म्यूचुअल फंड / इन्वेस्टमेंट की शुरुआत कर रहे हैं तो हाईब्रिड फंड अच्छा विकल्प है



Hybrid fund is a good option if you are starting the investment
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Hybrid fund is a good option if you are starting the investment

Dainik Bhaskar

May 09, 2019, 09:57 AM IST

हाइब्रिड फंड उसे कहते हैं जिसका एसेट क्लास दो तरह का होता है। यानी जिसका पैसा दो तरह के एसेट में लगाया जाता है। आम तौर पर हाइब्रिड फंड का पैसा इक्विटी और डेट में इन्वेस्ट होता है। इसमें इन्वेस्टर को दोनों एसेट का लाभ मिलता है। इक्विटी म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने वाले मूलत: कंपनियों के इक्विटी शेयर में इन्वेस्ट करते हैं। इक्विटी फंड में ज्यादा रिटर्न देने की गुंजाइश होती है, लेकिन इनमें रिस्क भी ज्यादा होता है। डेट फंड का पैसा कॉरपोरेट बॉन्ड, मनी मार्केट के इंस्ट्रूमेंट, ट्रेजरी बिल (सरकारी बॉन्ड) आदि में इन्वेस्ट किया जाता है। इन सब पर रिटर्न निश्चित होता है, इसलिए डेट फंड को इक्विटी फंड की तुलना में कम रिस्क वाला माना जाता है। लेकिन लंबे समय में इनमें रिटर्न की गुंजाइश इक्विटी से कम होती है। हाइब्रिड फंड में इन दोनों का मिला-जुला लाभ मिलता है। 

आईसीआईसीआईसी प्रूडेंशियल के एमडी-सीईओ निमेश शाह से जानें क्यों हाईब्रिड फंड है अच्छा विकल्प?

  1. इक्विटी ओरिएंटेड फंड का 65% पैसा इक्विटी में

    हाइब्रिड फंड की स्कीम में इक्विटी के जरिए ज्यादा रिटर्न और डेट के जरिए स्थिरता, दोनों का लाभ मिलता है। दूसरे शब्दों में कहें तो हाइब्रिड फंड में कम रिस्क में ज्यादा रिटर्न की गुंजाइश होती है। अगर हाइब्रिड म्यूचुअल फंड स्कीम का 65% पैसा इक्विटी में और बाकी डेट में लगाया जाता है तो उसे इक्विटी ओरिएंटेड फंड कहते हैं। अगर 65% पैसा डेट में और बाकी इक्विटी में लगाया है तो वह डेट ओरिएंटेड फंड कहलाएगा। एसेट एलोकेशन यानी कहां कितना पैसा इन्वेस्ट किया गया है, उसके हिसाब से हाइब्रिड फंड के कई प्रकार होते हैं। इनमें कंजरवेटिव, बैलेंस्ड और अग्रेसिव फंड प्रमुख हैं। कंजरवेटिव हाइब्रिड फंड का 10-25% पैसा इक्विटी और बाकी डेट में लगाया जाता है। बैलेंस्ड हाइब्रिड का 40-60% पैसा इक्विटी में होता है। अग्रेसिव हाइब्रिड का 65-80% पैसा इक्विटी में निवेश किया जाता है। 

  2. लॉन्ग टर्म के लिए अग्रेसिव हाइब्रिड फंड चुन सकते हैं

    यह म्यूचुअल फंड में इन्वेस्टमेंट की शुरूआत करने वाले और पुराने इन्वेस्टर, दोनों के लिए होता है। इन्वेस्टर अपनी जरूरत के हिसाब से कैटेगरी चुन सकते हैं। नए इन्वेस्टर्स के लिए यह अच्छा होता है और यहां वे अनुभव भी हासिल कर सकते हैं। पुराने इन्वेस्टर भी सही हाइब्रिड फंड स्कीम चुनकर फायदा उठा सकते हैं। फंड की कैटेगरी के हिसाब से एसेट एलोकेशन बदलता रहता है, इसलिए एकमुश्त इन्वेस्टमेंट भी एक विकल्प हो सकता है। एक बार पैसा लगाने के बाद आप अनावश्यक रिस्क से बच सकते हैं। अगर इन्वेस्टमेंट का लक्ष्य लॉन्ग टर्म है, तो अग्रेसिव हाइब्रिड फंड अच्छा विकल्प हो सकता है। इसमें कम से कम 65% पैसा इक्विटी में लगाया जाता है, इसलिए इसमें लाभ पर टैक्स में छूट भी मिलती है। 

  3. रिस्क नहीं लेना तो कंजरवेटिव फंड बेहतर

    जो इन्वेस्टर रिस्क नहीं लेना चाहते, इक्विटी में कम निवेश करना चाहते हैं उनके लिए कंजरवेटिव और बैलेंस्ड फंड बेहतर विकल्प हैं। इनमें कम रिस्क के साथ लॉन्ग टर्म में एसेट बनाने का मौका मिलेगा। इक्विटी में पहली बार निवेश करने वालों या जो महंगाई दर से ज्यादा रिटर्न चाहते हैं, उनके लिए यह अच्छा है। लेकिन यह बात ध्यान रखनी चाहिए कि हाइब्रिड फंड की इन दोनों कैटेगरी में टैक्स रेट ज्यादा है। 

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