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नीति आयोग के पूर्व वाइस चेयरमैन का बयान:कोविड-19 के कारण 9 लाख करोड़ का नुकसान, 7% ग्रोथ रेट के लिए वित्तीय प्रोत्साहन और कम ब्याज दरों की जरूरत

एक वर्ष पहले
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नीति आयोग के पूर्व वाइस चेयरमैन अरविंद पनगढ़िया ने कहा कि हमें अमेरिका और यूरोपियन यूनियन के साथ भी फ्री ट्रेड समझौता करना चाहिए। - Dainik Bhaskar
नीति आयोग के पूर्व वाइस चेयरमैन अरविंद पनगढ़िया ने कहा कि हमें अमेरिका और यूरोपियन यूनियन के साथ भी फ्री ट्रेड समझौता करना चाहिए।
  • बैंकों के रीकैपिटलाइजेशन और पीएसयू के प्राइवेटाइजेशन से बढ़ेगी ग्रोथ
  • बड़े पैमाने पर निजीकरण के साथ सड़कों-रेलने से धन जुटाया जाए
  • सर्विस और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ज्यादा ग्रोथ की आवश्यकता

नीति आयोग के पूर्व वाइस चेयरमैन अरविंद पनगढ़िया का कहना है कि भारत को भविष्य में 7 फीसदी ग्रोथ रेट के लिए वित्तीय प्रोत्साहन पैकेज और कम ब्याज दरों की जरूरत है। इसके अलावा बैंकों का तेजी से री-कैपिटलाइजेशन और कुछ पीएसयू का प्राइवेटाइजेशन किया जाए।

अप्रैल-जून के बीच 125 बिलियन डॉलर का नुकसान

ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन (एआईएमए) की ओर से सोमवार को आयोजित वर्चुअल कार्यक्रम में पनगढ़िया ने कहा कि कोविड-19 के कारण अप्रैल-जून के बीच भारत को 125 बिलियन डॉलर करीब 9 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के बाद अर्थव्यवस्था 7 फीसदी से ज्यादा की दर से ग्रोथ करेगी। इसके लिए मैं आरबीआई से कम ब्याज दरों की वकालत करता हूं। प्रमुख अर्थशास्त्रियों में शुमार पनगढ़िया ने कहा कि हमें कुछ वित्तीय प्रोत्साहन पैकेज और बैंकों के रि-कैपिटलाइजेशन की भी जरूरत होगी।

मई में घोषित किया था 21 लाख करोड़ का प्रोत्साहन पैकेज

केंद्र सरकार ने मई में 21 लाख करोड़ रुपए के वित्तीय प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की थी। कोरोनावायरस महामारी के कारण पैदा हुए आर्थिक संकट से निपटने के लिए इस पैकेज की घोषणा की गई थी। पनगढ़िया ने कहा कि हमें बड़े पैमाने पर निजीकरण के साथ-साथ धन जुटाने के लिए सड़कों और रेलवे का भी उपयोग करने की आवश्यकता है।

चालू वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था में गिरावट की संभावना

अधिकांश रेटिंग एजेंसियों और अर्थशास्त्रियों ने चालू वित्त वर्ष में देश की अर्थव्यवस्था में गिरावट की संभावना जताई है। एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) ने वित्त वर्ष 2020-21 में भारतीय अर्थव्यवस्था में 9 फीसदी की गिरावट का अनुमान जताया है। वहीं, गोल्डमैन सैशे ने 14.8 फीसदी की गिरावट की बात कही है। फिच रेटिंग्स ने 10.5 फीसदी की गिरावट का अनुमान जताया है।

कोरोना से पहले ही धीमी थी आर्थिक ग्रोथ

पनगढ़िया ने कहा कि भारत की आर्थिक ग्रोथ कोरोना संक्रमण आने के पहले से ही धीमी थी। वित्तीय सेक्टर में भारी तनाव के कारण ग्रोथ धीमी थी। इसलिए हमें अब बैंकों के रि-कैपिटलाइजेशन की जरूरत है। यदि ऐसा नहीं होता है तो एनपीए बढ़ेगा और भारतीय अर्थव्यवस्था की 7 से 7.5 फीसदी ग्रोथ के लिए यह अच्छा नहीं रहेगा। इसलिए हमें पिछली गलतियों को नहीं दोहराना चाहिए।

4 फीसदी से ज्यादा ग्रोथ नहीं कर सकता एग्री सेक्टर

फार्म सेक्टर के बारे में बात करते हुए पनगढ़िया ने कहा कि एग्रीकल्चर हमारे लिए काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत के बहुत सारे लोग इसी पर निर्भर हैं। पनगढ़िया ने कहा कि एग्रीकल्चर सेक्टर 4 फीसदी से ज्यादा ग्रोथ नहीं कर सकता है। ऐसे में हमें सर्विस और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ज्यादा ग्रोथ की आवश्यकता है।

पहली तिमाही में जीडीपी में 23.9% की गिरावट

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 23.9 फीसदी की गिरावट रही है। कोरोनावायरस के कारण लगाए गए लॉकडाउन के चलते यह गिरावट आई है। हालांकि, इस अवधि में कृषि क्षेत्र में 3.4 फीसदी की ग्रोथ रही है।

चीन भरोसेमंद कारोबारी साथी नहीं

चीन के साथ कारोबार जारी रहने पर पनगढ़िया ने कहा कि भारत को अपने पड़ोसी देशों के साथ कारोबार जारी रखना चाहिए। लेकिन चीन भरोसेमंद कारोबारी साथी नहीं है। उन्होंने कहा कि हमें अमेरिका और यूरोपियन यूनियन के साथ भी फ्री ट्रेड समझौता करना चाहिए।

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