरीद सकेंगे।