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कंजम्पशन ग्रोथ को मिलेगा बढ़ावा:US और चीन के बाद भारत में होंगी सबसे ज्यादा हाई इनकम फैमिलीज, एक दशक में एशिया के शहरों में चौथे नंबर पर पहुंच सकती है मुंबई

नई दिल्ली3 महीने पहले
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भारत इस दशक के अंत तक रोजाना 70 डॉलर (लगभग 5,000 रुपए) और उससे ज्यादा खर्च करने वाले परिवारों वाले देशों की सूची में अमेरिका और चीन के तीसरे नंबर पर आ सकता है। यह जानकारी मैकेंजी ग्लोबल इंस्टीट्यूट (MGI) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में दी है जिसके मुताबिक, इस लिहाज से एशिया में मुंबई चौथे नंबर पर रह सकता है।

इंडिया में कंजम्पशन 1.8 लाख करोड़ डॉलर बढ़ सकती है

मैकेंजी की बिजनेस और इकोनॉमिक रिसर्च यूनिट MGI का कहना है कि एशिया में अगले एक दशक में 10 लाख करोड़ डॉलर की अतिरिक्त बिक्री के मौके बन सकते हैं। उसकी स्टडी के मुताबिक अगले एक दशक में ग्लोबल कंजम्पशन ग्रोथ में आधा योगदान एशिया का होगा, जबकि इंडिया में इस दौरान कंजम्पशन 1.8 लाख करोड़ डॉलर बढ़ सकती है।

टोटल कंजम्पशन ग्रोथ में एशिया का शेयर आधे तक पहुंचेगा

अगले एक दशक में कंजम्पशन ग्रोथ को लेकर मैकेंजी की पार्टनर महिमा चुग कहती हैं, 'एशिया में कोविड की वजह से हाल फिलहाल खपत में कमी रह सकती है। लेकिन अगले दशक में टोटल ग्लोबल कंजम्पशन ग्रोथ में इसका योगदान आधे तक पहुंच जाएगा।'

कंजम्पशन ग्रोथ में हाई इनकम वाले परिवारों में बढ़ोतरी का हाथ

महिमा का कहना है कि इंडिया की ग्रोथ स्टोरी बरकरार रखने में बड़ा हाथ हाई इनकम वाले परिवारों की संख्या में बढ़ोतरी का होगा। उनके मुताबिक इसके अलावा परिवारों में सदस्यों की संख्या लगातार घटने, कंज्यूमर क्लास का साइज दोगुना होने, इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले बुजुर्गों की संख्या बढ़ने और ईकॉमर्स की ग्रोथ का भी योगदान होगा।

डेढ़ दशक में 16% घटी है भारतीय परिवारों में सदस्यों की संख्या

इन फैक्टरों को आंकड़ों के हिसाब से देखें तो भारतीय परिवारों में सदस्यों की संख्या पिछले डेढ़ दशक में औसतन 16% घटी है। जनसंख्या संबंधी आंकड़ों के मुताबिक, 1999 में यहां के एक परिवार में औसतन पांच से ज्यादा (5.5) लोग होते थे। 2015 में यह आंकड़ा घटकर पांच से कम (4.5) हो गया।

भारत में 55% तक पहुंच सकती है कंज्यूमिंग क्लास की आबादी

मैकेंजी की स्टडी के मुताबिक, 2030 तक भारत में कंज्यूमिंग क्लास की आबादी लगभग 55% तक पहुंच सकती है। यहां अभी कंज्यूमिंग क्लास की आबादी लगभग एक चौथाई यानी 24% है, जो 2000 में 9% थी। बड़ी बात तो यह है कि एशियाई कंज्यूमिंग क्लास की एक चौथाई से ज्यादा (27%) आबादी इंडिया में रहती है।

रोज 800 रुपए खर्च करने वाला परिवार होता है कंज्यूमिंग क्लास

कंज्यूमिंग क्लास में वैसे लोग होते हैं, जो 2011 में परचेजिंग पावर पैरिटी (PPP) के हिसाब से रोजाना 11 डॉलर यानी लगभग 800 रुपए खर्च करते हैं। MGI के डायरेक्टर जॉनथन वूजेल कहते हैं, 'अगले एक दशक और आगे एशिया की कंज्यूमर स्टोरी में बदलाव सिर्फ साइज और ग्रोथ के हिसाब से नहीं होगा। कंज्यूमर मार्केट में डायवर्सिटी भी बढ़ेगी।'

60 साल से ज्यादा के बुजुर्गों की खपत 1.6 गुना ज्यादा रह सकती है

मैकेंजी का मानना है कि इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले बुजुर्गों की संख्या बढ़ते रहने से उनकी खपत दोगुनी रफ्तार से बढ़ सकती है। आंकड़ों के हिसाब से 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों की खपत बाकी से 1.6 गुना ज्यादा रह सकती है। भारत की कंजम्पशन स्टोरी को बढ़ावा 2025 तक ई-कॉमर्स में सालाना 25% की ग्रोथ की संभावना से भी मिलेगा।

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