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बिजनेस डेस्क. मूडी एनालिटिक्स की नई रिपोर्ट के मुताबिक कोरोनावायरस ने 2020 की वैश्विक विकास दर को प्रभावित किया है। अब इसकी वृद्धि दर 1.9 प्रतिशत तक धीमी होने की उम्मीद है। इससे पहले इसी महीने जारी किए गए ग्लोबल मैक्रो आउटलुक 2020-21 में मूडी ने वायरस के चलते दुनियाभर की अर्थव्यवस्था को 0.1 से 0.4 प्रतिशत तक धीमा बताया था।
मूडीज एनालिटिक्स के नए मूल्यांकन में कहा गया था कि ऐसी उम्मीद थी कि मिड-जनवरी में एक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर के बाद, 2020 में वैश्विक अर्थव्यवस्था मजबूत हो जाएगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। कोरोनोवायरस के चलते 2020 में प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से जीडीपी में गिरावट आ गई।

इस बारे में मूडीज की इकॉनोमिस्ट रिसर्च और एनालिस्ट कटरीना एल ने कहा है कि स्वास्थ्य से जुड़ी महामारी में रोकथाम के बाद गतिविधियों को मजबूती मिलती है। COVID-19 का प्रकोप अभी उस बिंदु तक नहीं पहुंचा है। आर्थिक टोल में भी वृद्धि हुई है। वैश्विक अर्थव्यवस्था का निर्धारण इस बात से तय होगा, कि कोरोनावायरस कितने समय तक रहता है। इसके संक्रमण से बढ़ते लोगों की संख्या को देखते हुए इसमें अभी वक्त लग सकता है। 15 जनवरी के बाद से व्यापार में निवेश करने का मौका नहीं मिला। COVID-19 दुनियाभर में चिंता का विषय बन गया। पहले ये वायरस सिर्फ चीन में था, वो अब दुनियाभर में फैल चुका है। इतना ही नहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन इसे महामारी घोषित करने पर भी मजबूर हो गया है।

बैंक ऑफ इंग्लैंड की बेंचमार्क दर में कमी
कोरोनावायरस के चलते फेडरल रिजर्व ने मार्च में 50 बेसिस प्वॉइंट की कमी के साथ चौंका दिया। अमेरिकी की राजस्व संबंधी प्रतिक्रिया भी सुस्त हो रही है। ये 2020 में अमेरिकी जीडीपी वृद्धि के 1.4 प्रतिशत पर पहुंचने की उम्मीद है। मूडी के मार्च बेसलाइन के अनुसार ये जनवरी में उम्मीद से 0.5 प्रतिशत कमजोर रही। कोरोनावायरस के चलते बैंक ऑफ इंग्लैंड की बेंचमार्क दर में 50 बेसिस प्वॉइंट की कमी आई है। ये आर्थिक टोल का एक और उदाहरण है।
तेल की सप्लाई-डिमांड को झटका
कोरोनावायरस के चलते तेल की डिमांड और सप्लाई दोनों को झटका लगा है। अमेरिका, यूरोप, जापान और ऑस्ट्रेलिया सहित लॉन्ग-टर्म बांड की पैदावार दुनियाभर में गिर रही है। मूडीज एनालिटिक्स ने कहा कि 10 साल की पैदावार में गिरावट से ये पता चलता है कि वैश्विक मंदी के साथ-साथ वैश्विक विकास में मंदी कैसे बढ़ी है।

इंडिगो पर छाए संकट के बादल
देश की सबसे बड़ी विमान सेवा कंपनी इंडिगो ने एक बयान में कहा कि जनवरी और फरवरी में कोरोनावायरस का उसकी वित्तीय स्थिति पर अपेक्षाकृत कम प्रभाव पड़ा था, लेकिन पिछले कुछ दिनों में टिकटों की बिक्री 15 से 20 प्रतिशत तक घट गई है। कोविड-19 की स्थिति के अनुसार इसमें आगे बदलाव की संभावना है। घरेलू मार्गों पर यात्रियों की संख्या के हिसाब से आधी हिस्सेदारी रखने वाली एयरलाइन ने आशंका व्यक्त की है कि चालू वित्त वर्ष की 31 मार्च को समाप्त हो रही अंतिम तिमाही में उसके राजस्व और मुनाफे पर इसका बड़ा प्रभाव देखा जा सकता है। साथ ही रुपए में हो रही गिरावट के कारण विमान किराए के मद में भुगतान का बोझ भी बढ़ सकता है, क्योंकि किराये का भुगतान डॉलर में करना होता है।

चीन में सबसे बड़ा आर्थिक संकट
पर्यटन: कोरोनावायरस की शुरुआत चीन से हुई है। इससे संक्रमित होने वाले लोगों के सबसे ज्यादा मामले और मौत यहां पर हुई हैं। ऐसे में इस वायरस ने चीन की सभी इंडस्ट्री पर असर किया है। चीन के कई हिस्सों में यात्रा प्रतिबंध लगा दिया गया है। जिससे चीन के पर्यटन व्यवसाय को बड़ा झटका लगा है। बता दें कि साल 2002-03 के दौरान सार्स की महामारी फैली थी। इसकी शुरुआत भी चीन में हुई थी।
ट्रांसपोर्ट सेक्टर: चीन के ट्रांसपोर्ट सेक्टर को भी वायरस ने बड़ा झटका दिया है। इससे एंटरटेनमेंट और गिफ्ट पर उपभोक्ताओं के खर्च पर असर हुआ है। बहुत से लोग घर से बाहर जाकर ऐसी किसी गतिविधि में हिस्सा लेने से बच रहे हैं, जिससे उन्हें संक्रमण का खतरा होगा। चीन के साथ दुनियाभर में पहले से तय कई बड़े इवेंट रद्द कर दिए गए हैं। चीन दुनिया का बड़ा ट्रांसपोर्ट हब है, लेकिन कोरोना ने इस ट्रांसपोर्ट पर ब्रेक लगा दिए हैं।
लोगों में डर: चीन के वुहान शहर से बाहर जाने को लेकर पूरी तरह प्रतिबंध लगा हुआ है। यहां की आबादी करीब एक करोड़ से ज्यादा है। साथ ही, हुबेई प्रांत के अन्य हिस्सों को भी लॉकडाउन कर दिया है। यहां कारोबार संबंधी यात्राओं, सामान और लोगों की आवाजाही पर रोक लगी है। कोरोना के डर से लोग घूमने, रेस्टोरेंट्स, सिनेमा हॉल, परिवहन, होटलों, दुकानों पर जाने से डर रहे हैं। चीन में तैयार किए जाने वाले प्रोडक्ट में भी कमी आई है।




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