बढ़ती कीमतों से आयोग सख्त:CCI ने शुरू की स्टील बनाने वाली कंपनियों की स्क्रूटनी, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी लगा चुके हैं आरोप

मुंबई10 महीने पहले
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भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) स्टील की लगातार बढ़ती कीमतों पर सख्त हुआ है। क्योंकि इससे ऑटो सहित इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर प्रभावित हो रहा है। अब आयोग कीमतों में बढ़ोतरी की पड़ताल के लिए स्टील निर्माता कंपनियों की स्क्रूटनी करेगा। इसका मुख्य उद्देश्य स्टील की लगातार बढ़ रही कीमत की गणित को समझना है। हालांकि, आयोग को इससे संबंधित कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है।

सरकारी रियायतों के बावजूद बढ़ रहे दाम
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक CCI यह जांच कर रहा है कि जून 2020 के बाद स्टील कंपनियां आपसी गठजोड़ करके कीमतें बढ़ा तो नहीं रही हैं। वो भी ऐसे वक्त में जब सरकार ने चीन, वियतनाम और साउथ कोरिया से आने वाले फ्लैट रोल्ड, एल्यूमीनियम या जिंक प्लेटेड स्टील के इंपोर्ट पर 13.07 डॉलर से लेकर 173.1 डॉलर प्रति टन पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाई है। तब से अब तक स्टील की कीमतें करीब आधी बढ़ गई हैं।

केंद्रीय मंत्री भी आरोप लगा चुके हैं
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने जनवरी में स्टील निर्माता कंपनियों पर कार्टेलाइजेशन का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि वह मामले पर सीधे तौर पर कोई कदम तो नहीं उठा पाएंगे, लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय में इस बात को जरूर रखेंगे। क्योंकि ज्यादातर कंपनियों के पास खुद का आयरन ओर खदान है, बिजली और श्रमिकों पर होने वाले खर्चे भी कम हैं, बावजूद इसके दाम बढ़ाना समझ के परे है। उन्होंने इस सेक्टर के लिए एक रेगुलेटर नियुक्त करने की भी बात कही थी।

आगे भी दाम बढ़ने का अनुमान
पिछले साल दिसंबर में रेटिंग कंपनी क्रिसिल ने 2021 में मार्च तक स्टील की कीमत में बढ़ोतरी का अनुमान दिया था। क्रिसिल के मुताबिक लगातार बढ़ोतरी के चलते स्टील की कीमतें 13,800 रुपए प्रति टन तक बढ़ सकती हैं। दूसरी ओर, महंगे स्टील के चलते ऑटोमोबाइल कंपनियां जनवरी में गाड़ियों के दाम बढ़ा चुकी हैं। इसमें मारुति सुजुकी, महिंद्रा एंड महिंद्रा के नाम शामिल हैं।

पहले भी हो चुकी है पड़ताल, दिसंबर में सीमेंट कंपनियों पर लगा था भारी जुर्माना
हालांकि यह पहली बार नहीं है जब आयोग स्टील कंपनियों की स्क्रूटनी करेगा। इससे पहले CCI ने 2008 से लेकर 2014 तक स्टील निर्माता कंपनियों जैसे सेल और टाटा स्टील की जांच कर चुकी है। लेकिन इनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला था। इसी तरह के मामलों में पिछले साल दिसंबर सीमेंट कंपनियों के कार्योलयों में रेड पड़ी थी। आयोग ने 11 सीमेंट कंपनियों पर 6,700 करोड़ रुपए का जुर्माना ठोका था। इसमें अल्ट्राटेक सीमेंट, रैमको, एसीसी सहित अन्य शीमिल थे।