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महंगे तेल से कंपनियों की बंपर कमाई:पेट्रोल-डीजल से हमें रिकॉर्ड महंगाई मिली, लेकिन इंडियन ऑयल ने कमाया रिकॉर्ड 24 हजार करोड़ का मुनाफा

नई दिल्ली5 महीने पहले

मंगलवार को ही आए देश की सबसे बड़ी तेल कंपनी इंडियन ऑयल के वित्तीय नतीजे बताते हैं कि कंपनी ने मुनाफे के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। जनवरी से मार्च के दौरान जब यह कहा जा रहा था कि तेल कंपनियों को प्रति लीटर 9 रुपए तक नुकसान हो रहा है, उस तिमाही में इंडियन ऑयल ने 6,021.88 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया। देश के पेट्रोलियम बाजार में कंपनी की करीब आधी हिस्सेदारी है।

इंडियन ऑयल देश की सबसे बड़ी तेल कंपनी है। वित्तीय नतीजों के मुताबिक, 2020-21 में कंपनी की कंसोलिडेटेड आय 7.36 लाख करोड़ रुपए रही। कंपनी के निदेशक-वित्त संदीप गुप्ता ने कहा, यह समान वित्त वर्ष में किसी भी कंपनी की आय से अधिक है। कंपनी को इस दौरान 24,184.10 करोड़ रुपए का शुद्ध मुनाफा हुआ है, जो अब तक का रिकॉर्ड है।

मार्च के आखिरी 10 दिन में बढ़े थे पेट्रोल-डीजल के दाम
इंडियन ऑयल ने पिछले वित्त वर्ष के दौरान निर्यात सहित 864.07 लाख टन उत्पाद की बिक्री की थी। एक जनवरी से 21 मार्च तक पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर थे। मार्च के आखिरी 10 दिनों में नौ दिन कीमतों में इजाफा हुआ था।

देश में 15 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच चुकी है महंगाई
केंद्र सरकार 2012-13 से नई सीरीज से थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के आंकड़े जारी कर रही है। इस हिसाब से 15.08% दस साल का सबसे ऊंचा आंकड़ा है। अप्रैल 2021 से WPI आधारित थोक महंगाई 13वें महीने 10% से अधिक बनी है। वहीं खाने-पीने की चीजों, पेट्रोल-डीजल और अन्य कमोडिटी के दाम बढ़ने से अप्रैल में थोक महंगाई दर रिकॉर्ड 15.08% के स्तर पर पहुंच गई। यह पिछले महीने (मार्च में) 14.55% और एक साल पहले यानी अप्रैल 2021 में 10.74% थी।

थोक महंगाई दर का रिटेल पर भी दिखता है असर
बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस कहते हैं WPI में मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स का 64.23% वेटेज है, जबकि कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) यानी रिटेल में कम वेटेज है। थोक में खाने-पीने की चीजें महंगी होती हैं तो CPI पर कम असर होता है। WPI में सर्विसेस शामिल नहीं। CPI में हेल्थ, एजुकेशन व ट्रांसपोर्ट भी हैं।