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अक्टूबर में घटी रिटेल महंगाई:सब्जियों और दालों के दाम कम होने से महंगाई दर घटकर 6.77% पर आई, सितंबर में 7.41% रही थी

16 दिन पहले
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अक्टूबर महीने में रिटेल महंगाई घटकर 6.77% पर आ गई है। सितंबर में ये 7.41% थी। वहीं एक साल पहले यानी अक्टूबर 2021 में ये 4.48% थी। कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित रिटेल महंगाई दर के आंकड़े सोमवार (14 नवंबर) को जारी किए गए। लगातार 2 महीने बढ़ने के बाद CPI में यह गिरावट देखने को मिली। महंगाई 3 महीने के निचले स्तर पर भी आ गई है।

सब्जियों और दालों के दाम कम होने से महंगाई दर घटी
खाने-पीने का सामान खास तौर पर सब्जियों और दालों की कीमतों के घटने की वजह से महंगाई घटी है। अक्टूबर महीने में खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर सितंबर के 8.6% से घटकर 7.01% पर आ गई। जबकि सब्जियों की महंगाई सितंबर के 18.05% से घटकर 7.77% पर पहुंच गई है।

महंगाई कैसे प्रभावित करती है?
महंगाई का सीधा संबंध पर्चेजिंग पावर से है। उदाहरण के लिए, यदि महंगाई दर 7% है, तो अर्जित किए गए 100 रुपए का मूल्य सिर्फ 93 रुपए होगा। इसलिए महंगाई को देखते हुए ही निवेश करना चाहिए। नहीं तो आपके पैसे की वैल्यू कम हो जाएगी।

RBI कैसे कंट्रोल करती है महंगाई?
महंगाई कम करने के लिए बाजार में पैसों के बहाव (लिक्विडिटी) को कम किया जाता है। इसके लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) रेपो रेट बढ़ाता है। बढ़ती महंगाई से चिंतित RBI ने हाल ही में रेपो रेट में 0.50% इजाफा किया है। इससे रेपो रेट 5.40% से बढ़कर 5.90% हो गया है।

CPI क्या होता है?
दुनियाभर की कई इकोनॉमी महंगाई को मापने के लिए WPI (Wholesale Price Index) को अपना आधार मानती हैं। भारत में ऐसा नहीं होता। हमारे देश में WPI के साथ ही CPI को भी महंगाई चेक करने का स्केल माना जाता है।

भारतीय रिजर्व बैंक मौद्रिक और क्रेडिट से जुड़ी नीतियां तय करने के लिए थोक मूल्यों को नहीं, बल्कि खुदरा महंगाई दर को मुख्य मानक (मेन स्टैंडर्ड) मानता है। अर्थव्यवस्था के स्वभाव में WPI और CPI एक-दूसरे पर असर डालते हैं। इस तरह WPI बढ़ेगा, तो CPI भी बढ़ेगा।

रिटेल महंगाई की दर कैसे तय होती है?
कच्चे तेल, कमोडिटी की कीमतों, मैन्युफैक्चर्ड कॉस्ट के अलावा कई अन्य चीजें भी होती हैं, जिनकी रिटेल महंगाई दर तय करने में अहम भूमिका होती है। करीब 299 सामान ऐसे हैं, जिनकी कीमतों के आधार पर रिटेल महंगाई का रेट तय होता है।

महंगाई कंट्रोल करने के टूल

1. मॉनेटरी पॉलिसी
सेंट्रोल बैंक के पास रेपो रेट के रूप में महंगाई से लड़ने का एक शक्तिशाली टूल है। जब महंगाई बहुत ज्यादा होती है तो, RBI रेपो रेट बढ़ाकर इकोनॉमी में मनी फ्लो को कम करने की कोशिश करता है। इससे डिमांड में कमी आती है और महंगाई घटती है।

2. इनकम टैक्स में बढ़ोतरी
महंगाई को को कम करने के लिए, सरकार करों (जैसे आयकर और GST) को बढ़ा सकती है और खर्च में कटौती कर सकती है। इससे सरकार की बजट स्थिति में सुधार होता है और अर्थव्यवस्था में मांग को कम करने में मदद मिलती है।

3. फिक्स्ड एक्सचेंज रेट मैकेनिज्म
एक देश निश्चित विनिमय दर तंत्र में शामिल होकर महंगाई को कम रखने की कोशिश कर सकता है। तर्क यह है कि यदि किसी करेंसी का मूल्य निश्चित (या सेमी-फिक्स्ड) है तो यह महंगाई को कम रखने में मदद करता है।

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