एक्सपर्ट एडवाइस / सोने की ज्वैलरी नहीं गोल्ड ईटीएफ में करें निवेश, डिजिटल गोल्ड दिलाएगा फायदा

investment in gold etf for good and safe investment
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investment in gold etf for good and safe investment

दैनिक भास्कर

Oct 21, 2019, 11:52 AM IST

यूटिलिटी डेस्क. भारतीय महिलाओं को गोल्ड ज्वैलरी बहुत पसंद होती हैं लेकिन यह निवेश का आदर्श विकल्प नहीं है। सोने के दाम कम होना किसी खुशखबरी-सा लगता है। पिछले कुछ हफ्तों में ऐसा ही हुआ है। यह सोने में निवेश का अच्छा समय माना जा रहा है, लेकिन ध्यान रखें गोल्ड ज्वैलरी को असली निवेश न मानें। गोल्ड सस्ता होने पर सोने की चूड़़ियां, हार या दूसरे गहने खरीद लेना पहले अच्छा विकल्प माना जाता, जब निवेश के बहुत विकल्प नहीं थे। लेकिन आज आर्थिक अनिश्चितता के दौर में कई विकल्पों के साथ सोने में निवेश अच्छा है। अगर सोने में निवेश करते भी हैं, तो ज्वैलरी में बिल्कुल न करें। हम सोने की चमक से तो अंजान नहीं है, लेकिन उन तकनीकों को अपनाने में पीछे हैं, जिससे सोने को रखना आसान, सुरक्षित और सस्ता पड़ता है। 

इससे जुड़ी खास बातें...

गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) के जरिए निवेशक इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से सोना खरीद/बेच सकते हैं और आर्बिटेज गेन (एक मार्केट से खरीदकर दूसरे मार्केट में बेचने पर लाभ) हासिल कर सकते हैं। भारत में गोल्ड ईटीएफ 2007 से चल रहे हैं और एनएसई और बीएसई में रेगुलेटेड इंस्ट्रूमेंट्स हैं। इन्हें कई म्यूचुअल फंड स्कीम्स के जरिए खरीद सकते हैं, जो बुलियन, माइनिंग या सोने के उत्पादन से जुड़े सहयोगी बिजनेसों में निवेश करती हैं। गोल्ड ईटीएफ में निवेश के कई फायदे हैं, जो इसे सोने के अन्य विकल्पों से बेहतर बनाते हैं।

ईटीएफ के जरिए सोना यूनिट्स में खरीदते हैं, जहां एक यूनिट एक ग्राम की होती है। इससे कम मात्रा में या एसआईपी (सिस्टमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान) के जरिए सोना खरीदना आसान हो जाता है। वहीं भौतिक (फिजिकल) सोना आमतौर पर तोला (10 ग्राम) के भाव बेचा जाता है। ज्वैलर से खरीदने पर कई बार कम मात्रा में सोना खरीदना संभव नहीं हो पाता।

गोल्ड ईटीएफ की कीमत पारदर्शी और एक समान होती है। यह लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन का अनुसरण करता है, जो कीमती धातुओं की ग्लोबल अथॉरिटी है। वहीं फिजिकल गोल्ड की अलग-अलग विक्रेता/ज्वैलर अलग-अलग कीमत पर दे सकते हैं।

गोल्ड ईटीएफ से खरीदे गए सोने की 99.5% शुद्धता की गारंटी होती है, जो कि सबसे उच्च स्तर की शुद्धता है। आप जो सोना लेंगी उसकी कीमत इसी शुद्धता पर आधारित होगी।

गोल्ड ईटीएफ खरीदने में 0.5% या इससे कम का ब्रोकरेज लगता और पोर्टफोलियो मैनेज करने के लिए सालाना 1% चार्ज देना पड़ता है। यह उस 8 से 30 फीसदी मेकिंग चार्जेस की तुलना में कुछ भी नहीं है जो ज्वैलर और बैंक को देना पड़ता है, भले ही आप सिक्के या बार खरीदें।

ईटीएफ सोना बेचने या खरीदने में ट्रेडर्स को सिर्फ ब्रोकरेज देना होता है। वहीं फिजिकल गोल्ड में लाभ का बड़ा हिस्सा मेकिंग चार्जेस में चला जाता है और यह सिर्फ ज्वैलर्स को ही बेचा जा सकता है, भले ही सोना बैंक से ही क्यों न लिया हो।

इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड डीमैट एकाउंट में होता है जिसमें सिर्फ वार्षिक डीमैट चार्ज देना होता है। साथ ही चोरी होने का डर नहीं होता। वहीं फिजिकल गोल्ड में चोरी के खतरे के अलावा उसकी सुरक्षा में भी खर्च करना होता है।

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