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कोरोना का असर:आपकी बचत हुई कम, बेरोजगारी बना बड़ा कारण, अब क्या सरकारी योजनाएं बढ़ा पाएंगी रोजगार?

नई दिल्ली4 महीने पहले
  • अप्रैल-जून तिमाही में 21% पर पहुंच गई थी पारिवारिक बचत
  • परिवार के लिए लिया जाने वाले कर्ज भी जीडीपी का 37.1% हुआ

एक कहावत है....पैसा बचाना उसे कमाने के बराबर है। लेकिन कोरोना काल में आप लोगों ने बचत यानी सेविंग करनी कम कर दी है। ये हम नहीं कह रहे बैंकों के बैंक, रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा डाटा बोल रहे हैं। डाटा बता रहे हैं कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही यानी जुलाई-सितंबर तिमाही में पारिवारिक बचत गिरकर जीडीपी का 10.4% रह गई थी। अर्थशास्त्रियों की मानें तो इसका बड़ा कारण बढ़ती बेरोजगारी भी है। बेरोजगारी बढ़ने से लोगों ने अपने बचाए हुए पैसे जरूरतों पर खर्च कर दिए। लॉकडाउन के दौरान चालू वित्त वर्ष के पहले तीन महीनों में देश में सबसे ज्यादा बेरोजगारी रही।

क्या कहते हैं बचत के आंकड़े?

सबसे पहले हम आपको बचत में कमी के आंकड़ों के बारे में बताते हैं। RBI के डाटा के मुताबिक, वित्त वर्ष 2021 की पहली तिमाही में देश में हाउसहोल्ड या पारिवारिक बचत जीडीपी का 21% तक पहुंच गई थी। लेकिन दूसरी तिमाही में यह गिरकर 10.4% रह गई थी। इस प्रकार दूसरी तिमाही में पारिवारिक बचत में 10.6% की गिरावट रही। हालांकि, यह वित्त वर्ष 2020 की दूसरी तिमाही की 9.8% से ज्यादा रही है।

अर्थव्यवस्था और बचत का क्या है कनेक्शन?

अब आपके मन में यह सवाल आ रहा होगा कि अर्थव्यवस्था और बचत का क्या कनेक्शन है? RBI के अर्थशास्त्रियों का कहना है कि सामान्य तौर पर जब कोई अर्थव्यवस्था गिरती है तो पारिवारिक बचत बढ़ती है। वहीं, जब अर्थव्यवस्था में रिकवरी होती है तो बचत में गिरावट होती है। इसका कारण यह है कि रिकवरी के समय लोग ज्यादा भरोसे के साथ खर्च करते हैं। हमारे यहां भी कुछ ऐसा ही हुआ है। पहली तिमाही में जब अर्थव्यवस्था में 24.4% की गिरावट थी, तब बचत 21% पर पहुंच गई थी। जबकि अर्थव्यवस्था में गिरावट सुधरकर 7.3% रह गई थी, तब बचत गिरकर 10.4% पर आ गई।

किस-किस प्रकार की बचत में कमी आई?

अब हम आपको बताते हैं कि दूसरी तिमाही में किस-किस प्रकार की बचत में कमी आई है। RBI के डाटा के मुताबिक, दूसरी तिमाही में नकद बचत जीडीपी का सिर्फ 0.4% रह गई थी, जबकि पहली तिमाही में यह 5.3% थी। पहली तिमाही की 1.7% के मुकाबले दूसरी तिमाही में म्यूचुअल फंड बचत 0.3% पर आ गई थी। हालांकि, इंश्योरेंस के रूप में की जाने वाली बचत में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ और यह पहली तिमाही की 3.2% के मुकाबले 3% रही।

किन कारणों से बचत में कमी आई?

  • कोविड-19 महामारी के कारण करोड़ों लोगों की नौकरियां चली गईं।
  • करोड़ों लोगों को सैलरी में बड़ी कटौती का सामना करना पड़ा।
  • आय कम होने के कारण अधिकांश लोग कर्ज लेने के लिए मजबूर हुए।
  • जरूरी खर्चों से निपटने के लिए लोगों को बचत से पैसा निकालना पड़ा।

लॉकडाउन के दौरान रोजगार की स्थिति

लॉकडाउन का सबसे ज्यादा सामना करने वाले अप्रैल 2020 में देश में बेरोजगारी की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी। इस महीने बेरोजगारी की दर 23.52% रही थी। मई से देश में अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हुई। इससे आर्थिक गतिविधियां में थोड़ा सुधार हुआ था। इससे मई 2020 में बेरोजगारी दर मामूली सुधार के साथ 21.73% पर आ गई थी। जून में अधिकांश आर्थिक गतिविधियों की मंजूरी के कारण बेरोजगारी दर गिरकर 10.18% पर आ गई थी।

क्या कहते हैं अर्थशास्त्री?

वरिष्ठ अर्थशास्त्री बृंदा जागीरदार शाह का कहना है कि कोरोना के कारण होटल, एविएशन और ट्रैवल जैसे सर्विस सेक्टर बंद होने से बेरोजगारी बढ़ी है। यही कारण है कि देश में पारिवारिक बचत में गिरावट आई है। सरकार रोजगार बढ़ाने की दिशा में कई काम कर रही है। इसके लिए कई स्कीमें शुरू की गई हैं। हालांकि, इसका असर देर से दिखेगा और रोजगार पैदा करने में थोड़ा वक्त लग सकता है।

सरकारी विभागों में खाली पड़े पदों को भरे सरकार

बृंदा का कहना है कि चीन से जो इंडस्ट्री भारत शिफ्ट हुई है, उससे घरेलू उत्पादन बढ़ेगा। साथ ही आयात में कमी आएगी। सरकार की ओर दिए जा रहे क्रेडिट गारंटी लोन से देश में नए कारोबार शुरू होंगे। इससे रोजगार के साथ अन्य मोर्चों पर भी लाभ मिलेगा। इकोनॉमी में रिकवरी से लोगों का भरोसा बढ़ेगा और लोग नए-नए कारोबार शुरू करेंगे। सरकार को सरकारी विभागों में खाली पड़े पद भी भरने चाहिए, ताकि बेरोजगारों को रोजगार का मौका मिल सके।

दूसरी तिमाही में हाउसहोल्ड कर्ज जीडीपी का 37.1% पर पहुंचा

कोरोना के कारण लगाए गए लॉकडाउन के चलते हाउसहोल्ड कर्ज (घरेलू खर्च के लिए लिया जाने वाला कर्ज) में भारी बढ़ोतरी हुई है। RBI के डाटा के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही यानी जुलाई-सितंबर तिमाही में हाउसहोल्ड कर्ज जीडीपी का 37.1% पर पहुंच गया था। जबकि बचत केवल 10.4% रह गई थी। इस तिमाही में हाउसहोल्ड क्रेडिट मार्केट में 51.5% या पिछले साल के मुकाबले 130 आधार अंकों का उछाल दर्ज किया गया था।