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काम की बात:इंश्योरेंस से जुड़ी धोखाधड़ी से बचने के लिए की फीचर्स डॉक्यूमेंट को ठीक से समझने सहित इन 5 बातों का रखें ध्यान

नई दिल्ली10 महीने पहले
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वैश्विक महामारी के बाद लाइफ इंश्योरेंस की मांग काफी बढ़ गई है। हालांकि मार्केट में दर्जनों लाइफ इंश्योरेंस कंपनियां और सैकड़ों प्रोडक्ट मौजूद हैं, जिनकी वजह से यह तय करना मुश्किल होता है कि कौन सा इंश्योरेंस आपके लिए सही है। अक्सर लोग बीमा संबंधी धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं।

यहां फ्यूचर जनराली इंडिया लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के चीफ डिस्ट्रीब्यूशन ऑफिसर सुभाशीष आचार्य आपको कुछ सुझाव दे रहे हैं, जिन्हें अपनाकर आप अपने लिए या परिवार के लिए सबसे उपयुक्त लाइफ इंश्योरेंस प्रोडक्ट चुन सकते हैं। साथ ही घोटाले या एजेंटों की ओवर-सेलिंग और मिस-सेलिंग का शिकार होने से भी बच सकते हैं।

की फीचर्स डॉक्यूमेंट जरूर पढ़ें
आमतौर पर उपभोक्ता इंश्योरेंस खरीदने से पहले उसके की-फीचर्स डॉक्यूमेंट्स (केएफडी) नहीं पढ़ते हैं। यह बड़ी गलती है। लाइफ इंश्योरेंस के सभी प्रोडक्ट्स के साथ पॉलिसी जारी होने की तारीख से 15 दिनों तक के लिए फ्री-लुक अवधि होती है।

पॉलिसीधारक को यदि लगता है कि इंश्योरेंस उनकी ज़रूरतों के लिए उपयुक्त नहीं है या उन्हें केएफडी में उल्लिखित वादों से अलग बातें कह कर बेचा गया था तो वे 15 दिनों के भीतर खरीदी गई पॉलिसी को निरस्त करने का विकल्प चुन सकते हैं। निरस्तीकरण आवेदन की प्रोसेसिंग के बाद चुकाया गया प्रीमियम वापस कर दिया जाता है और वैधानिक कटौतियों के बाद बाकी रकम रजिस्टर्ड बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर कर दी जाती है।

प्रलोभन वाले कॉल्स को नजर अंदाज करें
आपका डेटा कई इंश्योरेंस एजेंट्स या दुर्भावनापूर्ण कंपनियों की पहुंच में हो सकता है। ऐसे लोग आपका मौजूदा इंश्योरेंस जरूरत से कम होने का हवाला देकर आपसे अपनी पॉलिसी को अपग्रेड करने या बदलने का अनुरोध कर सकते हैं। यदि आपने पॉलिसी खरीदने के पहले उचित छानबीन और रिसर्च की है तो बस समय पर प्रीमियम का भुगतान करते रहना ही आपके हित में है।

परिवार के निकट सदस्यों को हमेशा सूचित रखें
परिवार के सदस्यों को आपके द्वारा खरीदी गई लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसियों के बारे में पूरी जानकारी रहनी चाहिए, ताकि आपके नहीं रहने पर वे इनका लाभ उठा सकें। पॉलिसी दस्तावेज को डिजिटल और कागजी, दोनों रूप में स्टोर कर लें ताकि जरूरत के समय इन्हें आसानी से प्राप्त किया जा सके। मृत्यु की स्थिति में बीमा से प्राप्त रकम का कैसे उपयोग करना है, इसके विषय में भी परिवार के सदस्यों को विस्तार से बता देना चाहिए, ताकि वे पैसों का बुद्धिमानी से उपयोग कर सकें।

अपनी बीमा पॉलिसी और इसे जारी करने वाले बीमाकर्ता के सम्बन्ध में ताजा जानकारी रखना हमेशा फायदेमंद होता है। प्रमाणित सलाहकारों पर यकीन करना बेहतर है। सतर्क रहकर ही धोखेबाज और दुर्भावनापूर्ण लोगों की कोशिशों को नाकाम कर सकते हैं।

लाइफ इंश्योरेंस की जरूरत को समझें
इंश्योरेंस खरीदने से पहले इस बात की स्पष्ट समझ होनी चाहिए कि आप पॉलिसी क्यों खरीद रहे हैं और इसके कवर और कवर की अवधि को अच्छी तरह सोच-समझ कर तय करना चाहिए। अधिकांश लोग प्रीमियम बचाने के इरादे से अपेक्षाकृत कम अवधि के लिए या अपर्याप्त कवर और सम इंश्योर्ड के साथ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीद लेते हैं।

किसी व्यक्ति को कितने मूल्य के लाइफ इंश्योरेंस की जरूरत है इसकी गणना इस आधार पर की जाती है कि उसके परिवार की वर्तमान जीवनशैली के खर्च क्या हैं और भविष्य में उनमें कितनी बढ़ोतरी हो सकती है। इसका सामान्य नियम यह है कि बीमित राशि आपकी सालाना आय का कम-से-कम 20 गुना होनी चाहिए। हालांकि इस संबंध में किसी भरोसेमंद पेशेवर की सलाह लेना सबसे बढ़िया तरीका है।

सही लाइफ इंश्योरेंस प्रोडक्ट का चुनाव
मार्केट में उपलब्ध कौन सा प्लान आपके अनुकूल है इसको समझना जरूरी है। आम तौर पर टर्म इंश्योरेंस, परम्परागत प्लान और यूनिट लिंक्ड बीमा प्लान (यूलिप्स) की बिक्री सबसे अधिक होती है। टर्म इंश्योरेंस विशुद्ध सुरक्षा के लिए होता है और इसे यदि जल्दी यानी कम उम्र में ले लिया जाए तो सबसे कम प्रीमियम लगता है। चाहें तो गंभीर बीमारी कवरेज, दुर्घटनाजनित मृत्यु लाभ या पॉलिसी मैच्योर होने पर उत्तरजीविता लाभ के लिए अतिरिक्त राइडर भी चुन सकते हैं।

वहीं परम्परागत योजनाएं या तो बोनस के बगैर गारंटीशुदा हो सकती हैं या फिर हर साल बोनस की घोषणा वाली हो सकती हैं। यूनिट लिंक्ड प्लान एक तरह से बीमा और निवेश का संयोजन होते हैं, लेकिन इनके विषय में सावधानीपूर्वक विचार करने की जरूरत है, क्योंकि इनका रिटर्न सुनिश्चित नहीं होता।