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काम की बात:इनकम टैक्स रिटर्न में दिवाली और भाई दूज पर मिले गिफ्ट्स की जानकारी देना होता है जरूरी, नहीं तो हो सकती है परेशानी

8 महीने पहले
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दिवाली और भाई दूज पर गिफ्ट देने का चलन है। अगर आपको भी त्योहार पर गिफ्ट मिले हैं तो इस पर आपको इनकम टैक्स देना होगा। इसीलिए आपको इसकी जानकारी भी ITR फाइल करते समय देनी होगी। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो आपको इनकम टैक्‍स विभाग से नोटिस मिल सकता है। आज सीए अभय शर्मा आपको गिफ्ट पर लगने वाले टैक्स के बारे में बता रहे हैं।

गिफ्ट्स को माना जाता है इनकम ऑफ अदर सोर्सेज
दिवाली या किसी भी अन्य मौके पर मिलने वाले गिफ्ट्स को इनकम ऑफ अदर सोर्सेज यानी 'अन्‍य स्रोतों से आय' माना जाता है। इसे आपकी कुल आय (ग्रॉस इनकम) में जोड़ा जाता है। इसीलिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करते समय इसकी जानकारी देनी होती है। इस पर आपके टैक्स स्लैब के अनुसार ही टैक्स देना होता है।

50 हजार से ज्यादा के गिफ्ट्स पर देना होता है टैक्स
इनकम टैक्स नियम के अनुसार अगर आपको 50 हजार रुपए से अधिक कीमत का गिफ्ट मिलता है तो इस पर आपको टैक्‍स देना होगा। कई बार साल में कई मौकों पर आपको गिफ्ट मिलता है और हो सकता है कि इसकी कुल कीमत 50 हजार रुपए से अधिक हो। ऐसे में इनकम टैक्‍स रिटर्न भरते समय आपको इस बात का ध्‍यान रखना चाहिए। आपको इनकम टैक्‍स में 50 हजार रुपए से अधिक के गिफ्ट की जानकारी देनी होगी। अगर आप यह जानकारी इनकम टैक्‍स विभाग से छिपाते हैं तो आपको बाद में मुश्किल हो सकती है।

कैसे लगता है गिफ्ट पर टैक्स?
आयकर कानून, 1961 के सेक्शन 56(2)(x) के तहत करदाता को मिले गिफ्ट्स पर कर देनदारी बनती है। टैक्स के दायरे में आने वाले गिफ्ट्स में ये चीजें शामिल हैं-

  • चेक या कैश में मिली 50 हजार रुपए से ज्यादा की रकम।
  • जमीन, बिल्डिंग आदि जैसी कोई भी अचल संपत्ति, जिसकी स्टांप ड्यूटी 50 हजार रुपए से ज्यादा हो।
  • 50 हजार रुपए से ज्यादा की ज्वेलरी, शेयर, पेंटिंग्स या अन्य महंगी चीजें।
  • अचल संपत्ति के अलावा 50 हजार रुपए से ज्यादा की कोई भी प्रॉपर्टी।

रिश्तेदारों से मिले गिफ्ट पर नहीं लगता है टैक्स
अगर आपको अपने परिवार के सदस्यों से गिफ्ट मिलता है जिनके साथ आपक ब्लड रिलेशन है तो इस पर आपको कोई टैक्स नहीं देना होता है। आप अपने परिवार के सदस्यों से कितनी भी कीमत का गिफ्ट ले सकते हैं या दे सकते हैं। यह टैक्सेबल नहीं है। छूट के इस दायरे में आने वाले गिफ्ट इस तरह हैं-

  • पति या पत्नी से मिला गिफ्ट।
  • भाई या बहन से मिला गिफ्ट।
  • पति या पत्नी के भाई या बहन से मिला गिफ्ट।
  • माता-पिता के भाई या बहन से मिला गिफ्ट।
  • विरासत या वसीयत में मिला ​गिफ्ट या प्रॉपर्टी।
  • पति या पत्नी के किसी निकटतम पूर्वज या वंशज से मिला गिफ्ट।
  • हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली के मामले में किसी भी मेंबर से मिला गिफ्ट।
  • लोकल अथॉरिटी जैसे पंचायत, म्यूनिसपैलिटी, म्यूनिसपल कमेटी और डिस्ट्रिक्ट बोर्ड, कैंटोनमेंट बोर्ड से मिला गिफ्ट।
  • सेक्शन 10 (23C) में उल्लिखित किसी फंड/फाउंडेशन/यूनिवर्सिटी या अन्य एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन, हॉस्पिटल या अन्य मेडिकल इंस्टीट्यूशन, ट्रस्ट या इंस्टीट्यूशन से मिला गिफ्ट।
  • सेक्शन 12A या 12AA के तहत रजिस्टर किसी चैरिटेबल या धार्मिक ट्रस्ट से मिला गिफ्ट।

एम्प्लॉयर से मिले तोहफे पर भी लगता है टैक्स
एम्प्लॉयर से आपको एक वित्त वर्ष में 5,000 रुपए मूल्य तक का मिला उपहार टैक्स फ्री है, लेकिन तोहफे की वैल्यू अगर 5,000 रुपए से ज्यादा होगी तो अतिरिक्त रकम को आपकी सैलरी से हुई आमदनी माना जाएगा और उस पर इनकम टैक्स देना होगा।