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IMF का बयान:धीरे-धीरे रिकवरी कर रही है भारतीय अर्थव्यवस्था, चालू वित्त वर्ष में 7.5% गिरावट का अनुमान

नई दिल्ली5 महीने पहले
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IMF के मुख्य प्रवक्ता गैरी राइस का कहना है कि अर्थव्यवस्था में रिकवरी के लिए भारत सरकार ने फिस्कल, मॉनीटर और फाइनेंशियल सेक्टर के लिए कई उपायों की घोषणा की है। - Dainik Bhaskar
IMF के मुख्य प्रवक्ता गैरी राइस का कहना है कि अर्थव्यवस्था में रिकवरी के लिए भारत सरकार ने फिस्कल, मॉनीटर और फाइनेंशियल सेक्टर के लिए कई उपायों की घोषणा की है।
  • ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए मौजूदा कार्यक्रमों को तेजी से लागू करना चाहिए
  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने V-शेप में रिकवरी का अनुमान जताया

इंटरनेशनल मॉनीटरी फंड (IMF) ने गुरुवार को कहा कि कोरोनावायरस से प्रभावित भारतीय अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे रिकवरी कर रही है। IMF ने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग में सुधार के कारण सितंबर तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था ने अनुमान से ज्यादा रिकवरी की है और चालू वित्त वर्ष में GDP में 7.5 की गिरावट रह सकती है। बेहतर उपभोक्ता मांग के कारण इसमें और सुधार हो सकता है।

महामारी से बुरी तरह प्रभावित हुई भारतीय अर्थव्यवस्था

वॉशिंगटन में IMF के मुख्य प्रवक्ता गैरी राइस ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था महामारी से बुरी तरह प्रभावित हुई थी, लेकिन अब यह धीरे-धीरे रिकवरी कर रही है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में रिकवरी के लिए भारत सरकार ने फिस्कल, मॉनीटर और फाइनेंशियल सेक्टर के लिए कई उपायों की घोषणा की है। इसके अलावा कारोबारों, कृषि और हाउसहोल्ड के लिए भी कई उपाय किए गए हैं।

मौजूदा कार्यक्रमों को तेजी से लागू करना चाहिए

गैरी ने कहा कि ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए सरकार को मौजूदा कार्यक्रमों को तेजी से लागू करना चाहिए। इसके अलावा इन कार्यक्रमों का दायरा बढ़ाने की आवश्यकता है। IMF की मंत्री स्तरीय कमेटी इंटरनेशनल मॉनीटरी एंड फाइनेंशियल कमेटी में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में V-शेप की रिकवरी दिख रही है।

वित्त मंत्रालय के मासिक रिव्यू में भी V-शेप की रिकवरी का अनुमान

भारतीय अर्थव्यवस्था में V-शेप की रिकवरी दिख रही है, क्योंकि इस कारोबारी साल की जुलाई-सितंबर तिमाही में GDP की विकास दर जून तिमाही के मुकाबले 23% रही। यह बात वित्त मंत्रालय की ओर से नवंबर के लिए जारी मासिक इकॉनोमिक रिव्यू में कही गई। जून तिमाही में देश की GDP साल दर साल आधार पर 23.9% गिर गई थी, लेकिन सितंबर तिमाही में गिरावट का स्तर घटकर महज 7.5% रह गया। रिव्यू में कहा गया कि इस कारोबारी साल की दूसरी तिमाही में ही V-शेप रिकवरी दिखने का मतलब यह है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत है और तेजी से सुधर सकती है।

विकसित देशों में महंगाई घटी, जबकि उभरती अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई बढ़ी

रिव्यू रिपोर्ट के मुताबिक विकसित देशों में महंगाई घटी है, जबकि उभरती अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई बढ़ी है। इसका मतलब यह है कि कमजोर अर्थव्यवस्थाओं में सप्लाई-साइड डिसरप्शन का प्रभाव अधिक पड़ा है। शेयर बाजार के रुझान बताते हैं कि निवेशकों में आशा का स्तर काफी ऊंचा बना हुआ है। नवंबर में डॉलर के कमजोर होने से दुनिया के बाकी हिस्सा में विकास की संभावना मजबूत हुई है।

दिसंबर तिमाही में देश में आर्थिक अनिश्चितता नहीं रहने का अनुमान

तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) के बारे में सरकारी रिपोर्ट में कहा गया है कि नवंबर में भले ही कुछ संकेतकों में गिरावट देखी गई है, लेकिन दुनियाभर देखने वाली आर्थिक अनिश्चितता भारत में दिखने की उम्मीद नहीं है। रबी फसलों का रकबा बढ़ा है और जलाशयों में पानी भरा हुआ है। यह इस कारोबारी साल में कृषि सेक्टर का उत्पादन बढ़ने के बारे में शुभ संकेत है।

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