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बढ़ी महंगाई और कमजोर इकोनॉमी ने फैलाई उदासी:मोटी रकम खर्च करने से परहेज कर सकते हैं उपभोक्ता, सोने जैसे फिजिकल एसेट में बढ़ा सकते हैं निवेश

13 दिन पहले
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आम उपभोक्ताओं को आज के हालात और आने वाला कल, दोनों ठीक नहीं लग रहे। मौजूदा हालात को लेकर उनमें निराशा बढ़ी है और भविष्य को लेकर उनका उत्साह घटा है। इससे लोग उपभोग की चीजों पर मोटी रकम खर्च करने से परहेज कर सकते हैं। उनका खर्च घटाना घरेलू खपत के सपोर्ट से चलने वाली इंडियन इकोनॉमी के लिए सही नहीं होगा।

करेंट सिचुएशन इंडेक्स जनवरी के 55.5 से गिरकर मार्च में 53.1 रह गया

रिजर्व बैंक के कंज्यूमर कॉन्फिडेंस सर्वे के मुताबिक करेंट सिचुएशन इंडेक्स जनवरी के 55.5 से गिरकर मार्च में 53.1 रह गया। इस इंडेक्स के 100 से ऊपर रहने पर माना जाता है कि उपभोक्ता मौजूदा हालात को लेकर खुश हैं। इसका 100 से नीचे होना उनमें निराशा का भाव होने का संकेत होता है और वे आजकल ही नहीं, अगले साल से भी निराश हैं।

इकोनॉमी में कमजोरी, आमदनी में गिरावट, महंगाई में बढ़ोतरी का असर

फ्यूचर एक्सपेक्टेशंस इंडेक्स जनवरी में 117.1 रहा था मार्च में घटकर 108.8 पर आ गया। RBI के मुताबिक, उपभोक्ताओं में निराशा का भाव आने की वजह यह है कि देश की आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है। इसके साथ उनकी आमदनी में कमी आ रही है लेकिन महंगाई बढ़ रही है। गौरतलब है कि रिजर्व बैंक का करेंट सिचुएशन इंडेक्स सितंबर 2020 में 49.9 के रिकॉर्ड लो लेवल पर चला गया था।

महंगाई के चलते अहम ब्याज दर में कटौती भी नहीं कर पा रहा RBI

RBI ने सर्वे में यह भी कहा है कि महंगाई उसके लिए अतिरिक्त चुनौती पैदा कर रही है। इसकी वजह से उसको इकोनॉमी को सपोर्ट देने के लिए ब्याज दरों में कटौती का दौर पिछले साल रोकना पड़ गया था। महंगाई के ऊंचे लेवल पर बने रहने से रिजर्व बैंक फिर से रेट कट नहीं कर पा रहा है। बुधवार को खत्म मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की मीटिंग में उसको रेपो रेट 4% पर बनाए रखना पड़ गया।

उपभोक्ताओं के हिसाब से महंगाई एक साल ऊंचे लेवल पर बनी रह सकती है

रिजर्व बैंक के मुताबिक, लोगों को महंगाई अभी जनवरी से 0.50% ज्यादा यानी 8.7% लग रही है। उनका यह भी कहना है कि अगले तीन महीनों में महंगाई 0.80% बढ़कर 10.1% पर जा सकती है। उनके हिसाब से महंगाई एक साल ऊंचे लेवल पर बनी रह सकती है।

जल्द शुरू हो सकती है कोर इनफ्लेशन में बढ़ोतरी: HSBC सिक्योरिटीज

HSBC सिक्योरिटीज एंड कैपिटल मार्केट्स की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजल भंडारी कहती हैं, 'कंपनियां कच्चे माल के बढ़े दाम का बोझ कस्टमर पर डाल रही हैं। दबी मांग सामने आने से सेवाओं की भी कीमत बढ़ रही है। इन सबसे कोर इनफ्लेशन (कुल महंगाई में फ्यूल और फूड आइटम निकालने के बाद का आंकड़ा) में बढ़ोतरी शुरू हो सकती है।’

सोने जैसे फिजिकल एसेट में निवेश बढ़ने से उसके इंपोर्ट में इजाफा होगा

भंडारी के मुताबिक 'महंगाई तेज रहने और रियल इंटरेस्ट रेट (इंटरेस्ट रेट में महंगाई दर घटाने से मिलने वाला आंकड़ा) जीरो से नीचे रहने से अलग तरह की समस्याएं होंगी। सोने जैसे फिजिकल एसेट में निवेश बढ़ सकता है जिससे उसका इंपोर्ट भी बढ़ेगा। उससे आयात निर्यात का संतुलन बिगड़ेगा। फाइनेंशियल प्रॉडक्ट में निवेश घटने से ग्रोथ की उम्मीदें भी कम होंगी।'

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