कल से शुरू होगी WEF 2022 की बैठक:पीयूष गोयल करेंगे भारतीय टीम को लीड, जानिए इसमें शामिल होने वाले लोगों और इवेंट की लिस्ट

नई दिल्लीएक महीने पहले
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वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की सलाना बैठक 22 मई से दावोस के स्विटजरलैंड में शुरू होगी। जो 26 मई तक चलेगी। 4 दिन चलने वाली इस बैठक की थीम साथ में काम करने और विश्ववास बढ़ाने को लेकर बनाई गई है। इसमें तमाम देशों के आए लीडर दुनिया की स्थिति को परखते हुए भविष्य के लिए नीति और पार्टनरशिप करेंगे। यह बैठक 17 से 21 जनवरी को होनी थी, लेकिन ओमिक्रोन के बढ़ते खतरे की वजह से इसे रोक दिया गया था।

इस बैठक में भारत के लीडरशिप की बात करें तो वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 23-25 मई तक दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और उद्योग जगत के नेताओं के डेलिगेशन को लीड करेंगे। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने कहा कि यह आयोजन एक महत्वपूर्ण और प्रासंगिक हितधारक के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करने में मदद करेगा, खासकर जब भारत 2023 में जी -20 की अध्यक्षता करेगा।

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम भी भारत को अपने मजबूत आर्थिक विकास और स्थिर मैक्रो इकोनॉमिक इंडिकेटर के मद्देनजर एक आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में पेश करने का एक मंच होगा।

6 राज्यों के मुख्यमंत्री और सीनियर मिनिस्टर भी शामिल होंगे
भारत सरकार के डेलिगेशन में स्वास्थ्य मंत्री मनसुखलाल मंडाविया, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलंगाना के छह राज्यों के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ मंत्री शामिल होंगे।

इसमें कहा गया है कि हरि एस भारतीय, अमित कल्याणी, राजन भारती मित्तल, रोनी स्क्रूवाला और सलिल एस पारेख सहित कई इंडस्ट्री एरिया के सीनियर नेता भी WEF में हिस्सा लेंगे। देश की आजादी के 75 साल और 'आजादी का अमृत महोत्सव' को चिह्नित करने के लिए मंत्रालय ने WEF में भारत यादगार उपस्थिति की पहल की है। इंडिया लाउंज के साथ-साथ एक स्टेट लाउंज भी स्थापित किया गया है।

कोरोना, युद्ध जैसे संकट से नहीं निपटे तो 5% घट सकती है ग्लोबल डेवलपमेंट रेट
जलवायु परिवर्तन, महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे संकटों से निपटने की क्षमता विकसित करने में चूकने ग्लोबल डेवलपमेंट रेट में एक से 5% तक गिरावट आ सकती है। वर्ल्ड इकोनोमिक फोरम (WEF) ने शुक्रवार को एक रिसर्च में कहा, इन संकटों से दुनियाभर में भुखमरी, माइग्रेशन, असमानता, सप्लाई चेन में कमजोरी, ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और ग्लोबल ग्रोथ पर दबाव जैसी बाधाएं पैदा हो रही हैं।

अगले संकट से निपटने के लिए देशों व कंपनियों को भी रिस्क मैनेजमेंट के लिए बेहतर तरीके से काम करने की जरूरत है। दावोस में होने वाली WEF की सालाना बैठक से पूर्व जारी इस शोध में कहा गया कि कोरोना के कारण कार्यबल में छंटनी से कुछ देशों में ग्रोथ 3.6% तक प्रभावित हुई। ऊर्जा संकट और आपूर्ति बाधित होने से वैश्विक GDP को एक से 2.5% तक नुकसान हुआ। WEF के अध्यक्ष बोर्गे ब्रेंडे ने कहा, मौजूदा पीढ़ी के लिए क्षमता को और अधिक लचीला बनाना जरूरी है।