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क्रूड का 70 डॉलर के नीचे रहना जरूरी:तेल निर्यातक देशों से बात कर रही भारत सरकार, उत्पादकों और उपभोक्ताओं के लिए 'वाजिब' दाम की दलील

नई दिल्लीएक महीने पहले
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सांकेतिक तस्वीर। - Dainik Bhaskar
सांकेतिक तस्वीर।

पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम में तेजी तब तक रह सकती है जब तक कि क्रूड के दाम में कमी न आए, यह स्वाभाविक है। ऐसे में भारत सरकार क्रूड का दाम 70 डॉलर प्रति बैरल तक कराने के लिए तेल उत्पादक देशों के साथ बातचीत कर रही है। सरकार का कहना है कि अगर क्रूड इससे महंगा रहता है तो उन पर नेगेटिव असर होगा क्योंकि इससे ग्लोबल इकोनॉमिक रिवाइवल में सुस्ती आएगी। क्रूड की मांग घटेगी, जिस पर इलेक्ट्रिक व्हीकल के बढ़ते इस्तेमाल के चलते पहले से ही दबाव बन रहा है। ये बातें सत्ता पक्ष के एक पॉलिसी मेकर ने कही है।

मोदी कल ग्लोबल ऑयल एंड गैस सेक्टर के दिग्गजों से बात करेंगे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 19 अक्टूबर यानी कल शाम छह बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ग्लोबल ऑयल एंड गैस सेक्टर के दिग्गज CEO और एक्सपर्ट्स से बात करेंगे। मोदी 2016 से हर साल इस सेक्टर के अहम मुद्दों के अलावा भारत में उनके सहयोग और निवेश की संभावनाओं पर चर्चा करते हैं। इस मौके पर पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी मौजूद रहेंगे।

हाइड्रोकार्बन सेक्टर में खोज और उत्पादन को बढ़ावा देने पर चर्चा होगी

ऑयल एंड गैस सेक्टर के टॉप CEO और एक्सपर्ट्स से बातचीत में हाइड्रोकार्बन सेक्टर में खोज और उत्पादन को बढ़ावा देने के अलावा देश को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भरता बनाने और गैस आधारित इकोनॉमी बनाने और उत्सर्जन में कमी लाने पर चर्चा होगी। क्लीन एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन इकोनॉमी, बायोफ्यूल प्रॉडक्शन और वेस्ट टू वेल्थ क्रिएशन को लेकर भी बातचीत होगी।

तेल उत्पादकों और उपभोक्ताओं के लिए 'वाजिब' दाम रखना सही

कुछ अहम राज्यों में विधानसभा चुनावों से पहले पेट्रोल और डीजल की रिकॉर्ड हाई कीमतों के बीच पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी दिग्गज तेल उत्पादक देशों के ऑयल मिनिस्टरों से बातचीत कर रहे हैं। दबाव का रास्ता अपनाने के पक्षधर पिछले पेट्रोलियम मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान से उलट पुरी उनके सामने बाजार में स्थिरता बनाए रखने की दलील रख रहे हैं। पुरी का कहना है कि तेल का ऐसा 'संतुलित' मूल्य रखना सही रहेगा जो तेल उत्पादकों और उपभोक्ताओं के लिए 'वाजिब' हो।

UPA सरकार के ऑयल बॉन्ड के बोझ का रोना रो रही मौजूदा सरकार

पॉलिसीमेकर ने कहा, 'सरकार चाहती है कि पेट्रोल और डीजल के दाम घटें लेकिन हमें जरूरत का 85% तेल आयात करना पड़ता है। आयात पर इतनी ज्यादा निर्भरता होने की वजह से पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम घटाने के लिए ज्यादा कुछ नहीं किया जा सकता। इसके अलावा UPA सरकार के ऑयल बॉन्ड का बोझ भी बना हुआ है।'

ज्यादा सेंट्रल एक्साइज और वैट के चलते पेट्रोल-डीजल के दाम ऊंचे

ब्रेंट क्रूड का दाम लगभग 85 डॉलर प्रति बैरल हो गया है। पेट्रोल और डीजल के दाम 100 रुपए प्रति लीटर से ऊपर चल रहे हैं। यह ज्यादा सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी और वैट लगने की वजह से हो रहा है। रसोई गैस यानी LPG की कीमत 900 रुपए से ऊपर चल रही है। इसके अलावा पिछले साल सब्सिडी खत्म किए जाने से घरों का बजट बिगड़ रहा है। सरकार का कहना है कि एक्साइज ड्यूटी फिक्स्ड रेट से लगती है। लेकिन वैट पर्सेंटेज में लगता है जो बेस रेट बढ़ने पर अपने आप बढ़ जाता है।

ऑयल पर बढ़ाई गई एक्साइज ड्यूटी से जनकल्याणकारी योजनाओं की फंडिंग

पॉलिसीमेकर ने कहा, 'एक्साइज ड्यूटी पिछले साल तब बढ़ाई गई थी जब ऑयल गिरकर 19 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया था। इसी टैक्स से हम उज्जवला स्कीम के तहत गरीब और कमजोर तबके के लोगों को रसोई गैस का फ्री कनेक्शन और लॉकडाउन के दौरान गरीबों को मुफ्त अनाज और गैस दे पाए। अब मुफ्त टीकाकरण करा रहे हैं। अब जबकि सरकार ईंधन पर टैक्स घटाने, उसे जीएसटी के दायरे में लाने की बात कर रही है तो कोई राज्य सामने नहीं आ रहा। ऐसे में सरकार जनकल्याणकारी योजनाओं या कोविड पर रोकथाम के उपायों और ऑयल बॉन्ड के पेमेंट के लिए कहां से पैसे लाएगी?

सब्सिडी खास वर्ग के लोगों के लिए होती है, सबको सब्सिडी अब नहीं

LPG सब्सिडी के बाबत उन्होंने कहा कि लोगों को यूटिलिटी और सर्विसेज के लिए भुगतान करना ही होगा। किसी भी तरह की सब्सिडी खास वर्ग के लोगों के लिए होती है। इसलिए उज्जवला कैटेगरी के कनेक्शन वालों को LPG पर सब्सिडी मिलती रहेगी। लेकिन सबको गैस के लिए सब्सिडी वाली व्यवस्था फिर से लागू नहीं की जाएगी।

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