महामारी का GDP पर असर:अगले 5 साल तक देश की विकास दर 4.5% रह सकती है, जो कोरोना संकट से पहले 6% से ज्यादा थी

नई दिल्लीएक वर्ष पहले
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RBI के मुताबिक एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था ऐतिहासिक टेक्निकल रिसेशन में फंस गई है, अनलॉक के बाद GDP में भारी उछाल का अनुमान है, लेकिन लॉकडाउन का कुछ असर लंबे समय तक रहने वाला है, सरकार GDP के आंकड़े 27 नवंबर को जारी करेगी - Dainik Bhaskar
RBI के मुताबिक एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था ऐतिहासिक टेक्निकल रिसेशन में फंस गई है, अनलॉक के बाद GDP में भारी उछाल का अनुमान है, लेकिन लॉकडाउन का कुछ असर लंबे समय तक रहने वाला है, सरकार GDP के आंकड़े 27 नवंबर को जारी करेगी
  • ऑक्सफोर्ड इकॉनोमिक्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस दशक के मध्य तक देश का उत्पादन प्री-कोविड स्तर के मुकाबले 12% नीचे रह सकता है
  • 2020 के पहले से मौजूद स्ट्रेस्ड कॉरपोरेट बैलेंसशीट, बैंकों का NPA, NBFC संकट और श्रम बाजार की कमजोरी जैसी समस्याएं विकास दर को घटाएंगी

कोरोनावायरस महामारी का संकट खत्म होने के बाद भी भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच सबसे ज्यादा प्रभावित अर्थव्यवस्था बना रहेगा। ऑक्सफोर्ड इकॉनोमिक्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस दशक के मध्य तक देश का उत्पादन प्री-कोविड स्तर के मुकाबले 12 फीसदी नीचे रहने की आशंका है। दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए इकॉनोमिक्स की प्रमुख प्रियंका किशोर ने रिपोर्ट में कहा कि महामारी के पहले से बैलेंसशीट पर बन रहा तनाव और भी ज्यादा बढ़ सकता है।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रियंका किशोर ने कहा कि अगले 5 साल तक भारत की विकास दर 4.5 फीसदी रह सकती है, जो महामारी से पहले 6.5 फीसदी थी। 2020 से पहले से ही विकास को प्रभावित कर रही समस्या आने वाले वर्षों में और भी बढ़ सकती है। इन समस्याओं में तनावग्रस्त कॉरपोरेट बैलेंसशीट, बैंकों का भारी-भरकम NPA, NBFC का संकट और श्रम बाजार की कमजोरी शामिल हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था के पहलू दुनिया में सबसे खराब हालत में हैं और ये देश की विकास दर को महामारी से पहले के स्तर से नीचे ला सकते हैं।

अर्थव्यवस्था में गिरावट के बावजूद प्रधानमंत्री GDP को 5 लाख करोड़ डॉलर पर पहुंचाने के लक्ष्य पर कायम हैं

अर्थव्यवस्था में गिरावट के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की इकॉनोमी को 2.8 लाख करोड़ डॉलर से बढ़ाकर 5 लाख करोड़ डॉलर पर पहुंचाने के लक्ष्य पर अडिग बने हुए हैं। सरकार ने विकास को तेज करने के लिए कई कदम उठाए हैं, लेकिन ये कदम बाजार में मांग बढ़ाने में सफल नहीं हो पा रहे हैं, इसके कारण भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को भी अपनी ओर से काफी कुछ करना पड़ रहा है। पिछले सप्ताह RBI द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था ऐतिहासिक टेक्निकल रिसेशन में फंस गई है।

IMF ने इस कारोबारी साल में देश की GDP में 10.3% गिरावट का अनुमान दिया है

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने अपने अनुमान में कहा है कि इस कारोबारी साल में देश की GDP में 10.3 फीसदी गिरावट रह सकती है, क्योंकि लॉकडाउन के दौरान GDP को भारी नुकसान पहुंचा है। अनलॉक की प्रक्रिया शुरू होने के बाद GDP में भारी उछाल का अनुमान जताया गया है, लेकिन लॉकडाउन का कुछ असर लंबे समय तक रहने वाला है। सरकार GDP के आंकड़े 27 नवंबर को जारी करेगी।

महामारी का आपूर्ति पक्ष की सभी पहुलओं पर नकारात्मक असर पड़ा है

HSBC होल्डिंग पीएलसी ने कहा कि महामारी के बाद भारत की विकास दर घटकर 5 फीसदी पर आ सकती है, जो महामारी शुरू होने से पहले 6 फीसदी थी और वैश्विक वित्तीय संकट से पहले 7 फीसदी से ज्यादा थी। किशोर ने कहा कि आपूर्ति पक्ष की सभी पहुलओं पर नकारात्मक असर पड़ा है और सिर्फ मानव संशाधन का योगदान महामारी के पहले वाले स्तर पर बना हुआ है। बैलेंसशीट का तनाव महामारी के बाद और बढ़ने की आशंका के कारण इन्वेस्टमेंट रिकवरी में ज्यादा देरी लग सकती है।