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रेवेन्यू की कमी से मिलेगी राहत:4 साल बाद सरकार अगले साल मार्च में टेलीकॉम स्पेक्ट्रम की करेगी नीलामी

मुंबईएक वर्ष पहले
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बता दें कि सरकार इस समय कोरोना की वजह से टैक्स और अन्य साधनों से आने वाले रेवेन्यू की कमी का सामना कर रही है। ऐसे में स्पेक्ट्रम की नीलामी से सरकार को इस मोर्चे पर कुछ राहत मिल सकती है - Dainik Bhaskar
बता दें कि सरकार इस समय कोरोना की वजह से टैक्स और अन्य साधनों से आने वाले रेवेन्यू की कमी का सामना कर रही है। ऐसे में स्पेक्ट्रम की नीलामी से सरकार को इस मोर्चे पर कुछ राहत मिल सकती है
  • सरकार ने कहा कि स्पेक्ट्रम की नीलामी की शर्तें 2016 की ही रहेंगी
  • स्पेक्ट्रम की नीलामी का मूल्य 3.92 लाख करोड़ रुपए रहने की उम्मीद

करीबन 4 साल बाद सरकार एक बार फिर टेलीकॉम स्पेक्ट्रम की नीलामी करने वाली है। यह नीलामी मार्च में की जाएगी। कैबिनेट की बुधवार को हुई बैठक में यह फैसला लिया गया। स्पेक्ट्रम की नीलामी की शर्तें 2016 की ही रहेंगी। इस नीलामी का वैल्यूएशन 3,92,332 करोड़ रुपए रहने की उम्मीद है।

चालू वित्त वर्ष के अंत तक होगी नीलामी

केंद्र सरकार की कैबिनेट ने बुधवार को स्पेक्ट्रम के 2,251 मेगाहर्टज (MHz) की नीलामी को मंजूरी दे दी है। इसे चालू वित्त वर्ष 2020-21 के अंत तक किया जाएगा। टेलीकॉम मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने यह जानकारी दी। कुल 2,251 मेगाहर्टज में सरकार 700, 800, 900, 1800, 2100, 2300 और 2500 मेगाहर्टज के बैंड्स की नीलामी करेगी। इस महीने में सरकार अप्लीकेशन के लिए नोटिस जारी करेगी।

1.33 लाख करोड़ के रेवेन्यू का लक्ष्य

बता दें कि 2020-21 के बजट में सरकार ने टेलीकम्युनिकेशन सेवाओं से 1.33 लाख करोड़ रुपए के रेवेन्यू का लक्ष्य रखा है। इसमें स्पेक्ट्रम के साथ-साथ लाइसेंसिंग फीस और अन्य रिसिप्ट शामिल है। 2019-20 में केंद्र सरकार को टेलीकम्युनिकेशन से 58,900 करोड़ रुपए का रेवेन्यू मिला था। जबकि बजट में इसका लक्ष्य 50 हजार 250 करोड़ रुपए रखा गया था।

2016 जैसा हो सकता है हाल

विश्लेषकों का मानना है कि स्पेक्ट्रम की नीलामी का हाल 2016 जैसा हो सकता है। उस समय काफी एयरवेज की बिक्री नहीं हो पाई थी। कारण यह था कि सरकार ने कीमतें ज्यादा रखी थी। इस बार भी सरकार ने कीमतों को काफी ज्यादा रखा है। 2016 में 700 मेगाहर्टज और 900 मेगार्टज की बिक्री नहीं हो पाई थी।

रिलायंस की है तैयारी

आने वाले स्पेक्ट्रम की नीलामी पर काफी कुछ निर्भर है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने हाल में कहा कि अगले साल जुलाई-अगस्त तक वे 5 जी को लांच करेंगे। उनकी टेलीकॉम कंपनी जियो इस मामले में तैयारी कर रही है। रिलायंस जियो केवल 4 जी सेवा देती है। सितंबर में टेलीकॉम विभाग को भेजे गए पत्र में जियो ने ने अपील किया था कि स्पेक्ट्रम की नीलामी जल्द की जाए।

5 जी को रफ्तार देने की मांग

मुकेश अंबानी ने भी हाल में एक कार्यक्रम में स्पेक्ट्रम की नीलामी और 5 जी को रफ्तार देने की मांग की थी। हालांकि इस स्पेक्ट्रम की नीलामी में भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया दिलचस्पी नहीं ले रही हैं। रिलायंस जियो दिवालिया हो चुकी रिलायंस कम्युनिकेशन के 800 मेगाहर्टज के स्पेक्ट्रम का उपयोग कर रही है। इसका 21 सर्कल में से 18 सर्कल का लाइसेंस जुलाई-अगस्त 2021 में खत्म होगा।

बता दें कि सरकार इस समय कोरोना की वजह से टैक्स और अन्य साधनों से आने वाले रेवेन्यू की कमी का सामना कर रही है। ऐसे में स्पेक्ट्रम की नीलामी से सरकार को इस मोर्चे पर कुछ राहत मिल सकती है।