दिसंबर में निपटाने हैं टैक्स से जुड़े 4 जरूरी काम:लेट फीस के साथ ITR फाइल करने का आखिरी मौका, एडवांस टैक्स की तीसरी किस्त करनी है जमा

नई दिल्ली2 महीने पहले
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साल का आखिरी महीना इसी हफ्ते शुरू हो जाएगा। नए साल का जश्न इत्मिनान से मनाएं इसके लिए जरूरी है कि टैक्स से संबंधित 2022 के बाकी काम समय से पहले निपटा लें। लेट फीस के साथ इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना, भरे जा चुके आईटीआर में गलती सुधारना, जीएसटी रिटर्न-9सी की फाइलिंग और एडवांस टैक्स की तीसरी किस्त इनमें शामिल है।

सीए कीर्ति जोशी बताते हैं कि इनमें से कोई भी काम छूट जाने पर उसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है। आपको जुर्माना देना पड़ सकता है, अतिरिक्त ब्याज चुकाना पड़ सकता है या फिर कानूनी नोटिस का जवाब देने की नौबत भी आ सकती सीए कीर्ति जोशीहै। ऐसी परेशानियां नए साल के उल्लास का रंग फीका कर सकती हैं, जबकि थोड़ी सतर्कता बरतकर इनसे बचा जा सकता है। इसके लिए अभी पर्याप्त समय भी है।

लेट फीस के साथ आयकर रिटर्न
यदि आपने 2021-22 का आयकर रिटर्न अब तक फाइल नहीं किया है तो लेट फीस के साथ 31 दिसंबर तक फाइल कर सकते हैं। यदि कुल आय 5 लाख से कम है तो आपको 1,000 रुपए लेट फीस देनी होगी। कुल आय 5 लाख रुपए से ज्यादा हो तो 5,000 रुपए की लेट फीस देनी होगी।

एडवांस टैक्स की तीसरी किस्त
2022-23 के एडवांस टैक्स की तीसरी किस्त भरने की आखिरी तारीख 15 दिसंबर है। जिनका सालाना इनकम टैक्स 10 हजार से ज्यादा होता है, उन्हें एडवांस टैक्स जमा करवाना होता है। यदि 15 दिसंबर तक वे 75% टैक्स एडवांस में जमा नहीं कराते हैं या कम टैक्स जमा करते हैं तो 1% ब्याज लगेगा।

आईटी रिटर्न में गलती सुधारना
हो सकता है कि आपने वित्त वर्ष 2021-22 का इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर दिया हो और उसमें कोई चूक हो गई हो। ऐसे में आप 31 दिसंबर तक रिवाइज्ड रिटर्न फाइल कर सकते हैं। इसके बाद गलती नहीं सुधार पाएंगे। इसकी वजह से आपके पास आयकर विभाग का नोटिस आ सकता है।

जीएसटीआर-9सी फाइल करना
जीएसटी में रजिस्टर्ड करदाताओं को हर वित्त वर्ष खत्म हाेने के बाद सालाना रिटर्न जीएसटीआर-9 फाइल करना होता है। जरूरत पड़ने पर संशोधन विवरणी जीएसटीआर-9सी फाइल करनी होती है। 2021-22 के लिए इसकी आखिरी तारीख 31 दिसंबर है।

इसके बाद रिटर्न फाइल करने पर रोजाना 200 रुपए के हिसाब से लेट फीस देनी पड़ेगी। यह टर्नओवर के अधिकतम 0.5% तक जा सकती है। जीएसटीआर-9सी ऐसे करदाताओं के लिए है, जिनका सालाना टर्नओवर 5 करोड़ से ज्यादा है।

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