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लड़कियों में साइंस के सपने:भारत में साइंस पढ़ने वाली लड़कियां अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस से ज्यादा, 2019-20 में लगभग 11 लाख साइंस में ग्रैजुएट हुईं

मुंबई5 दिन पहले
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भारत में हर साल साइंस और टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ (STEM) जैसे विषयों में अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस जैसे विकसित देशों के मुकाबले ज्यादा लड़कियां ग्रेजुएट बनती हैं। STEM ग्रेजुएट से जुड़े आंकड़ों की दिलचस्प बात यह है कि भारत में इन विषयों के नए ग्रेजुएट लड़कों की संख्या पिछले तीन साल से लगातार घट रही है जबकि लड़कियों की संख्या में इजाफा हो रहा है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी थी।

नए STEM ग्रेजुएट में लड़कियों की संख्या ज्यादा

प्रधान ने यह जवाब उस सवाल पर दिया जिसमें पूछा गया था कि पिछले तीन साल में देश में कितने STEM ग्रेजुएट हुए हैं और क्या लड़कियों की संख्या लड़कों से ज्यादा रही है। उन्होंने पिछले तीन साल के ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एडुकेशन (AISHE) के डेटा पेश किए। इस डेटा के मुताबिक, 2019-20 में 11.9 लाख लड़के STEM ग्रेजुएट हुए, जिनकी संख्या 2017-18 में 12.9 लाख थी। इस दौरान इन विषयों में ग्रेजुएट होने वाली लड़कियों की संख्या 10 लाख से बढ़कर 10.6 लाख हो गई।

भारत में STEM ग्रेजुएट लड़कियों का प्रतिशत 43%

वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के मुताबिक प्रतिशत के हिसाब से भारत में STEM ग्रेजुएट लड़कियों का प्रतिशत (43%) दूसरे विकसित देशों से खासा ज्यादा है। अमेरिका में STEM ग्रेजुएट लड़कियों का प्रतिशत 34%, UK में 38%, जर्मनी में 27% और फ्रांस में 32% है। प्रधान ने लड़कियों को STEM विषयों की पढ़ाई के लिए बढ़ावा देने वाली सरकारी योजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने विशेष रूप से लड़कियों के लिए नॉलेज इनवॉल्वमेंट रिसर्च एडवांसमेंट थ्रू नर्चरिंग (किरण) का उल्लेख किया। इस योजना का उद्देश्य लड़कियों को साइंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आने के लिए बढ़ावा देना है।

STEM विषयों में लड़कियों की दिलचस्पी बढ़ाने पर जोर

केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि सरकार ने कामकाजी महिला वैज्ञानिकों की स्थानांतरण से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए 'मोबिलिटी' प्रोग्राम शुरू किया है। उनके मुताबिक, ‘इंडो-US फेलोशिप फॉर वुमन इन STEMM’ (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, मैथ और मेडिसिन) भी लॉन्च किया गया है। सरकार ने यह योजना इसलिए शुरू की है ताकि भारतीय महिला वैज्ञानिकों, इंजनीयरों और टेक्नोलॉजिस्टों को 3 से 6 महीने के लिए अमेरिका के जानेमाने संस्थानों में इंटरनेशनल कोलैबरेटिव रिसर्च के मौके मिलें।

2018 में 42.73% था STEM ग्रेजुएट लड़कियों का प्रतिशत

STEM विषय पढ़ने वाली लड़कियों की संख्या बढ़ाने के लिए क्लास 9 से 12 तक की मेधावी लड़कियों के लिए कंसॉलिडेशन ऑफ यूनिवर्सिटी रिसर्च एंड एक्सीलेंस इन वुमन यूनिवसिर्टीज (क्यूरी) और विज्ञान ज्योति जैसी सरकारी स्कीमों के बारे में भी प्रधान ने बताया। 2016 में यहां के STEM ग्रेजुएट में लड़कियों का प्रतिशत 42.72% था, जबकि अमेरिका में 33.99%, जर्मनी में 27.14%, ब्रिटेन में 38.10%, फ्रांस में 31.81% और कनाडा में 31.43% था। भारत में नई STEM ग्रेजुएट लड़कियों का प्रतिशत 2017 में 43.93% और 2018 में 42.73% था।