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GST में सालाना 7% की बढ़ोतरी:फरवरी में 1.13 लाख करोड़ रहा GST कलेक्शन, लगातार पांचवें महीने एक लाख करोड़ के पार

3 महीने पहले
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पिछले महीने यानी फरवरी में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) कलेक्शन 1.13 लाख करोड़ रुपए रहा। लगातार पांचवीं बार GST कलेक्शन 1 लाख करोड़ रुपए से ऊपर रहा। इसकी वजह यह है कि कोरोना के मामले घटने के बाद आर्थिक गतिविधियों में लगातार तेजी आ रही है और सरकार भी इकोनॉमी को मजबूती देने की कोशिशें कर रही है। 8 पॉइंट्स में जानते हैं कि इन आंकड़ों के मायने क्या हैं...

1. यह तेजी किन मायनों में है?
GST जैसी आर्थिक रिपोर्ट के आंकड़ों की पिछले साल के उसी महीने के आंकड़ों से तुलना कर देखा जाता है। इस हिसाब से फरवरी के GST कलेक्शन में सालाना आधार पर 7% की बढ़ोतरी हुई है। यानी फरवरी 2020 में GST कलेक्शन 1.05 लाख करोड़ था, जो फरवरी 2021 में बढ़कर 1.13 लाख करोड़ रुपए हो गया।

2. बढ़त कहां से हो रही है?
GST के आंकड़े आयात होने वाले सामान पर लगने वाले टैक्स से बढ़ रहे हैं। GST कलेक्शन में इम्पोर्ट से रेवेन्यू पिछले साल के मुकाबले 15% बढ़ा है। इसके ये मायने हैं कि इकोनॉमी में रिकवरी आने के बाद इम्पोर्ट बढ़ रहा है, जिस वजह से GST कलेक्शन पर अच्छा असर पड़ रहा है। इसी तरह डोमेस्टिक ट्रांजैक्शन से रेवेन्यू भी पिछले साल से 5% ज्यादा रहा है। यानी घरेलू बाजार में सामान के लेनदेन से हासिल टैक्स कलेक्शन बढ़ रहा है।

3. GST कलेक्शन में इतनी तेजी क्यों है?
GST कलेक्शन में लगातार हो रही बढ़त का सबसे बड़ा कारण इसके लीकेज को रोकना है। पिछले 5-6 महीनों से GST की टीम अपने IT सिस्टम को मजबूत कर रही है। इससे फर्जीवाड़ा रुका है। सोमवार को ही GST की टीम ने महाराष्ट्र में 656 करोड़ रुपए के फर्जी बिलों को पकड़ा। इसमें कुल 48 लोग और कंपनियां शामिल थीं। इसमें से 4 को गिरफ्तार किया गया है।

पिछले हफ्ते ही GST की टीम ने कुछ ऐसे लोगों को पर्सनल फोन किया, जिनका कारोबार 1 करोड़ रुपए भी नहीं था। इन लोगों से यह पूछा गया कि उन्होंने GST क्यों कम भरा है। यानी GST टीम जानना चाहती है कि बिजनेस कैसा चल रहा है। खबर है कि GST टीम अब चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और अस्पतालों की स्क्रूटनी कर रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि रेवेन्यू विभाग को उनके इनकम टैक्स और इंडायरेक्ट टैक्स की फाइलिंग में अंतर मिला है। टैक्स अथॉरिटी ने इस बारे में कुछ अस्पतालों को नोटिस भी जारी किया है।

4. GST बढ़ने का मतलब क्या है?
GST बढ़ने का मतलब साफ है कि कारोबारी स्थितियां अच्छी हैं। आमतौर पर GST तभी दिया जाता है, जब आपका कारोबार चलता है। जैसे कोरोना में जब पूरा कारोबार बंद था, उस समय अप्रैल में GST कलेक्शन गिरकर 32 हजार करोड़ रुपए पर पहुंच गया था। अनलॉक शुरू हुआ तो GST कलेक्शन में तेजी आने लगी। इसे कह सकते हैं कि कारोबार पटरी पर है। इकोनॉमी अच्छी चल रही है।

5. इकोनॉमी में रिकवरी किस तरह आ रही है?

  • दो तिमाही बाद GDP की तीसरी तिमाही पॉजिटिव रही है। ग्रोथ 0.4% बढ़ी है। पहली तिमाही में यह 23.9% और दूसरी तिमाही में 7.5% गिरी थी।
  • यह लगातार सातवां महीना है, जब ऑटो सेक्टर की ग्रोथ पॉजिटिव है। ऑटो सेक्टर अगर तेजी में है तो मतलब लोगों के पास पैसे हैं।
  • शेयर बाजार लगातार ऊंचाई पर है। विदेशी निवेशकों ने लगातार पांचवें महीने में भी अच्छा निवेश किया है। 5 महीने में शेयर बाजार में इनका निवेश 2 लाख करोड़ रुपए रहा है। यह इकोनॉमी के लिए पॉजिटिव है।

6. मार्च में GST कलेक्शन को लेकर क्या उम्मीदें हैं?
CNI रिसर्च के चेयरमैन किशोर ओस्तवाल कहते हैं कि मार्च 2020 में 97 हजार करोड़ रुपए का कलेक्शन था। 2019 मार्च में 1.09 लाख करोड़ रुपए का कलेक्शन था। पर मार्च उससे बेहतर होगा। उम्मीद है कि मार्च में कलेक्शन 1.30 लाख करोड़ रुपए हो सकता है क्योंकि GST चोरी पर लगाम लगी है। साथ ही महीना 31 दिनों का है। फरवरी 28 दिनों का है। तो तीन दिन का मतलब 12-15 हजार करोड़ रुपए बढ़ना चाहिए।

7. क्या कोरोना की वजह से सालाना GST कलेक्शन नहीं घटा?

जहां तक इस फाइनेंशियल ईयर की बात है तो अप्रैल 2020 से फरवरी 2021 तक कुल जीएसटी कलेक्शन 10,12,853 करोड़ रुपये रहा है। एक साल पहले इसी पीरियड को देखें तो अप्रैल 2019 से फरवरी 2020 के बीच 11,11,878 करोड़ रुपये के जीएसटी का कलेक्शन हुआ था। इस हिसाब से मौजूदा वित्त वर्ष के पहले 11 महीनों में पिछले वित्त वर्ष के इसी पीरियड के मुकाबले 99,025 करोड़ रुपये कम कलेक्शन हुआ है जो लगभग नौ पर्सेंट कम है।

8. GST में किसकी हिस्सेदारी सबसे ज्यादा?
फरवरी 2021 में 21,092 करोड़ रुपए का CGST यानी सेंट्रल गुड्स एंड सर्विस टैक्स और 27,273 करोड़ रुपये का SGST यानी स्टेट गुड्स एंड सर्विस टैक्स कलेक्शन हुआ। IGST यानी इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विस टैक्स कलेक्शन 55,253 करोड़ रुपए का रहा। इसमें से 24,382 करोड़ रुपए की रकम इंपोर्टेड सामान पर वसूल की गई। इसके अलावा सेस के तौर पर 9,525 करोड़ रुपये की वसूली हुई।