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सरकार को ट्रेड एक्सपर्ट की सलाह:भारत को EU और UK के साथ मुक्त व्यापार समझौता करने के लिए तेजी से प्रयास करना चाहिए

नई दिल्ली2 वर्ष पहले
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विशेषज्ञों ने कहा कि चूंकि EU-UK समझौते के दायरे में सर्विस सेक्टर नहीं आता है, इसलिए भारत दोनों क्षेत्रों में IT, आर्किटेक्चर, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और इंजीनियरिंग जैसे सर्विस सेक्टर्स में अवसर तलाश सकता है - Dainik Bhaskar
विशेषज्ञों ने कहा कि चूंकि EU-UK समझौते के दायरे में सर्विस सेक्टर नहीं आता है, इसलिए भारत दोनों क्षेत्रों में IT, आर्किटेक्चर, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और इंजीनियरिंग जैसे सर्विस सेक्टर्स में अवसर तलाश सकता है
  • UK-EU डील से भारतीय वस्तुओं को ज्यादा लाभ नहीं मिलेगा, लेकिन हम दोनों बाजारों में सर्विसेज सेक्टर्स में लाभ उठा सकते हैं
  • समझौता करने से UK मार्केट में हमें ज्यादा लाभ मिलेगा, क्योंकि हम इंग्लिश भाषी देश हैं

बेग्जिट के बाद यूरोपीय संघ (EU) और ब्रिटेन (UK) के बीच समझौता हो जाने के बाद अब भारत को दोनों क्षेत्रों के साथ अलग-अलग मुक्त व्यापार समझौता (FTA) करने के लिए तेजी से प्रयास करना चाहिए। ऐसा विशेषज्ञों को मानना है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन और EU के समझौते से भारत को क्या लाभ मिल सकता है इस बारे में अभी सटीक तरीके से कुछ कहा नहीं जा सकता है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते से भारतीय वस्तुओं को ज्यादा फायदा नहीं दिख रहा है।

विशेषज्ञों ने कहा कि चूंकि EU-UK समझौते के दायरे में सर्विस सेक्टर नहीं आता है, इसलिए भारत दोनों क्षेत्रों में IT, आर्किटेक्चर, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और इंजीनियरिंग जैसे सर्विस सेक्टर्स में अवसर तलाश सकता है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस (FIEO) के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा कि भारतीय वस्तुओं को ज्यादा लाभ नहीं मिलेगा, लेकिन हम UK और EU दोनों बाजारों में सर्विसेज सेक्टर्स में लाभ उठा सकते हैं। UK मार्केट में हमें ज्यादा लाभ मिलेगा, क्योंकि हम इंग्लिश भाषी देश हैं।

FTA वार्ता में EU के साथ दिक्कत हो रही थी, UK का रवैया अलग हो सकता है

उन्होंने कहा कि हमें UK और EU दोनों के साथ FTA वार्ता के लिए प्रयास करना चाहिए। वियतनाम जैसे भारत के प्रतिस्पर्धियों अपैरल और मेराइन गुड्स जैसे सेक्टर्स में ज्यादा ड्यूटी एडवांटेज मिलेगा। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर बिश्वजीत धर ने भी कहा कि EU के साथ FTA वार्ता में कई मुद्दों पर गतिरोध था। लेकिन ब्रेग्जिट के बाद UK का इन मुद्दों पर अलग रवैया दिख सकता है। इसलिए भारत को दोनों क्षेत्रों के साथ फिर से FTA वार्ता करनी चाहिए।

FIEO ने ब्रिटेन के साथ एक समय सीमा के अंदर FTA के लिए MoU पर हस्ताक्षर करने की सलाह दी

FIEO के प्रेसिडेंट शरद कुमार सराफ ने भी कहा कि भारत को दोनों क्षेत्रों के साथ FTA के लिए प्रयास तेज करना चाहिए। हमने सरकार से अनुरोध किया है कि अगले महीने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन जब भारत आएंगे, तब उनके साथ सरकार एक MoU पर हस्ताक्षर कर ब्रिटेन के साथ FTA वार्ता पूरी करने के लिए डेडलाइन तय करे। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन ट्रेड (IIFT) के प्रोफेसर राकेश मोहन जोशी ने भी कहा कि EU और UK के साथ ट्रेड डील करने के बाद भारत को दोनों क्षेत्रों की मांग पूरी करने में ज्यादा सुविधा होगी।

UK 31 दिसंबर को EU से बाहर निकल जाएगा

अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (AEPC) के चेयरमैन ए शक्तिवेल ने कहा कि UK के साथ FTA होने से ब्रिटेन में भारतीय कारोबारियों को होने वाली कस्टम ड्यूटी की दिक्कत खत्म करने में मदद मिलेगी। ब्रिटेन का यूरोपीय संघ के साथ गुरुवार को ऐतिहासिक पोस्ट ब्रेग्जिट समझौता हो गया। दोनों पक्षों ने मुक्त व्यापार समझौता कर लिया। समझौता करने की अंतिम समय सीमा 31 दिसंबर थी। उस दिन ब्रिटेन EU से पूरी तरह से अलग हो जाएगा। 2019-20 में भारत और UK का द्वीपक्षीय व्यापार घटकर 15.5 अरब डॉलर पर आ गया, जो 2018-19 में 16.9 अरब डॉलर का था।