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ब्लूमबर्ग से:भारत-चीन की टक्कर में बांग्लादेश निकला आगे, सस्ते लेबर कॉस्ट का मिला सपोर्ट, एक्सपोर्ट में वियतनाम से भी मिल रही कड़ी टक्कर

नई दिल्ली10 दिन पहले
'' बड़ी इकोनॉमी के मुकाबले इमर्जिंग इकोनॉमी बेहतर कर रही हैं, यह अच्छी बात है। लेकिन, चौकाने वाली बात यह है कि भारत, जो पिछले 5 सालों से इसे लीड कर रहा था वह अब पिछड़ रहा है''
  • केंद्र सरकार देश की इकोनॉमी 2024 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की बनाने की योजना पर काम कर रही है
  • ऐसे में बांग्लादेश जैसे देश से आर्थिक मोर्चे पर पिछड़ने से भारी झटका सकता है

एक तरफ भारत मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब बनने के लिए चीन से मुकाबले के लिए तैयारी कर रहा है तो दूसरी तरफ उसकी पर कैपिटा (प्रति व्यक्ति) जीडीपी बांग्लादेश जैसे देशों से भी कम होती जा रही है। आईएमएफ की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अपने पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश से पिछड़ता नजर आ रहा है। हाल ही में इंटरनेशनल मॉनीटरी फंड (आईएमएफ) ने यह जानकारी दी। आईएमएफ के अनुमान के मुताबिक, 2020 में बांग्लादेश में प्रति व्यक्ति जीडीपी 1,888 डॉलर (करीब 1,38,400 रुपए) हो सकती है, जबकि भारत में यह 1,877 डॉलर (करीब 1,37,594 रुपए) रहेगी।

पिछड़ रहा है भारत

विश्व बैंक के पूर्व अर्थशास्त्री कौशिक बसु ने आईएमएफ द्वारा जारी आंकड़ों के बाद सोशल मीडिया पर लिखा कि बड़ी इकोनॉमी के मुकाबले इमर्जिंग इकोनॉमी बेहतर कर रही हैं, यह अच्छी बात है। लेकिन, चौकाने वाली बात यह है कि भारत, जो पिछले 5 सालों से इसे लीड कर रहा था वह अब पिछड़ रहा है।

भारत का सपना

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, 1990 के दशक में भारत ने जब ग्लोबलाइजेशन के दौरान अपनी अर्थव्यवस्था को दुनियाभर से निवेश के लिए खोलना शुरु किया था, तब से भारत का सपना चीन की आर्थिक तेजी से कंपीट करना है। लेकिन, आईएमएफ के रिपोर्ट से भारत के उस सपने का झटका लग सकता है, जिसमें भारत प्रति व्यक्ति जीडीपी के लिहाज से बांग्लादेश से पिछड़ता नजर आ रहा है। जबकि, पश्चिमी देश जैसे यूएस और यूरोप, भारत को चीन के प्रतिद्वंदी के रूप में देख रहे हैं।

5 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य

वर्तमान में केंद्र सरकार, देश की इकोनॉमी 2024 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की बनाने की योजना पर काम कर रही है। ऐसे में बांग्लादेश जैसे देश से आर्थिक मोर्चे पर पिछड़ने से भारी झटका सकता है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, इससे दक्षिण एशिया और हिंद महासागर में भारत का प्रभाव भी कम हो सकता है। दरअसल, इस साल भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी 10 पर्सेंट गिरी है। जबकि बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति जीडीपी 4 प्रतिशत की बढ़ी है।

इससे पहले प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के मामले में भारत कुछ साल पहले तक बांग्लादेश से काफी ऊपर था। लेकिन बांग्लादेश में तेजी से निर्यात के कारण उसकी बढ़त में काफी अंतर आया है। इसके अलावा बीच की अवधि के दौरान जब भारत की बचत और निवेश काफी सुस्त थी तब बांग्लादेश ने इसमें बाजी मार ली।

कोरोना महामारी का असर

निश्चित रूप कोरोना महामारी के कारण दोनों देशों की इकोनॉमी प्रभावित हुई है। लेकिन नुकसान भारत को ज्यादा हुआ है। बांग्लादेश में मिड जून में कोरोना के मामले उच्चतम स्तर पर था। जबकि भारत में कोरोना के मामले अभी भी सबसे ज्यादा हैं। बांग्लादेश की कुल आबादी 16 करोड़ है, जिसमें कोविड-19 से मरने वालों की संख्या 5.6 हजार है। जबकि भारत की आबादी बांग्लादेश के मुकाबले आठ गुना है और मरने वालों की संख्या 20 गुना अधिक है।

सख्त लॉकडाउन से प्रभावित हुई इकोनॉमी

आईएमएफ के मुताबिक, भारत में कोरोना महामारी को रोकने के लिए मार्च से देशभर में दुनिया का सबसे सख्त लॉकडाउन लगाया गया। इससे देश में रियल आउटपुट लगभग 10.3% साफ हो गया। जबकि ग्लोबल इकोनॉमी को करीब 2.5 गुना नुकसान होने का अनुमान है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, नाजुक वित्तीय स्थिति, कम विकसित फाइनेंशियल सिस्टम और मल्टीयर इन्वेस्टमेंट के रिस्क से भारत में रिकवरी में देरी हो सकती है।

बांग्लादेश को सस्ते श्रम से मिला सपोर्ट

सौमित्रो चटर्जी और अरविंद सुब्रमण्यम ने अपने एक रिसर्च पेपर में बताया कि बांग्लादेश में ज्यादातर आबादी गरीब है। इससे कम कीमत पर श्रम की उपलब्धता ज्यादा है। सस्ते श्रम के कारण एक्सपोर्ट भी अच्छी स्थिति में है। यही हाल वियतनाम का भी है। दरअसल ये दोनों देश चीन को फॉलो कर रहे हैं। क्योंकि दशकों पहले चीन की भी स्थिति कुछ ऐसी ही थी। सस्ते लेबर कॉस्ट से मैनुफैक्चरिंग सेक्टर को बूस्टअप मिला। इससे इकोनॉमी भी सुधर रही है।

फोकस बदलने की आवश्यकता

जबकि भारत ने इससे बिल्कुल अलग रास्ता अपनाया। यहां लगभग एक अरब आबादी फैक्टरियों में काम करती है। रिसर्च पेपर के मुताबिक, भारत में ज्यादातर आबादी टेक्सटाइल और कपड़ा क्षेत्र में काम करती है, जो करीब 140 बिलियन डॉलर की है। यह देश की जीडीपी में केवल 5% की हिस्सेदारी रखती है। अब अगर 2019 में भारत का आधा सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट नहीं हो पाता तो हंगामा हो जाता। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ। इसके बावजूद 60 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ। क्योंकि लो स्किल्ड प्रोडक्शन की वजह से ये निर्यात हो ही नहीं पाया। इस पर किसी ने ध्यान में भी नहीं दिया और न ही बात की।

श्रम बल में महिलाओं की हिस्सेदारी

सौमित्रो चटर्जी और अरविंद सुब्रमण्यम के मुताबिक, देश नीति निर्माताओं का ध्यान अब भी इस पर नहीं है कि जूते और कपड़े की फैक्ट्रियां भी पैसे कमा सकती थी, जो बंद होने के लिए मजबूर हो गईं। ये बड़े पैमाने पर रोजगार भी पैदा कर सकती थी। उन्होंने रूरल एरिया से अर्बन एरिया के लिए एक रास्ता तैयार किया, जिसमें नौकरियों की आवश्यकता होती है। इसमें हाई एजुकेशन और ट्रेनिंग की आवश्यकता नही होती। वहीं, बांग्लादेश के श्रम बल में हर पांच में से तीन महिलाएं कामकाजी हैं, जो भारत के मुकाबले दोगुनी है। जबकि, भारत में महिलाओं की भागीदारी 21% है।

दशकों पुरानी गलतियां

सौमित्रो चटर्जी और अरविंद सुब्रमण्यम के मुताबिक, भारत में पॉलिटिशियन सुधार करने के बजाय सालों पुरानी गलतियों को दोहरा रहे हैं। इससे घरेलू अर्थव्यवस्था और एक्सपोर्ट में मुश्किलें बढ़ेंगी। वर्तमान में नौकरियों पर जो चर्चा हो रही है, इससे अचानक 1960 और 1970 के दशक का नारा याद आने लगा है। हालांकि, इससे निराशा थोड़ी कम होती है कि भारत का एक्सपोर्ट बेस्ड ग्रोथ चीन और वियतनाम को छोड़कर सभी देशों से बेहतर है।

भारत के लिए अवसर

दरअसल, भारत भारत बहुत सारे हाई स्किल्ड मैनुफैक्चरिंग गुड्स और सर्विसेज जैसे- कंप्यूटर सॉफ्टवेयर का एक्सपोर्ट करता है। लेकिन, अब चीन में दुनिया के अन्य देशों के लिए बहुत कम जगह बची है। यह समय भारत के लिए एक बेहतर अवसर का है।

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